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श्रीमद्भगवद्गीता पवित्र ग्रंथ होने के साथ मानवता का गौरव भी : सुरभि गर्ग
Sat, 29 Nov 2025 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 29 Nov 2025 12:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। नगर परिषद की अध्यक्ष सुरभि गर्ग ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता पवित्र ग्रंथ होने के साथ संपूर्ण मानवता का गौरव भी है। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश विश्व के कोने-कोने तक पहुंच रहा है और मनुष्य गीता के ज्ञान को अपनाकर अपना जीवन अधिक सफल और सार्थक बना सकता है।
वह शुक्रवार को गीता जयंती महोत्सव के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जखौली अड्डा में आयोजित गीता सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण और स्वस्तिवाचन के साथ हुआ, जिसकी अगुवाई डॉ. हरीश कुमार ने की। सेमिनार में दिल्ली जेएनयू से आए मुख्य वक्ता प्रो. कृष्ण मोहन पांडेय, आचार्य रामनिवास पटवारी तथा संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ. कृष्ण चंद्र पांडेय विषय विशेषज्ञ के रूप में मौजूद रहे।
संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय गोयल ने कहा कि गीता का ज्ञान हर उम्र के व्यक्ति के लिए प्रासंगिक है और जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन करता है। मुख्य वक्ता प्रो. कृष्ण मोहन पांडेय ने कहा कि गीता मनुष्य को कर्म, ज्ञान और भक्ति—तीनों मार्गों का संदेश देती है। शिशु अवस्था में कर्म प्रमुख होता है, युवावस्था में ज्ञान आवश्यक होता है और प्रौढ़ावस्था में भक्ति की आवश्यकता पड़ती है। गीता में इन तीनों का समन्वित ज्ञान मिलता है, जिससे मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है।
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आचार्य रामनिवास शर्मा पटवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति विशाल और गौरवशाली है, जो गंगा की निर्मल धारा की तरह निरंतर बहती रहती है। जब-जब समाज पर संकट आया, ऋषि-मुनियों ने मार्गदर्शन देकर उसका समाधान बताया। गीता के प्रत्येक श्लोक में जीवन की समस्याओं का उत्तर छिपा है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य संजय चौधरी ने कुरुक्षेत्र और कैथल में आयोजित गीता जयंती महोत्सव की रूपरेखा बताई।
मंच का संचालन डॉ. गोविंद वल्लभ ने किया, जबकि डीआईपीआरओ नसीब सैनी ने सभी का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में अमरजीत छाबड़ा, सतीश सिरटा, भीमसेन अग्रवाल, नरेंद्र जिंदल, यशपाल प्रजापति, निधि मोहन, मधु, कैलाश चंद्र आदि उपस्थित रहे।
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कैथल। नगर परिषद की अध्यक्ष सुरभि गर्ग ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता पवित्र ग्रंथ होने के साथ संपूर्ण मानवता का गौरव भी है। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश विश्व के कोने-कोने तक पहुंच रहा है और मनुष्य गीता के ज्ञान को अपनाकर अपना जीवन अधिक सफल और सार्थक बना सकता है।
वह शुक्रवार को गीता जयंती महोत्सव के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जखौली अड्डा में आयोजित गीता सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण और स्वस्तिवाचन के साथ हुआ, जिसकी अगुवाई डॉ. हरीश कुमार ने की। सेमिनार में दिल्ली जेएनयू से आए मुख्य वक्ता प्रो. कृष्ण मोहन पांडेय, आचार्य रामनिवास पटवारी तथा संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ. कृष्ण चंद्र पांडेय विषय विशेषज्ञ के रूप में मौजूद रहे।
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संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय गोयल ने कहा कि गीता का ज्ञान हर उम्र के व्यक्ति के लिए प्रासंगिक है और जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन करता है। मुख्य वक्ता प्रो. कृष्ण मोहन पांडेय ने कहा कि गीता मनुष्य को कर्म, ज्ञान और भक्ति—तीनों मार्गों का संदेश देती है। शिशु अवस्था में कर्म प्रमुख होता है, युवावस्था में ज्ञान आवश्यक होता है और प्रौढ़ावस्था में भक्ति की आवश्यकता पड़ती है। गीता में इन तीनों का समन्वित ज्ञान मिलता है, जिससे मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है।
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आचार्य रामनिवास शर्मा पटवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति विशाल और गौरवशाली है, जो गंगा की निर्मल धारा की तरह निरंतर बहती रहती है। जब-जब समाज पर संकट आया, ऋषि-मुनियों ने मार्गदर्शन देकर उसका समाधान बताया। गीता के प्रत्येक श्लोक में जीवन की समस्याओं का उत्तर छिपा है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य संजय चौधरी ने कुरुक्षेत्र और कैथल में आयोजित गीता जयंती महोत्सव की रूपरेखा बताई।
मंच का संचालन डॉ. गोविंद वल्लभ ने किया, जबकि डीआईपीआरओ नसीब सैनी ने सभी का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में अमरजीत छाबड़ा, सतीश सिरटा, भीमसेन अग्रवाल, नरेंद्र जिंदल, यशपाल प्रजापति, निधि मोहन, मधु, कैलाश चंद्र आदि उपस्थित रहे।