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भिखेवाला गांव के खेतों में भरा पानी, किसानों ने की नारेबाजी
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पानी निकासी नहीं होने पर प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट करते किसान। संवाद
- फोटो : Jind
नरवाना। गांव भिखेवाला के खेतों से बरसाती पानी की निकासी नहीं होने से कपास की फसल प्रभावित हो रही है। रविवार को किसानों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि आज तक प्रशासन ने पानी निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। प्रशासन को चाहिए कि स्पेशल गिरदावरी करवाकर उन्हें मुआवजा दिया जाए। इसी बीच राष्ट्रीय मजदूर किसान मंच के प्रदेश महासचिव अंकुश परोचा ने भी खेतों में जाकर किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से 60 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की।
किसान रामपाल, सत्यवान, बादल, विजयपाल, लीलू, फकीरचंद, काशा, संदीप व पवन कुमार ने बताया कि सरकार किसानों को कहती थी कि धान की खेती को छोड़कर दूसरी फसलों की खेती करो, उसके लिए सरकार भी सहायता करेगी। अब धान को छोड़कर हमने कपास की फसल लगाई। इसमें बरसात का पानी आज तक भरा हुआ है। इसे लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार सूचित कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया। वहीं दूसरी तरफ गुलाबी सुंडी ने किसानों की खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया है। इस पर भी सरकार व प्रशासन चुप है।
घुटने तक भरे पानी में कपास चुन रहीं महिलाएं
भिखेवाला गांव के खेतों में महिलाएं घुटनों तक भरे पानी में कपास चुनने के लिए मजबूर हैं। महिलाओं ने कहा कि वह मजदूरी करती हैं, लेकिन इस बार किसान के पास ही कुछ नहीं बचा है तो हमें काम कहां से मिलेगा। जहां काम मिलता है, वहां पूरे दिन पानी में रहकर काम करना पड़ रहा है। इस दौरान कई प्रकार के जहरीले जीवों के काटने का भय बना रहता है।
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किसान रामपाल, सत्यवान, बादल, विजयपाल, लीलू, फकीरचंद, काशा, संदीप व पवन कुमार ने बताया कि सरकार किसानों को कहती थी कि धान की खेती को छोड़कर दूसरी फसलों की खेती करो, उसके लिए सरकार भी सहायता करेगी। अब धान को छोड़कर हमने कपास की फसल लगाई। इसमें बरसात का पानी आज तक भरा हुआ है। इसे लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार सूचित कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया। वहीं दूसरी तरफ गुलाबी सुंडी ने किसानों की खड़ी फसल को बर्बाद कर दिया है। इस पर भी सरकार व प्रशासन चुप है।
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घुटने तक भरे पानी में कपास चुन रहीं महिलाएं
भिखेवाला गांव के खेतों में महिलाएं घुटनों तक भरे पानी में कपास चुनने के लिए मजबूर हैं। महिलाओं ने कहा कि वह मजदूरी करती हैं, लेकिन इस बार किसान के पास ही कुछ नहीं बचा है तो हमें काम कहां से मिलेगा। जहां काम मिलता है, वहां पूरे दिन पानी में रहकर काम करना पड़ रहा है। इस दौरान कई प्रकार के जहरीले जीवों के काटने का भय बना रहता है।
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