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Jind News: कंडेला गांव के सरकारी स्कूल में खंडहर बने कमरे
Wed, 07 Jan 2026 12:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 07 Jan 2026 12:15 AM IST
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06जेएनडी37: कंडेला गांव स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक का खंडहर हुआ भवन। संवाद
कंडेला। कंडेला गांव स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में खंडहर हो चुके कमरों ने बच्चों और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। विद्यालय परिसर में लगभग पांच कमरे ऐसे हैं। जिन्हें दो वर्ष पहले ही जर्जर हालत के चलते खंडहर घोषित किया जा चुका है।इसके बावजूद आज तक न तो उनकी मरम्मत करवाई गई और न ही उन्हें गिराकर नया निर्माण किया गया। यह कमरे रोजाना स्कूल आने वाले सैकड़ों बच्चों के लिए खतरा बने हुए हैं।
इन कमरों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कमरे जमीन के स्तर से करीब तीन फीट नीचे धंस चुके हैं। इससे उनकी दीवारें और छत कमजोर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि दो साल पहले संबंधित विभाग को लिखित रूप में सूचित कर इन कमरों को खंडहर घोषित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बारिश के दौरान कमरों में पानी भरने और दीवारों के गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे में स्टाफ को हर समय सतर्क रहना पड़ता है और बच्चों पर विशेष नजर रखनी पड़ती है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा है लेकिन संसाधनों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
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अभिभावक रमेश, धर्मसिंह, सुलतान, विकास ने कहा कि इस स्थिति को लेकर रोष है। यदि समय रहते इन जर्जर कमरों को लेकर कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द इन खंडहर कमरों को गिराकर नए कमरे बनवाए जाएं, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक माहौल सुरक्षित और भयमुक्त बन सके।
वर्जन
अब तक दो बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखे जा चुके हैं। इसके अलावा गांव के सरपंच के सामने भी समस्या रखी गई है ताकि सामूहिक प्रयास से समाधान निकाला जा सके। इसके बावजूद अभी तक न तो मरम्मत का काम शुरू हुआ है और न ही नए कमरों के निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया है।
-- हंसवीर रेढू प्रधानाचार्य
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इन कमरों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कमरे जमीन के स्तर से करीब तीन फीट नीचे धंस चुके हैं। इससे उनकी दीवारें और छत कमजोर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि दो साल पहले संबंधित विभाग को लिखित रूप में सूचित कर इन कमरों को खंडहर घोषित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
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बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बारिश के दौरान कमरों में पानी भरने और दीवारों के गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे में स्टाफ को हर समय सतर्क रहना पड़ता है और बच्चों पर विशेष नजर रखनी पड़ती है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा है लेकिन संसाधनों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
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अभिभावक रमेश, धर्मसिंह, सुलतान, विकास ने कहा कि इस स्थिति को लेकर रोष है। यदि समय रहते इन जर्जर कमरों को लेकर कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द इन खंडहर कमरों को गिराकर नए कमरे बनवाए जाएं, ताकि विद्यालय का शैक्षणिक माहौल सुरक्षित और भयमुक्त बन सके।
वर्जन
अब तक दो बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखे जा चुके हैं। इसके अलावा गांव के सरपंच के सामने भी समस्या रखी गई है ताकि सामूहिक प्रयास से समाधान निकाला जा सके। इसके बावजूद अभी तक न तो मरम्मत का काम शुरू हुआ है और न ही नए कमरों के निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया है।