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Jind News: शहर में तीन रैन बसेरे, बस अड्डे पर बनेे रैन बसेरे में शुरू की गई कैंटीन

Mon, 01 Jan 2024 01:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Mon, 01 Jan 2024 01:00 AM IST
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Three night shelters in the city, canteen started in the night shelter built at the bus stand
31जेएनडी15: पालिका बाजार स्थित रेन बसेरे का फोटो। संवाद।
जींद। शहर में सर्दी के मौसम में मुसाफिरों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं रहेगी। इसके लिए प्रशासन लगातार काम कर रहा है। शहर में मुख्य तीन रैन बसेरे चल रहे हैं। इसमें दो रेडक्रॉस सोसाइटी तो एक नगर परिषद के अधीन है। शहर के रेलवे जंक्शन पर रेडक्रॉस ने रोडवेज की कंडम बस को रेन बसेरा बनाया हुआ है तो वहीं शहर के नए बस अड्डे पर बंद पड़ी कैंटीन में रेन बसेरा चला हुआ है। बस अड्डे पर बनी कैंटीन में मुसाफिरों को खाना भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इन दोनों स्थानों पर कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।
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अभी न्यूनतम तापमान सात डिग्री के आसपास बना हुआ है। अधिकतर मुसाफिर बस या फिर रेल में ही सफर करते हैं। अगर किसी को कोई परेशानी आती है तो वह इन दोनों स्थानों पर अपनी रात बीता सकता है। इसके अलावा शहर के पालिका बाजार में भी लगभग नौ साल पहले 50 लाख रुपये की लागत से रैन बसेरा बनाया गया था। जहां पर आठ कमरों की व्यवस्था है। इनमें चार महिला तो चार पुरुषों के लिए बनाए गए हैं। इनमें गीजर व बाथरूम की सुविधा भी उपलब्ध है। पिछले नौ सालों के दौरान लगभग चार हजार मुसाफिरों ने रैन बसेरे में आश्रय लिया है। रैन बसेरे में रुकने वाले प्रत्येक व्यक्ति से कर्मचारियों द्वारा दो आईडी ली जाती हैं। इसके बाद ही मुसाफिरों को रुकने की इजाजत दी जाती है।
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अपना रोटी रथ भी बना सहयोगी

अगर रेलवे जंक्शन व बस अड्डे के अलावा कहीं पर भी मुसाफिर को खाना नहीं मिले तो उनकी सूचना मिलने पर अपना रोटी रथ संस्था के लोग रात को मुसाफिरों या आमजन के लिए खाना पहुंचाने का काम करते हैं, ताकि ठंड में कोई भूखा न सोए। इसके लिए संस्था के संचालक मुकेश राठौड़ अपने साथियों को खाना पहुंचाने के लिए तत्पर रहते हैं।
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दिन में रुकने की नहीं व्यवस्था

अब कोहरे के कारण दिन में भी लगातार ठिठुरन बढ़ रही है। जिसके चलते दिन में रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा चलाए जाने वाले रैन बसेरों पर ताले लटके रहते हैं। जिसके चलते रेलवे जंक्शन पर ठंड से बचने के लिए कुछ लोगों ने पगडंडी को ही अपना बिस्तर बनाया हुआ है। जो यहां पर दिन को बिताते हैं।

शहर के दोनों छोरों पर बने हैं रैन बसेरे

सर्दियों में मुसाफिरों को ठंड से परेशानी न हो इसके लिए नए बस अड्डे तथा रेलवे जंक्शन पर रैन बसेरे बने हैं। इसके अलावा शहर के मध्य में भी पालिका बाजार में रैन बसेरे बने हैं। दिन के समय में नगर परिषद के सफाई कर्मचारी रैन बसेरे की सफाई करते हैं तो रात के समय में चौकीदार रैन बसेरे को संभालता है। बस अड्डे तथा रेलवे जंक्शन पर रात को आठ बजे से सुबह आठ बजे तक रैन बसेरे में रुकने की व्यवस्था है। वहीं पालिका बाजार में नगर परिषद ने सायं पांच से सुबह सात बजे तक निर्धारित किया हुआ है।

ठंड में ज्यादा लोग उठा रहे फायदा

सर्दी का मौसम शुरू होते ही जंक्शन पर बस में बने रैन बसेरे में प्रतिदिन दस से 15 लोग इसका फायदा उठा रहे हैं, जबकि बस अड्डे की कैंटीन में बने रैन बसेरे में रात गुजारने वालों की संख्या लगभग 20 तक बनी हुई है। यहां पर रुकने वाले मुसाफिरों के लिए रात को खाने की व्यवस्था भी की गई है।


रैन बसेरों में उपलब्ध तमाम सुविधाएं : हुड्डा

रैन बसेरे में मुसाफिरों को तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। लोग सड़कों की बजाय रैन बसेरे में रात गुजार सकते हैं। यहां पर रुकने के लिए किसी प्रकार का कोई चार्ज किसी भी मुसाफिर से नहीं लिया जाता। सुरक्षा की दृष्टि से भी रैन बसेरा काफी सुरक्षित है।

--रवि हुड्डा सचिव रेडक्रॉस सोसाइटी जींद।

31जेएनडी15: पालिका बाजार स्थित रेन बसेरे का फोटो। संवाद।

31जेएनडी15: पालिका बाजार स्थित रेन बसेरे का फोटो। संवाद।

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