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Jind News: चार कमरों की छत जर्जर, कंक्रीट गिरने से करीब 6 माह से स्कूल बंद
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फोटो 3 नरवाना। छत से गिर रहे कंक्रीट के टुकड़े। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नरवाना। राजकीय प्राथमिक पाठशाला कर्मगढ़ में चार कमरे पिछले काफी समय से जर्जर हालत में हैं। कमरों की छत से कंक्रीट टूटकर नीचे गिर रही है। इसके चलते स्कूल प्रशासन ने करीब छह माह से इन कमरों को बंद कर रखा है।
हालांकि अभी तक इन कमरों को जर्जर घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कमरों को जल्द जर्जर घोषित कर तुड़वाकर नए कमरे बनाने की जरूरत है।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या के मुकाबले सुविधाओं का भी अभाव है। बच्चों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था नहीं है और वे टाट-पट्टी बिछाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल में ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर भी नहीं है।
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पानी के लिए केवल टंकी की व्यवस्था है। स्कूल में कुल 57 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए तीन अध्यापक हैं। स्कूल में लाइब्रेरी की सुविधा भी शामिल है लेकिन पुस्तकों के लिए अलग कमरा उपलब्ध नहीं है। यदि जर्जर कमरों की प्रक्रिया जल्द पूरी कर नए कमरों का निर्माण कराया जाए, तो बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सकता है।
वर्जन
चारों जर्जर कमरों को करीब छह माह से बंद रखा गया है। कमरों की निरीक्षण हो चुकी है और उन्हें जर्जर घोषित करवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बच्चों के लिए बेंच की मांग को लेकर तीन-चार बार डाक भेजी जा चुकी है। – राममेहर, स्कूल इंचार्ज
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नरवाना। राजकीय प्राथमिक पाठशाला कर्मगढ़ में चार कमरे पिछले काफी समय से जर्जर हालत में हैं। कमरों की छत से कंक्रीट टूटकर नीचे गिर रही है। इसके चलते स्कूल प्रशासन ने करीब छह माह से इन कमरों को बंद कर रखा है।
हालांकि अभी तक इन कमरों को जर्जर घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कमरों को जल्द जर्जर घोषित कर तुड़वाकर नए कमरे बनाने की जरूरत है।
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स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या के मुकाबले सुविधाओं का भी अभाव है। बच्चों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था नहीं है और वे टाट-पट्टी बिछाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल में ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर भी नहीं है।
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पानी के लिए केवल टंकी की व्यवस्था है। स्कूल में कुल 57 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए तीन अध्यापक हैं। स्कूल में लाइब्रेरी की सुविधा भी शामिल है लेकिन पुस्तकों के लिए अलग कमरा उपलब्ध नहीं है। यदि जर्जर कमरों की प्रक्रिया जल्द पूरी कर नए कमरों का निर्माण कराया जाए, तो बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सकता है।
वर्जन
चारों जर्जर कमरों को करीब छह माह से बंद रखा गया है। कमरों की निरीक्षण हो चुकी है और उन्हें जर्जर घोषित करवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बच्चों के लिए बेंच की मांग को लेकर तीन-चार बार डाक भेजी जा चुकी है। – राममेहर, स्कूल इंचार्ज

फोटो 3 नरवाना। छत से गिर रहे कंक्रीट के टुकड़े। संवाद