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Hindi News ›   Haryana ›   Illegal colonies have drained the treasury Over ₹105 crore scam unearthed in Kaithal

अवैध कॉलोनियों ने खाली किया खजाना:कैथल में 105 करोड़ से अधिक की चपत, विजिलेंस ने मांगे पिछले 10 साल के रिकार्ड

Thu, 11 Dec 2025 09:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो नरेंद्र पंडित, कैथल
नरेंद्र पंडित, कैथल Updated Thu, 11 Dec 2025 09:03 AM IST
सार

विजिलेंस ने डीटीपी व नगर परिषद से पिछले 10 वर्षों का विस्तृत रिकार्ड मांगा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि पिछले दशक में कितनी अवैध कॉलोनियाँ कटीं, किन-किन को नोटिस दिए गए, किन कालोनाइजरों पर कितनी बार कार्रवाई हुई और कितनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

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Illegal colonies have drained the treasury Over ₹105 crore scam unearthed in Kaithal
विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह - फोटो : संवाद

विस्तार

विजिलेंस के पास मिले विभागीय रिकार्ड में यह सामने आया है कि जिले के कुछ कॉलोनाइजरों के अवैध कॉलोनियां काटने से सरकारी खजाने को औसतन 105 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ प्रतीत होता है। यह कार्रवाई न होने और नियमों की कथित अनदेखी का मामला माना जा रहा है। विजिलेंस अब उपलब्ध रिकार्ड के आधार पर सरकारी खजाने को नुकसान का ठोस आंकलन कर रही है। इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपी जाएगी।

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प्राथमिक जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि जिले में अब तक 85 से अधिक अवैध कॉलोनियां पनपी हुई दिखाई देती हैं, जबकि डीटीपी के आधिकारिक रिकार्ड में यह संख्या 75 दर्ज है। इनमें से कुछ कॉलोनियाँ 5 एकड़ से कम आकार की पाई गई हैं, जो सरकारी नियमों के अनुसार कॉलोनी विकसित करने के योग्यता मानदंड (कोरम) को पूरा नहीं करतीं। नियमों के अनुसार किसी भी कॉलोनी को 5 एकड़ से कम में नहीं काटा जा सकता।
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विजिलेंस के मुताबिक करीब 70 कॉलोनियां ऐसी हैं जो पांच एकड़ या उससे अधिक क्षेत्र में पनपी हैं। नियम के तहत 5 एकड़ की कॉलोनी के लाइसेंस के लिए कालोनाइजर को कम-से-कम 1.5 करोड़ रुपये (प्रति एकड़ लगभग 30 लाख रुपये) जमा कराना आवश्यक होता है। इसी आधार पर प्रारंभिक गणना से अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन अवैध कॉलोनियों से सरकार को भारी आर्थिक चपत लगी है। कुछ कॉलोनियाँ 10 एकड़ तक की भी पाई गईं हैं, जिनके लिए नियम के अनुसार 3 करोड़ रुपये तक जमा कराने होते हैं।
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उल्लेखनीय है कि रिकार्डों के विश्लेषण से यह भी संकेत मिलते हैं कि अधिकांश कालोनाइजर राजनीतिक संगठनों से जुड़े हुए नेताओं से संबंधित हैं, जो सत्ता के लाभ का दुरुपयोग कर अनियमितताएं करा रहे हैं।

किसकी मिलीभगत से हुआ विस्तार, जांच तेज
विजिलेंस ने डीटीपी व नगर परिषद से पिछले 10 वर्षों का विस्तृत रिकार्ड मांगा है। इसमें यह देखा जा रहा है कि पिछले दशक में कितनी अवैध कॉलोनियाँ कटीं, किन-किन को नोटिस दिए गए, किन कालोनाइजरों पर कितनी बार कार्रवाई हुई और कितनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि क्या नगर परिषद या डीटीपी विभाग की किसी स्तर पर मिलीभगत रही, और क्या अवैध कॉलोनी बनते समय समय पर कार्रवाई की गई या नहीं। अधिकांश रिकार्ड मिल चुके हैं; शेष दस्तावेज आने पर रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को सौंपी जाएगी।


नुकसान का आकलन जारी : विजिलेंस निरीक्षक
विजिलेंस निरीक्षक सूबे सिंह ने बताया कि डीटीपी और नगर परिषद से प्राप्त हुए रिकार्डों की गहन जांच जारी है। रिकार्डों के आधर पर ही यह निर्धारित किया जाएगा कि कालोनाइजरों ने अवैध कॉलोनियों के माध्यम से सरकारी खजाने को कितने करोड़ का नुकसान पहुंचाया है। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद मुख्यालय को सौंपी जाएगी और उसी के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई होगी।

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