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डेटा भेजने की कम समय सीमा से काफी विद्यार्थी हो जाएंगे वंचित : कृष्ण जमालपुर
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18जेएनडी04-बसपा प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण जमालपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। हरियाणा सरकार के अनुसूचित जाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों के लिए घोषित एकमुश्त छात्रवृत्ति योजना को लेकर बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण जमालपुर ने सरकार की ओर से डेटा भेजने के लिए निर्धारित कम समय सीमा पर एतराज जताया है।
प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण जमालपुर ने वीरवार को जींद में प्रेस को जारी बयान में कहा कि आवेदन और डाटा सत्यापन की अंतिम तिथि कम से कम एक माह के लिए बढ़ाई जाए।
शिक्षा निदेशालय हरियाणा ने जारी पत्र के अनुसार मार्च 2025 की परीक्षा में 12वींं कक्षा में 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को एक लाख 11 हजार रुपये की एकमुश्त छात्रवृत्ति दी जानी है। निर्देश दिया है कि वे विद्यार्थियों का डेटा 18 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से ईमेल के माध्यम से भेज दें।
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प्रदेशाध्यक्ष ने कम समय दिए जाने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने बताया कि 12 को पत्र जारी होता है और 18 दिसंबर तक डेटा मांगा जा रहा है। इतने कम समय में बैंक पासबुक का सत्यापन और जिलों से डेटा संकलित कर निदेशालय भेजना लगभग असंभव है। जल्दबाजी के कारण प्रदेश के सैकड़ों ग्रामीण और जरूरतमंद छात्र इस लाभ से वंचित रह जाएंगे।
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जींद। हरियाणा सरकार के अनुसूचित जाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों के लिए घोषित एकमुश्त छात्रवृत्ति योजना को लेकर बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण जमालपुर ने सरकार की ओर से डेटा भेजने के लिए निर्धारित कम समय सीमा पर एतराज जताया है।
प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण जमालपुर ने वीरवार को जींद में प्रेस को जारी बयान में कहा कि आवेदन और डाटा सत्यापन की अंतिम तिथि कम से कम एक माह के लिए बढ़ाई जाए।
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शिक्षा निदेशालय हरियाणा ने जारी पत्र के अनुसार मार्च 2025 की परीक्षा में 12वींं कक्षा में 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को एक लाख 11 हजार रुपये की एकमुश्त छात्रवृत्ति दी जानी है। निर्देश दिया है कि वे विद्यार्थियों का डेटा 18 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से ईमेल के माध्यम से भेज दें।
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प्रदेशाध्यक्ष ने कम समय दिए जाने पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने बताया कि 12 को पत्र जारी होता है और 18 दिसंबर तक डेटा मांगा जा रहा है। इतने कम समय में बैंक पासबुक का सत्यापन और जिलों से डेटा संकलित कर निदेशालय भेजना लगभग असंभव है। जल्दबाजी के कारण प्रदेश के सैकड़ों ग्रामीण और जरूरतमंद छात्र इस लाभ से वंचित रह जाएंगे।