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नागरिक अस्पताल में ऑक्सीजन फ्लो कम होने से वेंटिलेटर पर रखे तीन कोरोना संक्रमितों की मौत
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नागरिक अस्पताल जींद में कोरोना का उपचार करवा रहे तीन मरीजों की ऑक्सीजन फ्लो कम होने की वजह से मौत हो गई। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ऑक्सीजन फ्लो कम होने के आरोप से इनकार किया है। तीमारदारों का आरोप है कि बुधवार शाम करीब छह बजे ऑक्सीजन का दबाव कम होने के कारण मरीजों की जान गई है। वहीं डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। इसको लेकर एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें फेसबुक पर लाइव कर स्थिति दिखाई गई है।
एडवोकेट नरेंद्र अत्री ने बताया कि बुधवार शाम करीब छह बजे वह अपने एक जानकार मरीज के साथ नागरिक अस्पताल के कोविड वार्ड में था। अचानक ऑक्सीजन का फ्लो काफी कम हो गया, जिससे मरीज छटपटाने लगे। ऑक्सीजन फ्लो कम होने से तीन मरीजों की मौत हो गई। नगारिक अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इस बारे में बातचीत करने से बच रहे। ऑक्सीजन फ्लो कम होने से पानीपत के असंध रोड निवासी 48 वर्षीय, जींद के राज नगर निवासी 51 वर्षीय और रधाना गांव निवासी 31 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई है।
बंद की गई अन्य सभी वार्डों की ऑक्सीजन सप्लाई
वहीं रात में जिस समय दिक्कत हुई तो प्रशासन ने आनन-फानन में बच्चों की नर्सरी सहित अन्य वार्डों की ऑक्सीजन सप्लाई बंद कर दी। इसके अलावा जिन मरीजों को ऑक्सजीन की कम जरूरत थी, उनकी ऑक्सीजन भी बंद कर फ्लो बढ़ाया गया। इसके बावजूद तीन लोगों की जान चली गई।
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खुद खोल लेते हैं ऑक्सीजन
एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने बताया कि वेंटिलेटर पर एक मिनट में 50 लीटर ऑक्सजीन चलती है। वहीं सामान्य ऑक्सजीन वाले मरीजों को उनकी जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन दी जाती है। कुछ लोग खुद ही ऑक्सीजन अधिक खोल लेते हैं। इससे दूसरे मरीजों को ऑक्सीजन कम मिल पाती है। वहीं जिला उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने कहा कि तीनों की मौतों का डेथ ऑडिट करवाया जाएगा।
ऑक्सीजन का फ्लो कम होने से गई जान
रधाना गांव निवासी मरीज के साथ आए सुनील कुमार ने बताया कि शाम करीब छह बजे अचानक ऑक्सीजन का दबाव बहुत कम हो गया। इससे सभी मरीजों की सांसें उखड़ने लगीं। इस दौरान तीन मरीजों की मौत हो गई।
सिविल सर्जन निवास तक पहुंचे परिजन
नागरिक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार रात में जब ऑक्सीजन की दिक्कत हुई तो कुछ मरीजों के तीमारदार सिविल सर्जन के निवास पर भी पहुंच गए। हालांकि अस्पताल का स्टाफ व्यवस्था बनाने में लगा हुआ था।
अस्पताल में नहीं कोई व्यवस्था
मैं पहले भी अपने एक मरीज के साथ कोविड वार्ड में रहा हूं। बुधवार को भी मैं न्यू कृष्णा कॉलोनी निवासी राममेहर मलिक के पास गया था। करीब छह बजे अचानक ऑक्सीजन का फ्लो काफी कम हो गया। ऑक्सीजन का दबाव करीब ढाई प्वाइंट पर आ गया था, जबकि चिकित्सकों ने बताया कि यह छह प्वाइंट होना चाहिए। इसके चलते करीब एक घंटे तक मैंने हाथों से राममेहर मलिक को पंप किया है। हर पल यह लग रहा था कि पता नहीं मरीज बच पाएंगे या नहीं। आखिरकार रात करीब 11 बजे वेंटिलेटर चला। इसके बाद मरीजों की सांस में सांस आई। इस दौरान कई अधिकारियों के पास फोन मिलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अस्पताल में सफाई की व्यवस्था नहीं है। हमारे बेड के साथ ही एक मरीज की मौत हो गई। दोपहर करीब 12 बजे मौत हुई और शाम पांच बजे बेड साफ किया गया। इससे संक्रमण और अधिक बढ़ सकता है। चिकित्सकों ने बताया कि अधिक वेंटिलेटर होने के कारण दबाव कम है। ऐसे में चाहिए कि जितने बेड पर सही फ्लो रहे उतने पर ही मरीज रखे जाएं। इससे तो सभी मरीजों की जान पर संकट आ जाता है। -नरेंद्र अत्री, वकील।
तकनीकी दिक्कत हुई
