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चाबरी, भिड़ताना, फरैण खुर्द व रोजखेड़ा के लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
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गांव चाबरी का सुनसान पड़ा स्कूल, जहां होनी थी पोलिंग। संवाद।
- फोटो : Jind
जींद। नेशनल हाईवे 352-ए पर रास्ते की मांग को लेकर पिछले दो महीने से धरने पर बैठे भिड़ताना व चाबरी गांव के लोगों ने पंचायत चुनाव बहिष्कार किया। दोनों गांवों के लोगों ने पंच व सरपंच के लिए कोई नामांकन नहीं किया। इस कारण प्रशासन ने यहां पोलिंग पार्टियां ही नहीं भेजीं।
ब्लॉक समिति व जिला परिषद चुनाव के लिए इन दोनों गांवों में पोलिंग पार्टियां भेजी थी लेकिन दिनभर खाली बैठने के बाद पोलिंग पार्टियां वापस आ गई थीं। चाबरी गांव के बूथ नंबर 42 एवं 43, इसी प्रकार भिड़ताना गांव के बूथ नंबर 50, 51 एवं 52 पर पोलिंग पार्टियां नहीं भेजी गईं।
ग्रामीणों ने कहा कि जब तक प्रशासन उनकी मांग पूरी नहीं करता तब तक वह गांव में चुनाव नहीं होने देंगे। ब्लॉक समिति और जिला परिषद चुनाव के समय प्रशासन ने इन पांचों बूथों पर पोलिंग करवाने का प्रयास किया था लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण टीम वापस लौट आई थी।
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फरैण खुर्द और रोजखेड़ा में सरपंच का पद एससी के लिए आरक्षित करने पर रोष
इसी प्रकार फरैण खुर्द व रोजखेड़ा गांव में भी चुनाव का बहिष्कार किया गया। दोनों ही गांवों में एक भी नामांकन नहीं आने के कारण प्रशासन ने पोलिंग पार्टियां नहीं भेजीं। गांव रोजखेड़ा में सरपंच का पद एससी के लिए आरक्षित किया था। जबकि गांव में एससी कैटेगरी के नौ ही वोट हैं। इनमें से कोई भी सरपंच पद के लिए पात्र नहीं पाया गया। इसी प्रकार फरैण खुर्द में भी सरपंच का पद एससी के लिए आरक्षित किया गया था, जबकि गांव में एक भी एससी वोटर नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों ने पंच के लिए भी आवेदन नहीं किया।
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ब्लॉक समिति व जिला परिषद चुनाव के लिए इन दोनों गांवों में पोलिंग पार्टियां भेजी थी लेकिन दिनभर खाली बैठने के बाद पोलिंग पार्टियां वापस आ गई थीं। चाबरी गांव के बूथ नंबर 42 एवं 43, इसी प्रकार भिड़ताना गांव के बूथ नंबर 50, 51 एवं 52 पर पोलिंग पार्टियां नहीं भेजी गईं।
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ग्रामीणों ने कहा कि जब तक प्रशासन उनकी मांग पूरी नहीं करता तब तक वह गांव में चुनाव नहीं होने देंगे। ब्लॉक समिति और जिला परिषद चुनाव के समय प्रशासन ने इन पांचों बूथों पर पोलिंग करवाने का प्रयास किया था लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण टीम वापस लौट आई थी।
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फरैण खुर्द और रोजखेड़ा में सरपंच का पद एससी के लिए आरक्षित करने पर रोष
इसी प्रकार फरैण खुर्द व रोजखेड़ा गांव में भी चुनाव का बहिष्कार किया गया। दोनों ही गांवों में एक भी नामांकन नहीं आने के कारण प्रशासन ने पोलिंग पार्टियां नहीं भेजीं। गांव रोजखेड़ा में सरपंच का पद एससी के लिए आरक्षित किया था। जबकि गांव में एससी कैटेगरी के नौ ही वोट हैं। इनमें से कोई भी सरपंच पद के लिए पात्र नहीं पाया गया। इसी प्रकार फरैण खुर्द में भी सरपंच का पद एससी के लिए आरक्षित किया गया था, जबकि गांव में एक भी एससी वोटर नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों ने पंच के लिए भी आवेदन नहीं किया।