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सेरेब्रल पाल्सी का नहीं कोई उपचार : डॉ. अदिति
Tue, 08 Oct 2024 02:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 08 Oct 2024 02:36 AM IST
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07जेएनडी12-अंतरराष्ट्रीय सेरेब्रल पाल्सी दिवस पर हुई प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करते ह
जींद। दर्पण सोसायटी के स्पेशल स्कूल दर्पण रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च सेंटर में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय सेरेब्रल पाल्सी दिवस मनाया गया। इसकी अध्यक्षता सदस्य आशुतोष कौशिक ने की।
साइकोलॉजिस्ट डॉ. अदिति ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी एक न्यूरोलाजिकल डिसऑर्डर है। इसका 3-4 वर्ष की आयु के बाद ही पता लगता है। सेरेब्रल पाल्सी जैसी बीमारी का उपचार अभी नहीं है, इसलिए आजीवन बेहतर देखभाल की जरूरत होती है। यदि समय पर बीमारी की पहचान हो जाए तो चिकित्सकीय मदद से कुछ राहत मिल सकती है। इससे ग्रस्त बच्चे चलने-फिरने में अक्षम होते हैं और इनका बौद्धिक विकास भी प्रभावित होता है। इस बीमारी से शिशु प्राय गर्भावस्था के दौरान ही ग्रसित हो जाता है। कुछ मामलों में जन्म के बाद बच्चे इससे ग्रसित होते हैं। इसके कारकों में जीन में परिवर्तन, जन्म के समय पर्याप्त मात्रा में मस्तिष्क को ऑक्सीजन न मिलना, मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला बुखार, मस्तिष्क का असामान्य विकास, सिर में चोट लगना और रक्तस्राव आदि शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि आयु बढ़ने के साथ ही इस बीमारी के लक्षण गंभीर होते जाते हैं। दिव्यांग बच्चों ने पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के माध्यम से बीमारी के प्रभाव और उपचार के बारे में बताया। संस्थान के को-ऑर्डिनेटर अमित ने कहा कि सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास नहीं हो पाता है। वे पूरी तरह दूसरों पर निर्भर होते हैं। पोस्टर मेकिंग में गुलाब प्रथम, वैशाली द्वितीय और गुुड़िया तृतीय स्थान पर रही। कार्यक्रम में डॉ. राजेश्वर, जयपाल, प्रदीप, लेक्चरर दीप्ति, अंशुल, मीनू शर्मा, रितु, फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. हरजीत, डॉ. मनीष कुमार, विशेष शिक्षक भारती, राजरानी, मुख्तयार सिंह, पूजा, प्रमोद, सुनैना, काजल और अनिता मौजूद रहीं।
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साइकोलॉजिस्ट डॉ. अदिति ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी एक न्यूरोलाजिकल डिसऑर्डर है। इसका 3-4 वर्ष की आयु के बाद ही पता लगता है। सेरेब्रल पाल्सी जैसी बीमारी का उपचार अभी नहीं है, इसलिए आजीवन बेहतर देखभाल की जरूरत होती है। यदि समय पर बीमारी की पहचान हो जाए तो चिकित्सकीय मदद से कुछ राहत मिल सकती है। इससे ग्रस्त बच्चे चलने-फिरने में अक्षम होते हैं और इनका बौद्धिक विकास भी प्रभावित होता है। इस बीमारी से शिशु प्राय गर्भावस्था के दौरान ही ग्रसित हो जाता है। कुछ मामलों में जन्म के बाद बच्चे इससे ग्रसित होते हैं। इसके कारकों में जीन में परिवर्तन, जन्म के समय पर्याप्त मात्रा में मस्तिष्क को ऑक्सीजन न मिलना, मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला बुखार, मस्तिष्क का असामान्य विकास, सिर में चोट लगना और रक्तस्राव आदि शामिल हैं।
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उन्होंने कहा कि आयु बढ़ने के साथ ही इस बीमारी के लक्षण गंभीर होते जाते हैं। दिव्यांग बच्चों ने पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता के माध्यम से बीमारी के प्रभाव और उपचार के बारे में बताया। संस्थान के को-ऑर्डिनेटर अमित ने कहा कि सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास नहीं हो पाता है। वे पूरी तरह दूसरों पर निर्भर होते हैं। पोस्टर मेकिंग में गुलाब प्रथम, वैशाली द्वितीय और गुुड़िया तृतीय स्थान पर रही। कार्यक्रम में डॉ. राजेश्वर, जयपाल, प्रदीप, लेक्चरर दीप्ति, अंशुल, मीनू शर्मा, रितु, फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. हरजीत, डॉ. मनीष कुमार, विशेष शिक्षक भारती, राजरानी, मुख्तयार सिंह, पूजा, प्रमोद, सुनैना, काजल और अनिता मौजूद रहीं।

07जेएनडी12-अंतरराष्ट्रीय सेरेब्रल पाल्सी दिवस पर हुई प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करते ह
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