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नई शिक्षा नीति के तहत देश खेड़ा के मिडल स्कूल को किया मर्ज
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जुलाना। नई शिक्षा नीति के तहत देशखेड़ा के मिडिल स्कूल को मालवी गांव के स्कूल में मर्ज किया गया। अब इस स्कूल के विद्यार्थियों को तीन किलोमीटर दूर मालवी गांव के स्कूल में जाना पड़ेगा या फिर निजी स्कूलों में भारी भरकम फीस चुका कर पढ़ना पड़ेगा। ऐसे में नई शिक्षा नीति छात्रों पर भारी पड़ रही है।
देशखेड़ा के मिडिल स्कूल में केवल 16 छात्र थे। जिन पर सरकार को लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। स्कूल में एक इंचार्ज, एक चपरासी व एक मिड-डे-मिल कुक 16 छात्रों पर कार्यरत थे, लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल में छात्र संख्या कम होने के कारण स्कूल को मर्ज किया गया। नई शिक्षा नीति के तहत 500 छात्रों से कम छात्र संख्या के स्कूलों में मुखिया नहीं होगा। पांच किलोमीटर क्षेत्र में पड़ने वाले स्कूल के मुखिया को डीडी पावर दी जाएगी। इसी तरह छठी से आठवीं कक्षा तक स्कूल में अगर छात्र संख्या 20 से कम होगी तो उसे तीन किलोमीटर तक पड़ने वाले स्कूल में मर्ज किया जाएगा। अगर किसी गांव में दो प्राइमरी स्कूल हैं तो एक को मर्ज किया जाएगा।
अब भी छह स्कूल ऐसे हैं जिनमें छात्र संख्या 50 से कम हैं। जैजैवंती के स्कूल में 24, गोसाई खेड़ा के स्कूल को 26 छात्र, राजगढ़ गांव में 29 छात्र, कमाच खेड़ा में 30 छात्र, अनूपगढ़ गांव में 33, शामलो खुर्द के स्कूल में 49 हैं। जिन पर सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं रेशनलाइजेशन ट्रांसफर योजना छात्रों पर भारी पड़ेगी, क्योंकि स्कूल से काफी अध्यापकों के पद समाप्त कर दिए जाएंगे। ऐसे में अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। कई स्कूलों में तो अभिभावकों ने ताला जड़कर रोष भी प्रकट किया है। वहीं दूसरी ओर स्कूलों को मर्ज करने से स्कूल के मिड डे मील वर्कर, पार्ट टाइम कर्मचारी और कच्चे कर्मचारी फिर से बेरोजगार हो जाएंगे। अब काफी लोगों पर बेरोजगारी की तलवार लटक रही है।
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वर्जन
विभाग के निर्देशानुसार कम छात्र संख्या वाले छात्रों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है। विभाग के निर्देशानुसार जुलाना खंड के देशखेड़ा के मिडिल स्कूल को मर्ज किया गया। विभाग की ओर से पत्र मिल चुका है। -शिवनारायण शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी जुलाना।
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देशखेड़ा के मिडिल स्कूल में केवल 16 छात्र थे। जिन पर सरकार को लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। स्कूल में एक इंचार्ज, एक चपरासी व एक मिड-डे-मिल कुक 16 छात्रों पर कार्यरत थे, लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल में छात्र संख्या कम होने के कारण स्कूल को मर्ज किया गया। नई शिक्षा नीति के तहत 500 छात्रों से कम छात्र संख्या के स्कूलों में मुखिया नहीं होगा। पांच किलोमीटर क्षेत्र में पड़ने वाले स्कूल के मुखिया को डीडी पावर दी जाएगी। इसी तरह छठी से आठवीं कक्षा तक स्कूल में अगर छात्र संख्या 20 से कम होगी तो उसे तीन किलोमीटर तक पड़ने वाले स्कूल में मर्ज किया जाएगा। अगर किसी गांव में दो प्राइमरी स्कूल हैं तो एक को मर्ज किया जाएगा।
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अब भी छह स्कूल ऐसे हैं जिनमें छात्र संख्या 50 से कम हैं। जैजैवंती के स्कूल में 24, गोसाई खेड़ा के स्कूल को 26 छात्र, राजगढ़ गांव में 29 छात्र, कमाच खेड़ा में 30 छात्र, अनूपगढ़ गांव में 33, शामलो खुर्द के स्कूल में 49 हैं। जिन पर सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं रेशनलाइजेशन ट्रांसफर योजना छात्रों पर भारी पड़ेगी, क्योंकि स्कूल से काफी अध्यापकों के पद समाप्त कर दिए जाएंगे। ऐसे में अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। कई स्कूलों में तो अभिभावकों ने ताला जड़कर रोष भी प्रकट किया है। वहीं दूसरी ओर स्कूलों को मर्ज करने से स्कूल के मिड डे मील वर्कर, पार्ट टाइम कर्मचारी और कच्चे कर्मचारी फिर से बेरोजगार हो जाएंगे। अब काफी लोगों पर बेरोजगारी की तलवार लटक रही है।
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विभाग के निर्देशानुसार कम छात्र संख्या वाले छात्रों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है। विभाग के निर्देशानुसार जुलाना खंड के देशखेड़ा के मिडिल स्कूल को मर्ज किया गया। विभाग की ओर से पत्र मिल चुका है। -शिवनारायण शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी जुलाना।