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मशीन से नहीं मिलर्स दांत तले दबाकर बता देते हैं धान में नमी ज्यादा है, निर्धारित रेट से 170 रुपए कम खरीद रहे धान
Updated Wed, 03 Oct 2018 12:10 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल । नई अनाज मंडी में सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद भी किसानों की पीआर धान को राइस मिलर्स 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीद रहे हैं। राइस मिलर्स किसान को धान में नमी ज्यादा होने का बहाना बता रहे हैं और किसानों के साथ प्रति क्विंटल 170 रुपये की कटौती की जा रही है। खास बात ये है कि यहां पर मशीन से धान की नमी चेक नहीं की जाती, बल्कि आढ़ती और मिलर्स दांत तले दाना दबाते हैं और कह देते हैं कि नमी ज्यादा है। इसलिए रेट कम लगेगा। मजबूरी में किसान को अपना धान सस्ते दामों पर बेचना पड़ रहा है। इतना कुछ सरेआम हो रहा है और मार्केट कमेटी के अधिकारी चुपचाप खेल देख रहे हैं। ऐसा केवल करनाल की मंडी में ही नहीं बल्कि जिलेभर की सभी मंडियों के यही हालात हैं।
नियमानुसार धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। इसके जांच के लिए बकायदा नमी जांचने वाली मशीन भी हैं। राइस मिलर्स बिना मशीन में जांच करे धान की ढेरी पर जाकर एक दो दाने उठाते हैं और दांतों तले चबाकर उसमें नमी की मात्रा ज्यादा बता देते हैं। वहीं, दूसरी ओर आधे से ज्यादा किसानों को न तो ये पता है कि धान में नमी की मात्रा कितनी होनी चाहिए और न ही धान के ग्रेड ए के रेट का पता है। बता दें ग्रेड ए धान का रेट प्रति क्विंटल 1770 रुपये और बी ग्रेड का रेट 1750 रुपये प्रति क्विंटल है। किसान पवन ने बताया कि अनाज मंडी में बहुत कम ढेरियों में नमी की जांच मशीन से की जाती है। सरकारी बोली लगाने वाले भी किसी-किसी ढेरी की नमी मशीन से चेक करते हैं। प्रशासन को निर्देश देने चाहिए कि किसान की हर ढेरी की जांच मशीन से होनी चाहिए, ताकि किसान को भी पता चल सके की उसकी धान में नमी की मात्रा कितनी है।
दिनभर करते हैं सरकारी बोली का इंतजार
किसानों ने बताया कि वे पीआर धान-26 लेकर अनाज मंडी में आए थे तो वहां उन्होंने सरकारी खरीद के लिए इंतजार किया। इस दौरान एक राइस मिलर्स आया और उसने धान को देखकर 1700 रुपये रेट लगा दिया और कहा की इसमें तो नमी है और हरे दाने हैं। इसी दौरान उसके आढ़ती ने भी कहा कि सरकारी बोली तो शाम तक ही यहां पहुंचेगी। वह भी इसे खरीदे या न खरीदें। इसके बाद किसान को मजबूरन वह धान 1770 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से उस राइस मिलर्स को बेचनी पड़ी। ऐसा अनाज मंडी में एक किसान के साथ नहीं होता। राइस मिलर्स नमी का नाम लेकर कम रेट में धान को खरीद लेते हैं। इससे किसानों को सरेआम लूटा जा रहा है, क्योंकि इस समय किसानों के पास इतना समय नहीं है कि वह सुबह से शाम तक सरकारी बोली का इंतजार करता रहे।
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तीन एजेेंसियों ने खरीदी 70 हजार क्विंटल धान
सरकारी खरीद के दूसरे दिन हैफेड, फूड एंड सप्लाई व वेयर हाउस ने सरकारी खरीद के दूसरे दिन करीब 70 हजार क्विंटल धान की खरीद की। इससे पहले एक अक्तूबर को हैफेड व फूड एंड सप्लाई ने करीब साढ़े 15 हजार क्विंटल धान की खरीद की थी।
..................
मैं पीआर-26 लेकर आया था। इस दौरान आढ़ती बोला कि सरकारी बोली शाम तक होगी। कुछ समय बाद एक राइस मिल का व्यक्ति आया उस धान की ढेरी को देखा और कहा कि इसमें तो हरा दाना है और 1700 रुपये रेट लगाया। ऐसे में वह शाम तक मंडी में रूक नहीं सकता था, तो उसे ही उसने 1700 रुपये में धान बेचनी पड़ी।
-प्रेम सिंह, गांव कुटेल, किसान।
..............
यदि कोई आढ़ती व उसका मुनीम राइस मिलर्स को धान बेचने के लिए किसान को मजबूर करता है तो किसान मुझे आकर शिकायत कर सकता है या फिर मार्केट कमेटी में जाकर लिखित शिकायत दे। उस आढ़ती के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कराई जाएगी। आढ़ती एसोसिएशन किसानों के साथ है। किसान सरकारी रेट पर ही अपनी धान को बेचें।
-रजनीश चौधरी, आढ़ती एसोसिएशन, करनाल।
............................
