{"_id":"5ca65263bdec22141f00f2ac","slug":"151554403939-karnal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शराब का ठेका चलाने के लिए लेना होगा फूड सेफ्टी विभाग से लाइसेंस।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शराब का ठेका चलाने के लिए लेना होगा फूड सेफ्टी विभाग से लाइसेंस।
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। शराब का कारोबार करने वाले शराब ठेकेदारों को अब शराब बेचने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए सरकार तैयारी कर रही है। जल्द ही विभाग की ओर से निर्देश भी जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही अब शराब की बोतल पर बीसेफ डोंट ड्रिंक एंड ड्राइव लिखा आएगा, ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके। जिले में शराब कारोबार को 21 जोन में बांटा गया है। इनमें करीब 121 शराब के ठेके हैं जो देसी और अंग्रेजी दोनों शराब के हैं।
लाइसेंस नहीं लिया तो लगेगा जुर्माना
आबकारी विभाग ने भले ही ठेकेदारों को शराब बेचने के लिए हरी झंडी दे दी हो, लेकिन फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ठेकेदार बिना लाइसेंस शराब नहीं बेच सकेंगे। शराब ठेके को फूड सेफ्टी एक्ट के तहत स्वास्थ्य विभाग ने लाइसेंस लेना होगा। बिना लाइसेंस शराब बेचने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जुर्माना और पेनल्टी लगा सकेगी।
हर महीने भरे जाएंगे शराब के सैंपल, मिलावट होने पर हो सकती है जेल
स्वास्थ्य विभाग के फूड सेफ्टी अधिकारी शराब ठेकों पर जाकर हर महीने शराब के सैंपल भरेंगे। इसके लिए टारगेट निर्धारित किए जाएंगे। वे ब्रांड वाइज शराब के सैंपल उठाएंगे। इसके बाद सैंपलों को जांच के लिए भिजवाया जाएगा। वहां पर अल्कोहल की मात्रा में हेराफेरी या दूसरी मिलावट पाई गई तो ठेकेदार पर कार्रवाई शुरू की जाएगी। कार्रवाई में जुर्माना, पेनल्टी और जेल का प्रावधान शामिल है।
विज्ञापन
डॉट सिंबल किया जाएगा निर्धारित
शराब की बोतल पर भी डॉट सिंबल आएगा, जैसे अन्य खाद्य सामग्री पर प्रिंट होता है। फिलहाल हरा और लाल दो ही डॉट सिंबल है। हरा डॉट सिंबल वेजिटेरियन को दर्शाता है कि वह वस्तु शाकाहारी है। इसी प्रकार लाल सिंबल नॉन वेजिटेरियन यानी मांसाहारी को दर्शाता है। विभाग अभी यह तय कर रहा है कि शराब को किस सिंबल में लिया जाए या फिर शराब के लिए अलग से सिंबल बनाया जाए।
शराब के ठेकेदारों को अब विभाग से फूड सेफ्टी का लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए जल्द ही निर्देश आने वाले हैं और उसमें में फीस के साथ-साथ सभी प्रक्रिया भी निर्धारित की जाएगी। -श्याम लाल, फूड सेफ्टी ऑफिसर करनाल।
विज्ञापन
करनाल। शराब का कारोबार करने वाले शराब ठेकेदारों को अब शराब बेचने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए सरकार तैयारी कर रही है। जल्द ही विभाग की ओर से निर्देश भी जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही अब शराब की बोतल पर बीसेफ डोंट ड्रिंक एंड ड्राइव लिखा आएगा, ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके। जिले में शराब कारोबार को 21 जोन में बांटा गया है। इनमें करीब 121 शराब के ठेके हैं जो देसी और अंग्रेजी दोनों शराब के हैं।
लाइसेंस नहीं लिया तो लगेगा जुर्माना
आबकारी विभाग ने भले ही ठेकेदारों को शराब बेचने के लिए हरी झंडी दे दी हो, लेकिन फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ठेकेदार बिना लाइसेंस शराब नहीं बेच सकेंगे। शराब ठेके को फूड सेफ्टी एक्ट के तहत स्वास्थ्य विभाग ने लाइसेंस लेना होगा। बिना लाइसेंस शराब बेचने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जुर्माना और पेनल्टी लगा सकेगी।
विज्ञापन
हर महीने भरे जाएंगे शराब के सैंपल, मिलावट होने पर हो सकती है जेल
स्वास्थ्य विभाग के फूड सेफ्टी अधिकारी शराब ठेकों पर जाकर हर महीने शराब के सैंपल भरेंगे। इसके लिए टारगेट निर्धारित किए जाएंगे। वे ब्रांड वाइज शराब के सैंपल उठाएंगे। इसके बाद सैंपलों को जांच के लिए भिजवाया जाएगा। वहां पर अल्कोहल की मात्रा में हेराफेरी या दूसरी मिलावट पाई गई तो ठेकेदार पर कार्रवाई शुरू की जाएगी। कार्रवाई में जुर्माना, पेनल्टी और जेल का प्रावधान शामिल है।
विज्ञापन
डॉट सिंबल किया जाएगा निर्धारित
शराब की बोतल पर भी डॉट सिंबल आएगा, जैसे अन्य खाद्य सामग्री पर प्रिंट होता है। फिलहाल हरा और लाल दो ही डॉट सिंबल है। हरा डॉट सिंबल वेजिटेरियन को दर्शाता है कि वह वस्तु शाकाहारी है। इसी प्रकार लाल सिंबल नॉन वेजिटेरियन यानी मांसाहारी को दर्शाता है। विभाग अभी यह तय कर रहा है कि शराब को किस सिंबल में लिया जाए या फिर शराब के लिए अलग से सिंबल बनाया जाए।
शराब के ठेकेदारों को अब विभाग से फूड सेफ्टी का लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए जल्द ही निर्देश आने वाले हैं और उसमें में फीस के साथ-साथ सभी प्रक्रिया भी निर्धारित की जाएगी। -श्याम लाल, फूड सेफ्टी ऑफिसर करनाल।