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राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती खेल हटाने से नष्ट हो जाएगी खिलाडिय़ों की नर्सरियां

Fri, 07 Oct 2022 12:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2022 12:42 AM IST
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.then the dream of wrestling wrestlers will be broken
जींद। ऑस्ट्रेलिया के शहर विक्टोरिया में वर्ष 2026 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती को शामिल नहीं किया गया है। राष्ट्रमंडल खेल संघ के इस फैसले से हरियाणा के कुश्ती खिलाड़ी और कोच सभी हैरान है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रिया और अंशु मलिक का कहना है कि ये फैसला कुश्ती खिलाड़ियों के सपने तोड़ने जैसा है।
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आंकड़ों की बात करें तो भारत अब तक राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 503 पदक जीत चुका है। इनमें 102 पद कुश्ती में जीते हैं। हरियाणा के गांव से लेकर शहर तक कुश्ती का दबदबा है। जींद के
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गांव निडानी के चौ. भरत सिंह मेमोरियल स्पोर्टस स्कूल में 35 साल से कुश्ती के खिलाड़ी तैयार किए जाते हैं। यहां लड़के और लड़कियां गुर सीखकर अंतराष्ट्रीय स्तर पर देश को तमगे दिलाते हैं।
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इसके अध्यक्ष दिलीप सिंह का कहना है कि यह स्कूल वर्ष 1987 में शुरू हुआ था। शुरुआत में तो केवल लड़के ही कुश्ती की तैयार करने आते थे, लेकिन बाद में लड़कियां भी कुश्ती के गुर सीखने लगी। अब 75 के लगभग लड़कियां और 80 के लगभग लड़के यहां कुश्ती सीख रहे हैं।
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राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करने का असर सबसे ज्यादा उन जूनियर खिलाड़ियों पर पड़ेगा जो राष्ट्रमंडल खेल में देश के लिए तमगा जीतने का सपना संजोए हैं। दिन रात मेहनत कर रहे हैं। उनके सपने इस फैसले से चकनाचूर हो गए हैं। हरियाणा में तो कुश्ती पहलवानों की फौज तैयार हो रही है। इन सबके साथ अन्याय हो रहा है। सरकार को भी इस पर एतराज जताना चाहिए।

अंशु मलिक, अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी
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कुश्ती को दोबारा शामिल करना चाहिए
राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करना बिलकुल गलत है। इससे देश के लाखों कुश्ती खिलाड़ी और प्रेमियाें के अरमान टूट गए हैं। खेलों में शामिल होने के लिए खिलाड़ी कड़ी मेहनत करता है। 2024 के ओलंपिक को लेकर अभी से तैयारी शुरू कर दी है। उन्हें संघ से उम्मीद है कि राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती खेल को दोबारा शामिल कर लिया जाएगा। इस निर्णय पर दोबारा विचार होना चाहिए।
प्रिया मलिक, अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी
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