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Kaithal News: बेटियों के सपनों को पंख देने के लिए हजारों किलोमीटर का सफर तय कर कैथल पहुंचे अभिभावक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:40 PM IST
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Parents traveled thousands of kilometers to reach Kaithal to help give wings to their daughters' dreams.
तमिलनाडु से बेटियों के साथ राष्ट्रीय बॉ​क्सिंग चैंपियन​शिप के लिए पहुंचे अ​भिभावक। संवाद
कैथल। बेटियां रिंग में प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाजों से मुकाबला कर रही हैं, तो स्टेडियम के बाहर उनके माता-पिता भी एक अलग परीक्षा से गुजर रहे हैं। किसी ने नौकरी से छुट्टी ली है, तो किसी मां ने घर की जिम्मेदारियां परिवार के दूसरे सदस्यों को सौंप दी हैं। हजारों किलोमीटर का सफर तय कर वे कैथल पहुंचे हैं, ताकि उनकी बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखा सकें। आरकेएसडी कॉलेज में 15 से 20 अक्तूबर तक चल रही सीबीएसई राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंची इन बेटियों के साथ उनके अभिभावकों का समर्पण भी देखने के लिए मिल रहा है।
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इन परिवारों के लिए यह सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि बेटियों के सपनों को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है। अभिभावकों को उम्मीद है कि आज उनकी बेटियों को मिल रहा प्रोत्साहन कल उनके बेहतर भविष्य की नींव बनेगा।
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ड्राइवर पिता ने बेटी के लिए ली 10 दिन की छुट्टी
तमिलनाडु के चेन्नई निवासी वसंत अपनी बेटी हर्षिता को लेकर कैथल पहुंचे हैं। हर्षिता अंडर-17 वर्ग में मुकाबले खेल रही हैं। पेशे से ड्राइवर वसंत ने बेटी के साथ आने के लिए 10 दिन की छुट्टी ली है। लंबी दूरी के कारण आने-जाने में ही कई दिन लग जाते हैं। इसके बावजूद उन्होंने बेटी के साथ आने का फैसला किया। वसंत का कहना है कि जब बेटी खेलों में अपना भविष्य देख रही है, तो उसका हौसला बढ़ाना माता-पिता की जिम्मेदारी है। ऐसे अवसर बार-बार नहीं मिलते। बेटी को राष्ट्रीय स्तर पर खेलते देखना उनके लिए गर्व की बात है।
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घर की जिम्मेदारियां छोड़ बेटी के साथ आईं मां
चेन्नई से ही दिव्या अपनी बेटी सानिका के साथ कैथल पहुंची हैं। सानिका ने अंडर-17 वर्ग में राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जगह बनाई है। दिव्या के लिए घर और परिवार की जिम्मेदारियां छोड़कर इतनी दूर आना आसान नहीं था लेकिन बेटी की सुरक्षा और उसके भविष्य को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया। दिव्या का कहना है कि बेटियों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए माता-पिता को भी त्याग करना पड़ता है। यदि बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देना है, तो उनके साथ खड़ा होना जरूरी है।

10 दिन घर से दूर रहना मुश्किल लेकिन बेटी का भविष्य जरूरी
अंडर-19 वर्ग की खिलाड़ी संजना भी राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने कैथल पहुंची हैं। उनकी मां श्रीदेवी हर कदम पर बेटी के साथ हैं। उनका कहना है कि घर के कामकाज प्रभावित होंगे और कई दिनों तक परिवार से दूर रहना भी आसान नहीं है लेकिन बेटी को आगे बढ़ते देखना सबसे बड़ा संतोष है।


मेहनत के साथ परिवार का साथ भी जरूरी
तमिलनाडु से आए कोच अमिश के अनुसार, राज्य में खेलों को बढ़ावा देने के प्रयासों से खिलाड़ियों और अभिभावकों का उत्साह बढ़ा है। अब माता-पिता बेटियों को दूसरे राज्यों में प्रतियोगिताओं के लिए भेजने से भी पीछे नहीं हटते। इन अभिभावकों की कहानी केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग राज्यों से आए परिवार अपनी बेटियों के साथ यहां मौजूद हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ पदक जीतना नहीं बल्कि बेटियों को ऐसा मंच देना है, जहां वे अपनी प्रतिभा साबित कर सकें और भविष्य में खेलों के माध्यम से आगे बढ़ने के रास्ते खोल सकें। लंबा सफर, छुट्टियों का त्याग और घर से दूरी उनके लिए छोटी कीमत है, यदि इससे बेटियों के सपनों को उड़ान मिलती है।

तमिलनाडु से बेटियों के साथ राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए पहुंचे अभिभावक। संवाद

तमिलनाडु से बेटियों के साथ राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए पहुंचे अभिभावक। संवाद

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