किसानों को धान की खरीद से संबंधित कोई परेशानी है तो वह तुरंत कार्यालय में आकर शिकायत करें। इसके साथ ही किसान धान को सुखाकर ही अनाज मंडी में लेकर आए ताकि आते ही धान सरकारी रेट में बिक सके।
-सुरेंद्र कुमार, सचिव मार्केट कमेटी, करनाल।
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करनाल । नई अनाज मंडी में सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद भी किसानों की पीआर धान को राइस मिलर्स 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीद रहे हैं। राइस मिलर्स किसान को धान में नमी ज्यादा होने का बहाना बता रहे हैं और किसानों के साथ प्रति क्विंटल 170 रुपये की कटौती की जा रही है। खास बात ये है कि यहां पर मशीन से धान की नमी चेक नहीं की जाती, बल्कि आढ़ती और मिलर्स दांत तले दाना दबाते हैं और कह देते हैं कि नमी ज्यादा है। इसलिए रेट कम लगेगा। मजबूरी में किसान को अपना धान सस्ते दामों पर बेचना पड़ रहा है। इतना कुछ सरेआम हो रहा है और मार्केट कमेटी के अधिकारी चुपचाप खेल देख रहे हैं। ऐसा केवल करनाल की मंडी में ही नहीं बल्कि जिलेभर की सभी मंडियों के यही हालात हैं।
नियमानुसार धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। इसके जांच के लिए बकायदा नमी जांचने वाली मशीन भी हैं। राइस मिलर्स बिना मशीन में जांच करे धान की ढेरी पर जाकर एक दो दाने उठाते हैं और दांतों तले चबाकर उसमें नमी की मात्रा ज्यादा बता देते हैं। वहीं, दूसरी ओर आधे से ज्यादा किसानों को न तो ये पता है कि धान में नमी की मात्रा कितनी होनी चाहिए और न ही धान के ग्रेड ए के रेट का पता है। बता दें ग्रेड ए धान का रेट प्रति क्विंटल 1770 रुपये और बी ग्रेड का रेट 1750 रुपये प्रति क्विंटल है। किसान पवन ने बताया कि अनाज मंडी में बहुत कम ढेरियों में नमी की जांच मशीन से की जाती है। सरकारी बोली लगाने वाले भी किसी-किसी ढेरी की नमी मशीन से चेक करते हैं। प्रशासन को निर्देश देने चाहिए कि किसान की हर ढेरी की जांच मशीन से होनी चाहिए, ताकि किसान को भी पता चल सके की उसकी धान में नमी की मात्रा कितनी है।
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दिनभर करते हैं सरकारी बोली का इंतजार
किसानों ने बताया कि वे पीआर धान-26 लेकर अनाज मंडी में आए थे तो वहां उन्होंने सरकारी खरीद के लिए इंतजार किया। इस दौरान एक राइस मिलर्स आया और उसने धान को देखकर 1700 रुपये रेट लगा दिया और कहा की इसमें तो नमी है और हरे दाने हैं। इसी दौरान उसके आढ़ती ने भी कहा कि सरकारी बोली तो शाम तक ही यहां पहुंचेगी। वह भी इसे खरीदे या न खरीदें। इसके बाद किसान को मजबूरन वह धान 1770 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से उस राइस मिलर्स को बेचनी पड़ी। ऐसा अनाज मंडी में एक किसान के साथ नहीं होता। राइस मिलर्स नमी का नाम लेकर कम रेट में धान को खरीद लेते हैं। इससे किसानों को सरेआम लूटा जा रहा है, क्योंकि इस समय किसानों के पास इतना समय नहीं है कि वह सुबह से शाम तक सरकारी बोली का इंतजार करता रहे।
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तीन एजेेंसियों ने खरीदी 70 हजार क्विंटल धान
सरकारी खरीद के दूसरे दिन हैफेड, फूड एंड सप्लाई व वेयर हाउस ने सरकारी खरीद के दूसरे दिन करीब 70 हजार क्विंटल धान की खरीद की। इससे पहले एक अक्तूबर को हैफेड व फूड एंड सप्लाई ने करीब साढ़े 15 हजार क्विंटल धान की खरीद की थी।
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मैं पीआर-26 लेकर आया था। इस दौरान आढ़ती बोला कि सरकारी बोली शाम तक होगी। कुछ समय बाद एक राइस मिल का व्यक्ति आया उस धान की ढेरी को देखा और कहा कि इसमें तो हरा दाना है और 1700 रुपये रेट लगाया। ऐसे में वह शाम तक मंडी में रूक नहीं सकता था, तो उसे ही उसने 1700 रुपये में धान बेचनी पड़ी।
-प्रेम सिंह, गांव कुटेल, किसान।
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यदि कोई आढ़ती व उसका मुनीम राइस मिलर्स को धान बेचने के लिए किसान को मजबूर करता है तो किसान मुझे आकर शिकायत कर सकता है या फिर मार्केट कमेटी में जाकर लिखित शिकायत दे। उस आढ़ती के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कराई जाएगी। आढ़ती एसोसिएशन किसानों के साथ है। किसान सरकारी रेट पर ही अपनी धान को बेचें।
-रजनीश चौधरी, आढ़ती एसोसिएशन, करनाल।
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किसानों को धान की खरीद से संबंधित कोई परेशानी है तो वह तुरंत कार्यालय में आकर शिकायत करें। इसके साथ ही किसान धान को सुखाकर ही अनाज मंडी में लेकर आए ताकि आते ही धान सरकारी रेट में बिक सके।
-सुरेंद्र कुमार, सचिव मार्केट कमेटी, करनाल।