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Kaithal News: फोरलेन नहीं बनेगा, 25 करोड़ से होगा अंबाला रोड से तितरम मोड़ का नवनिर्माण
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कैथल से तितरम रोड़ में बने गड्ढे। संवाद
कैथल। जींद-हांसी रोड के साथ ही अंबाला रोड कैथल से तितरम मोड़ तक के 10 किलोमीटर लंबे टुकड़े के फोरलेन बनने की उम्मीदें थी। अब फोरलेन बनाना तो दूर इसकी चौड़ाई भी नहीं बढ़ाई जाएगी। इस रोड को मौजूदा चौड़ाई 33 फीट के साथ ही दोबारा बनाया जाएगा। इसके लिए लोक निर्माण विभाग 25 करोड़ रुपये का प्रस्ताव नाबार्ड को भेज चुका है और जुलाई तक इसकी मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है।
उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और अगले दो से तीन महीने के अंदर इसके बनने की उम्मीद है। वाहन चालकों के लिए 10 किलोमीटर लंबा ये टुकड़ा परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके फोरलने बनाने की मांग वर्षों पुरानी है। इसमें गहरे गड्ढे होने के साथ-साथ यह रोड बहुत संकरा है। कई जिलों से कनेक्टिविटी होने की वजह से इस रोड पर भारी वाहनों का आवागमन बहुत ज्यादा है। इसके कारण यह जल्दी टूटता है और हादसे भी ज्यादा होते हैं।
2019 में एनएचआई से ट्रांसफर होने के बाद डाली थी एक लेयर : पहले कैथल से तितरम मोड़ तक का टुकड़ा एनएच 65 का हिस्सा था लेकिन हिसार चंडीगढ़ नेशनल हाईवे बनने के बाद एनएचएआई ने 2019 में इसको पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर कर दिया था। उसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने 2020 में इस पर 30 एमएम की बीसी लेयर डाली थी। उसके बाद से यह रोड दोबारा नहीं बनाया जा सका है और तब से इसको पैचवर्क लगाकर ही काम चलाया जा रहा है। चालकों को कैथल अंबाला रोड से तितरम मोड़ तक के 10 किलोमीटर लंबे टुकड़े के फोरलेन बनाए जाने की उम्मीद थी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने करीब 65 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी तैयार कर भेजा था लेकिन प्रदेश सरकार ने बजट की कमी बताते हुए इसको लौटा दिया था।
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उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और अगले दो से तीन महीने के अंदर इसके बनने की उम्मीद है। वाहन चालकों के लिए 10 किलोमीटर लंबा ये टुकड़ा परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके फोरलने बनाने की मांग वर्षों पुरानी है। इसमें गहरे गड्ढे होने के साथ-साथ यह रोड बहुत संकरा है। कई जिलों से कनेक्टिविटी होने की वजह से इस रोड पर भारी वाहनों का आवागमन बहुत ज्यादा है। इसके कारण यह जल्दी टूटता है और हादसे भी ज्यादा होते हैं।
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2019 में एनएचआई से ट्रांसफर होने के बाद डाली थी एक लेयर : पहले कैथल से तितरम मोड़ तक का टुकड़ा एनएच 65 का हिस्सा था लेकिन हिसार चंडीगढ़ नेशनल हाईवे बनने के बाद एनएचएआई ने 2019 में इसको पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर कर दिया था। उसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने 2020 में इस पर 30 एमएम की बीसी लेयर डाली थी। उसके बाद से यह रोड दोबारा नहीं बनाया जा सका है और तब से इसको पैचवर्क लगाकर ही काम चलाया जा रहा है। चालकों को कैथल अंबाला रोड से तितरम मोड़ तक के 10 किलोमीटर लंबे टुकड़े के फोरलेन बनाए जाने की उम्मीद थी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने करीब 65 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी तैयार कर भेजा था लेकिन प्रदेश सरकार ने बजट की कमी बताते हुए इसको लौटा दिया था।

कैथल से तितरम रोड़ में बने गड्ढे। संवाद
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