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Karnal News: स्वस्थ जीवन के संदेश के साथ स्केट्स पर निकला मां का भक्त
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भक्ति की राह में आस्था ही साधन बन जाती है। मध्यप्रदेश के सीकरी निवासी 19 वर्षीय राजीव इसका उदाहरण हैं। राजीव माता वैष्णो देवी के दर्शन करने निकले हैं। ट्रेन और बस नहीं, स्केट्स पर। रास्ते में वह लोगों को स्वस्थ जीवन का संदेश भी दे रहे हैं।
राजीव ने 22 सितंबर को मध्यप्रदेश के माताटीला से यात्रा शुरू की। लक्ष्य अक्तूबर के पहले सप्ताह में कटरा (जम्मू) पहुंचकर माता वैष्णो देवी के दरबार में माथा टेकने का है। तकरीबन 1151 किलोमीटर की दूरी तय करनी है। सोमवार सुबह 11 बजे राजीव करनाल पहुंचे। लोगों ने उनका स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि यात्रा केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा उद्देश्य भी है। वह लोगों को संदेश देना चाहता है कि खेल और व्यायाम से जीवन को स्वस्थ रखा जा सकता है। स्केट्स पर लगातार सफर करते हुए वह जहां भी पहुंचते हैं, लोग उत्साहित हो जाते हैं। उनकी हिम्मत की सराहना करते हैं।
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राजीव ने बताया कि स्केट्स पर इतनी लंबी यात्रा आसान नहीं है। सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और मौसम सबसे बड़ी चुनौती होते हैं। पैरों में दर्द और थकान से हिम्मत टूटने लगती है। माता रानी के दर्शन की आस और लोगों का उत्साह उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
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करनाल। भक्ति की राह में आस्था ही साधन बन जाती है। मध्यप्रदेश के सीकरी निवासी 19 वर्षीय राजीव इसका उदाहरण हैं। राजीव माता वैष्णो देवी के दर्शन करने निकले हैं। ट्रेन और बस नहीं, स्केट्स पर। रास्ते में वह लोगों को स्वस्थ जीवन का संदेश भी दे रहे हैं।
राजीव ने 22 सितंबर को मध्यप्रदेश के माताटीला से यात्रा शुरू की। लक्ष्य अक्तूबर के पहले सप्ताह में कटरा (जम्मू) पहुंचकर माता वैष्णो देवी के दरबार में माथा टेकने का है। तकरीबन 1151 किलोमीटर की दूरी तय करनी है। सोमवार सुबह 11 बजे राजीव करनाल पहुंचे। लोगों ने उनका स्वागत किया।
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उन्होंने कहा कि यात्रा केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा उद्देश्य भी है। वह लोगों को संदेश देना चाहता है कि खेल और व्यायाम से जीवन को स्वस्थ रखा जा सकता है। स्केट्स पर लगातार सफर करते हुए वह जहां भी पहुंचते हैं, लोग उत्साहित हो जाते हैं। उनकी हिम्मत की सराहना करते हैं।
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राजीव ने बताया कि स्केट्स पर इतनी लंबी यात्रा आसान नहीं है। सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और मौसम सबसे बड़ी चुनौती होते हैं। पैरों में दर्द और थकान से हिम्मत टूटने लगती है। माता रानी के दर्शन की आस और लोगों का उत्साह उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।