ऑक्सीजन सप्लाई से जुड़े एक कर्मचारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि ऑक्सीजन टैंक में खराबी आ गई थी। इसके चलते नए भवन की सप्लाई सिलिंडर पर डाली गई। सिलिंडर से दबाव तय मानकों से कम आ रहा था। कुछ समय में ही टैंक की सप्लाई सामान्य कर दी गई थी। माना जा रहा है कि इसी दौरान तीनों मरीजों की मौत हुई है।
जम गई थी ऑक्सीजन
हालांकि अस्पताल के एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने माना कि व्यवस्था अधिकतम 15 लोगों को ऑक्सीजन देने की है। एक साथ 50 मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही थी। इससे ऑक्सीजन पाइप में ही जम जाती है। इसको ठीक करने के लिए पानी भी डाला गया है। यह परेशानी कई बार आ जाती है। इसके बावजूद ऑक्सीजन का दबाव कम नहीं था।
एक लाइन पर और भी मरीज थे। यदि ऐसा होता तो सभी को दिक्कत होती। फिर भी उन्होंने सिविल सर्जन को जांच के लिए बोला है। विशेषज्ञों की टीम बनाकर मामले की जांच करवाई जाएगी।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
नहीं हुई ऑक्सीजन की कमी
अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी व कम फ्लो के कारण कोई मौत नहीं हुई है। कुछ मरीज पहले ही काफी गंभीर स्थिति में आते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। एक मरीज के तीमारदार ने काफी निवेदन किया कि मरीज मरने वाला तो है ही एक बार इसे वेंटिलेटर पर लगा दो। इसके कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन द्वारा उसे बचाने के तमाम प्रयास किए गए। ऑक्सीजन की कमी नहीं है। बुधवार को तीन हजार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन उपलब्ध थी। वीरवार को भी 2600 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन का स्टॉक टैंक में उपलब्ध है। इससे साफ है कि ऑक्सीजन की कमी नहीं है। वार्ड में 40 अन्य कोरोना मरीज ऑक्सीजन पर तथा 10 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। तीनों मरीज वेंटिलेटर पर थे। इलाज के दौरान उनका ऑक्सीजन लेवल 30 से 40 के बीच जा चुका था। निमोनिया के कारण तीनों मरीजों के फेफड़े भी काफी कमजोर हो चुके थे। चिकित्सकों की टीम द्वारा इनकी गंभीर हालत को देखते हुए वेंटिलेटर के मोड को भी बदल कर देखा गया था। वेंटिलेटर पर रखे गए सभी मरीजों के पास डॉ. अरुण व वेंटिलेटर टेक्नीशियन मनजीत लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसी वार्ड में दाखिल अन्य मरीज जो वेंटिलेटर पर थे वह सभी ठीक हैं।
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एडवोकेट नरेंद्र अत्री ने बताया कि बुधवार शाम करीब छह बजे वह अपने एक जानकार मरीज के साथ नागरिक अस्पताल के कोविड वार्ड में था। अचानक ऑक्सीजन का फ्लो काफी कम हो गया, जिससे मरीज छटपटाने लगे। ऑक्सीजन फ्लो कम होने से तीन मरीजों की मौत हो गई। नगारिक अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इस बारे में बातचीत करने से बच रहे। ऑक्सीजन फ्लो कम होने से पानीपत के असंध रोड निवासी 48 वर्षीय, जींद के राज नगर निवासी 51 वर्षीय और रधाना गांव निवासी 31 वर्षीय व्यक्ति की मौत हुई है।
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बंद की गई अन्य सभी वार्डों की ऑक्सीजन सप्लाई
वहीं रात में जिस समय दिक्कत हुई तो प्रशासन ने आनन-फानन में बच्चों की नर्सरी सहित अन्य वार्डों की ऑक्सीजन सप्लाई बंद कर दी। इसके अलावा जिन मरीजों को ऑक्सजीन की कम जरूरत थी, उनकी ऑक्सीजन भी बंद कर फ्लो बढ़ाया गया। इसके बावजूद तीन लोगों की जान चली गई।
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खुद खोल लेते हैं ऑक्सीजन
एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने बताया कि वेंटिलेटर पर एक मिनट में 50 लीटर ऑक्सजीन चलती है। वहीं सामान्य ऑक्सजीन वाले मरीजों को उनकी जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन दी जाती है। कुछ लोग खुद ही ऑक्सीजन अधिक खोल लेते हैं। इससे दूसरे मरीजों को ऑक्सीजन कम मिल पाती है। वहीं जिला उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने कहा कि तीनों की मौतों का डेथ ऑडिट करवाया जाएगा।
ऑक्सीजन का फ्लो कम होने से गई जान
