{"_id":"678012b99f2e2076ca014b40","slug":"who-will-provide-night-shelter-to-the-abandoned-people-sleeping-in-the-open-jind-news-c-199-1-sroh1006-128181-2025-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: खुले में सो रहे लावारिसों को कौन पहुंचाए रैन बसेरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: खुले में सो रहे लावारिसों को कौन पहुंचाए रैन बसेरा
विज्ञापन
09जेएनडी21-गोहाना रोड पर डीआरडीए के सामने खुले में सो रहा व्यक्ति। संवाद
जींद। पौष की कड़कड़ाती ठंड में बेसहारा लोगों की खुले आसमान में रात बीत रही है। शहर में कई जगह बेसहारा लोगों को खुले आसमान में रात गुजारते हुए देखा जा सकता है। इन बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से दो रैन बसेरे बनाए गए हैं, लेकिन इन बेसहारा लोगों को रैन बसेरे तक कौन पहुंचाए।
प्रशासन के पास बेसहारा लोगों को रैन बसेरे तक पहुंचाने का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं, बेसहारा लोग रैन बसेरे में नहीं जा रहे हैं। अब ऐसे में ये बेसहारा लोग कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान में सो रहे हैं। प्रशासन की तरफ से किए गए पुख्ता प्रबंध इन बेसहारा लोगों के लिए कोई मायने नहीं है।
जिला प्रशासन ने बस अड्डे और शहर में रैन बसेरे चालू किए हुए हैं। नगर परिषद की तरफ से शहर में पुरानी कचहड़ी के पास रैन बसेरा बनाया हुआ है, जहां पर 13 व्यक्ति और 11 महिलाओं के रुकने की अलग-अलग व्यवस्था की हुई है। वहां पर कंबल, बिस्तर रखे हुए हैं। वहीं, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा गया है। सुबह नहाने के लिए गर्म पानी का प्रबंध किया हुआ है। इसके अलावा दिन और रात के लिए एक-एक कर्मचारी की भी ड्यूटी लगाई हुई है, ताकि रुकने वाले मुसाफिरों को कोई परेशानी न आए। बुधवार रात को शहर के रैन बसेरे में रूपगढ़ गांव के बुजुर्ग बलराज और संजय नामक युवक रुके हुए थे। बुजुर्ग बलराज की बस निकलने के कारण उसे घर जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। इससे वह रैन बसेरे में पहुंचा। वहीं, युवक संजय जुलाना शहर से है और देर रात होने के कारण वह घर नहीं जा सका। हालांकि बुधवार रात को दो ही लोग ठहरे, जबकि इससे पहले रोजाना पांच से सात लोग ठहरते हैं। वहीं, नए बस अड्डे पर भी प्रशासन की तरफ से रैन बसेरा चालू किया हुआ है, जहां पर सोने के लिए गद्दे, रजाई की व्यवस्था की गई है। उन्हें रात के समय एक बार चाय भी दी जाती है। बुधवार रात को नया बस अड्डे पर कोई भी नहीं रुका। हालांकि आए दिन दो-चार लोग रैन बसेरे में रात बिताते हैं।
विज्ञापन
वर्जन
रैन बसेरे में मुसाफिरों के लिए बेहतर इंतजाम किए हुए हैं। सर्दी से बचने के लिए रजाई और गद्दों की व्यवस्था है। मुसाफिरों की देखभाल के लिए एक कर्मचारी को भी तैनात किया हुआ है।
-रवि हुड्डा, सचिव, रेडक्रॉस सोसाइटी जींद
वर्जन
शहर में बने रैन बसेरे में मुसाफिरों के लिए पर्याप्त सुविधा दी गई है। वहां कोई भी व्यक्ति आकर ठहर सकता है। ठहरने के लिए व्यक्ति या बेसहारा को रैन बसेरा आना पड़ेगा। उन्हें लाने का कोई प्रावधान नहीं है।
-गुलजार मलिक, नगरायुक्त, नगर परिषद, जींद
विज्ञापन
प्रशासन के पास बेसहारा लोगों को रैन बसेरे तक पहुंचाने का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं, बेसहारा लोग रैन बसेरे में नहीं जा रहे हैं। अब ऐसे में ये बेसहारा लोग कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान में सो रहे हैं। प्रशासन की तरफ से किए गए पुख्ता प्रबंध इन बेसहारा लोगों के लिए कोई मायने नहीं है।
विज्ञापन
जिला प्रशासन ने बस अड्डे और शहर में रैन बसेरे चालू किए हुए हैं। नगर परिषद की तरफ से शहर में पुरानी कचहड़ी के पास रैन बसेरा बनाया हुआ है, जहां पर 13 व्यक्ति और 11 महिलाओं के रुकने की अलग-अलग व्यवस्था की हुई है। वहां पर कंबल, बिस्तर रखे हुए हैं। वहीं, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा गया है। सुबह नहाने के लिए गर्म पानी का प्रबंध किया हुआ है। इसके अलावा दिन और रात के लिए एक-एक कर्मचारी की भी ड्यूटी लगाई हुई है, ताकि रुकने वाले मुसाफिरों को कोई परेशानी न आए। बुधवार रात को शहर के रैन बसेरे में रूपगढ़ गांव के बुजुर्ग बलराज और संजय नामक युवक रुके हुए थे। बुजुर्ग बलराज की बस निकलने के कारण उसे घर जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। इससे वह रैन बसेरे में पहुंचा। वहीं, युवक संजय जुलाना शहर से है और देर रात होने के कारण वह घर नहीं जा सका। हालांकि बुधवार रात को दो ही लोग ठहरे, जबकि इससे पहले रोजाना पांच से सात लोग ठहरते हैं। वहीं, नए बस अड्डे पर भी प्रशासन की तरफ से रैन बसेरा चालू किया हुआ है, जहां पर सोने के लिए गद्दे, रजाई की व्यवस्था की गई है। उन्हें रात के समय एक बार चाय भी दी जाती है। बुधवार रात को नया बस अड्डे पर कोई भी नहीं रुका। हालांकि आए दिन दो-चार लोग रैन बसेरे में रात बिताते हैं।
विज्ञापन
वर्जन
रैन बसेरे में मुसाफिरों के लिए बेहतर इंतजाम किए हुए हैं। सर्दी से बचने के लिए रजाई और गद्दों की व्यवस्था है। मुसाफिरों की देखभाल के लिए एक कर्मचारी को भी तैनात किया हुआ है।
-रवि हुड्डा, सचिव, रेडक्रॉस सोसाइटी जींद
वर्जन
शहर में बने रैन बसेरे में मुसाफिरों के लिए पर्याप्त सुविधा दी गई है। वहां कोई भी व्यक्ति आकर ठहर सकता है। ठहरने के लिए व्यक्ति या बेसहारा को रैन बसेरा आना पड़ेगा। उन्हें लाने का कोई प्रावधान नहीं है।
-गुलजार मलिक, नगरायुक्त, नगर परिषद, जींद