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Karnal News: पहचान गोपनीय रख रोज 10-15 लोग ले रहे डिप्रेशन का इलाज
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करनाल। मानसिक परेशानी से जूझ रहे कई लोग अब इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने के बजाय पहले अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए मदद ले रहे हैं। सामाजिक झिझक और लोगों के बीच मानसिक बीमारी को लेकर बनी धारणा के कारण कई मरीज आमने-सामने परेशानी बताने से बचते हैं। ऐसे लोगों के लिए टेली-मानस सहारा बन रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 10 से 15 लोग टेली-मानस के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श ले रहे हैं।
इनमें अवसाद से परेशान लोगों की संख्या अधिक है। इसके अलावा आत्महत्या का प्रयास कर चुके या गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहे लोग भी दूरभाष के माध्यम से परामर्श ले रहे हैं। बातचीत के दौरान उनकी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखते हुए उनकी परेशानी समझने का प्रयास किया जाता है। डॉ. सौभाग्य बतातीं हैं कि जिला नागरिक अस्पताल के मनोरोग चिकित्सा विभाग की टीम टेली-मानस के माध्यम से आने वाले लोगों की समस्या सुनकर उन्हें परामर्श देती है। यदि किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष चिकित्सकीय जांच या विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता महसूस होती है तो उसे आगे की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है। डॉ. कौशिक के अनुसार मानसिक परेशानी को छिपाने के बजाय समय रहते सहायता लेना जरूरी है। खासकर यदि किसी व्यक्ति को स्वयं को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हों तो परिवार के सदस्य उसे अकेला न छोड़ें और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
अवसाद से लेकर आत्महत्या के प्रयास तक के मामले
जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में अवसाद प्रमुख समस्या के रूप में सामने आ रहा है। लगातार उदासी, तनाव, नींद में बदलाव, किसी काम में मन न लगना, स्वयं को दूसरों से अलग कर लेना और निराशा जैसे लक्षणों से परेशान लोग परामर्श ले रहे हैं।
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इनमें अवसाद से परेशान लोगों की संख्या अधिक है। इसके अलावा आत्महत्या का प्रयास कर चुके या गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहे लोग भी दूरभाष के माध्यम से परामर्श ले रहे हैं। बातचीत के दौरान उनकी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखते हुए उनकी परेशानी समझने का प्रयास किया जाता है। डॉ. सौभाग्य बतातीं हैं कि जिला नागरिक अस्पताल के मनोरोग चिकित्सा विभाग की टीम टेली-मानस के माध्यम से आने वाले लोगों की समस्या सुनकर उन्हें परामर्श देती है। यदि किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष चिकित्सकीय जांच या विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता महसूस होती है तो उसे आगे की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है। डॉ. कौशिक के अनुसार मानसिक परेशानी को छिपाने के बजाय समय रहते सहायता लेना जरूरी है। खासकर यदि किसी व्यक्ति को स्वयं को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हों तो परिवार के सदस्य उसे अकेला न छोड़ें और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
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अवसाद से लेकर आत्महत्या के प्रयास तक के मामले
जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में अवसाद प्रमुख समस्या के रूप में सामने आ रहा है। लगातार उदासी, तनाव, नींद में बदलाव, किसी काम में मन न लगना, स्वयं को दूसरों से अलग कर लेना और निराशा जैसे लक्षणों से परेशान लोग परामर्श ले रहे हैं।
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