रधाना गांव निवासी मरीज के साथ आए सुनील कुमार ने बताया कि शाम करीब छह बजे अचानक ऑक्सीजन का दबाव बहुत कम हो गया। इससे सभी मरीजों की सांसें उखड़ने लगीं। इस दौरान तीन मरीजों की मौत हो गई।
सिविल सर्जन निवास तक पहुंचे परिजन
नागरिक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार रात में जब ऑक्सीजन की दिक्कत हुई तो कुछ मरीजों के तीमारदार सिविल सर्जन के निवास पर भी पहुंच गए। हालांकि अस्पताल का स्टाफ व्यवस्था बनाने में लगा हुआ था।
अस्पताल में नहीं कोई व्यवस्था
मैं पहले भी अपने एक मरीज के साथ कोविड वार्ड में रहा हूं। बुधवार को भी मैं न्यू कृष्णा कॉलोनी निवासी राममेहर मलिक के पास गया था। करीब छह बजे अचानक ऑक्सीजन का फ्लो काफी कम हो गया। ऑक्सीजन का दबाव करीब ढाई प्वाइंट पर आ गया था, जबकि चिकित्सकों ने बताया कि यह छह प्वाइंट होना चाहिए। इसके चलते करीब एक घंटे तक मैंने हाथों से राममेहर मलिक को पंप किया है। हर पल यह लग रहा था कि पता नहीं मरीज बच पाएंगे या नहीं। आखिरकार रात करीब 11 बजे वेंटिलेटर चला। इसके बाद मरीजों की सांस में सांस आई। इस दौरान कई अधिकारियों के पास फोन मिलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अस्पताल में सफाई की व्यवस्था नहीं है। हमारे बेड के साथ ही एक मरीज की मौत हो गई। दोपहर करीब 12 बजे मौत हुई और शाम पांच बजे बेड साफ किया गया। इससे संक्रमण और अधिक बढ़ सकता है। चिकित्सकों ने बताया कि अधिक वेंटिलेटर होने के कारण दबाव कम है। ऐसे में चाहिए कि जितने बेड पर सही फ्लो रहे उतने पर ही मरीज रखे जाएं। इससे तो सभी मरीजों की जान पर संकट आ जाता है। -नरेंद्र अत्री, वकील।
तकनीकी दिक्कत हुई
ऑक्सीजन सप्लाई से जुड़े एक कर्मचारी ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि ऑक्सीजन टैंक में खराबी आ गई थी। इसके चलते नए भवन की सप्लाई सिलिंडर पर डाली गई। सिलिंडर से दबाव तय मानकों से कम आ रहा था। कुछ समय में ही टैंक की सप्लाई सामान्य कर दी गई थी। माना जा रहा है कि इसी दौरान तीनों मरीजों की मौत हुई है।
जम गई थी ऑक्सीजन
हालांकि अस्पताल के एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने माना कि व्यवस्था अधिकतम 15 लोगों को ऑक्सीजन देने की है। एक साथ 50 मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही थी। इससे ऑक्सीजन पाइप में ही जम जाती है। इसको ठीक करने के लिए पानी भी डाला गया है। यह परेशानी कई बार आ जाती है। इसके बावजूद ऑक्सीजन का दबाव कम नहीं था।
एक लाइन पर और भी मरीज थे। यदि ऐसा होता तो सभी को दिक्कत होती। फिर भी उन्होंने सिविल सर्जन को जांच के लिए बोला है। विशेषज्ञों की टीम बनाकर मामले की जांच करवाई जाएगी।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
नहीं हुई ऑक्सीजन की कमी
अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी व कम फ्लो के कारण कोई मौत नहीं हुई है। कुछ मरीज पहले ही काफी गंभीर स्थिति में आते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। एक मरीज के तीमारदार ने काफी निवेदन किया कि मरीज मरने वाला तो है ही एक बार इसे वेंटिलेटर पर लगा दो। इसके कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन द्वारा उसे बचाने के तमाम प्रयास किए गए। ऑक्सीजन की कमी नहीं है। बुधवार को तीन हजार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन उपलब्ध थी। वीरवार को भी 2600 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन का स्टॉक टैंक में उपलब्ध है। इससे साफ है कि ऑक्सीजन की कमी नहीं है। वार्ड में 40 अन्य कोरोना मरीज ऑक्सीजन पर तथा 10 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। तीनों मरीज वेंटिलेटर पर थे। इलाज के दौरान उनका ऑक्सीजन लेवल 30 से 40 के बीच जा चुका था। निमोनिया के कारण तीनों मरीजों के फेफड़े भी काफी कमजोर हो चुके थे। चिकित्सकों की टीम द्वारा इनकी गंभीर हालत को देखते हुए वेंटिलेटर के मोड को भी बदल कर देखा गया था। वेंटिलेटर पर रखे गए सभी मरीजों के पास डॉ. अरुण व वेंटिलेटर टेक्नीशियन मनजीत लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसी वार्ड में दाखिल अन्य मरीज जो वेंटिलेटर पर थे वह सभी ठीक हैं।