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Kaithal News: शनैश्चरी अमावस्या पर फल्गु तीर्थ में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
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फल्गु तीर्थ पर पिंडदान व तर्पण करवाते श्रद्धालु। संवाद
पूंडरी। शनैश्चरी अमावस्या के अवसर पर शनिवार को फल्गु तीर्थ पर मेले का आयोजन हुआ। अल सुबह से ही दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर तक हजारों श्रद्धालुओं ने फल्गु तीर्थ के पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने पितरों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करवाया और पूजा-अर्चना की।
फल्गु तीर्थ को पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां पवित्र स्नान के बाद विधि-विधान से पिंडदान व तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और श्रद्धालुओं को पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण अमावस्या के अवसर पर हरियाणा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु फल्गु तीर्थ पहुंचते हैं। शनिवार को अमावस्या होने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का विशेष संयोग रहा। श्रद्धालुओं ने पितृ तर्पण के साथ भगवान शिव, शनिदेव और अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की। सुबह से दोपहर तक तीर्थ परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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फल्गु तीर्थ का महत्त्व
महाभारत वन पर्व में तीर्थयात्रा प्रसंग के अंतर्गत इस तीर्थ के महत्त्व के विषय में स्पष्ट उल्लेख है। महाभारत के अनुसार, इस तीर्थ में स्नान करने व देवताओं का तर्पण करने से मनुष्य को अग्निष्टोम और अतिरात्र यज्ञों के करने से भी कहीं अधिक श्रेष्ठतर फल को प्राप्त होता है। वामन पुराण के अनुसार, सोमवार की अमावस्या के दिन इस तीर्थ में किया गया श्राद्ध पितरों को वैसा ही तृप्त और संतुष्ट करता है जैसा कि गया में किया गया श्राद्ध। कहा जाता है कि मात्र मन से जो व्यक्ति फलकीवन का स्मरण करता है निसंदेह उनके पितर तृप्त हो जाते हैं।
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फल्गु तीर्थ को पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां पवित्र स्नान के बाद विधि-विधान से पिंडदान व तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और श्रद्धालुओं को पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण अमावस्या के अवसर पर हरियाणा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु फल्गु तीर्थ पहुंचते हैं। शनिवार को अमावस्या होने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का विशेष संयोग रहा। श्रद्धालुओं ने पितृ तर्पण के साथ भगवान शिव, शनिदेव और अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की। सुबह से दोपहर तक तीर्थ परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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फल्गु तीर्थ का महत्त्व
महाभारत वन पर्व में तीर्थयात्रा प्रसंग के अंतर्गत इस तीर्थ के महत्त्व के विषय में स्पष्ट उल्लेख है। महाभारत के अनुसार, इस तीर्थ में स्नान करने व देवताओं का तर्पण करने से मनुष्य को अग्निष्टोम और अतिरात्र यज्ञों के करने से भी कहीं अधिक श्रेष्ठतर फल को प्राप्त होता है। वामन पुराण के अनुसार, सोमवार की अमावस्या के दिन इस तीर्थ में किया गया श्राद्ध पितरों को वैसा ही तृप्त और संतुष्ट करता है जैसा कि गया में किया गया श्राद्ध। कहा जाता है कि मात्र मन से जो व्यक्ति फलकीवन का स्मरण करता है निसंदेह उनके पितर तृप्त हो जाते हैं।
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