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Jind News: 40 साल पहले मिले प्लॉट की आज तक नहीं हुई रजिस्ट्री
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फोटो 03जेएनडी07-रिहायशी प्लाटों का मालिकाना हक दिलाने की मांग को लेकर डीसी से मिलने पहुंचे अहिर
- फोटो : credit
जींद। अहिरका के भूमिहीन मजदूर परिवारों ने करीब 40 साल पहले आवंटित रिहायशी प्लॉटों का मालिकाना हक दिलाने की मांग को लेकर डीसी डॉ. वैशाली शर्मा से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा। उन्होंने इंदिरा आवास योजना और 20 सूत्री कार्यक्रम के तहत आवंटित प्लॉटों की निशुल्क रजिस्ट्री और इंतकाल करवाने की मांग की।
ग्रामीण सतबीर सिंह, महाबीर, देशराज, कपूर सिंह, भरत सिंह, अश्वनी, राजबीर, दीपक, रोहित, प्रवीण ने बताया कि नौ अगस्त 1981 को ग्राम पंचायत अहिरका ने इंदिरा आवास योजना और 20 सूत्री कार्यक्रम के तहत भूमिहीन ग्रामीण कामगारों को रिहायशी प्लॉट आवंटित किए थे। इसके बाद दो अगस्त 1984 को पंचायत ने इन प्लॉटों के संबंध में प्रस्ताव पारित कर आगामी कार्रवाई के लिए पंचायत विभाग को भेजा था।
ग्रामीणों के अनुसार, वे पिछले चार दशकों से इन प्लॉटों पर मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें मालिकाना हक से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला है। इस मामले को लेकर वर्ष 2007 में भी डीसी कार्यालय में मांग रखी गई थी। उस समय जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को पत्र जारी कर ग्राम पंचायत से प्रस्ताव मांगा था, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद 21 अगस्त 2025 को समाधान शिविर में भी मामला उठाया गया।
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विभागीय निर्देशों पर पंचायत सचिव के कहने पर उन्होंने प्लॉटों की निशानदेही करवाई और जरूरी दस्तावेज भी जमा करवा दिए, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। ग्रामीणों ने कहा कि वे अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग से संबंध रखते हैं तथा दिहाड़ी-मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने खर्च पर रजिस्ट्री नहीं करवा सकते।
चार दशक से अधिक समय से मकान बनाकर रहने के बावजूद मालिकाना हक का दस्तावेज नहीं होने से उन्हें असुरक्षा बनी रहती है। उन्होंने डीसी से मांग की कि संबंधित विभागों को निर्देश देकर पात्र परिवारों के प्लॉटों की निशुल्क रजिस्ट्री और इंतकाल करवाया जाए, ताकि उन्हें कानूनी मालिकाना हक मिल सके। इस अवसर पर मुख्तयार, राधाकिशन, सुरेंद्र, सुखबीर, अजीत और अंकित मौजूद रहे।
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ग्रामीण सतबीर सिंह, महाबीर, देशराज, कपूर सिंह, भरत सिंह, अश्वनी, राजबीर, दीपक, रोहित, प्रवीण ने बताया कि नौ अगस्त 1981 को ग्राम पंचायत अहिरका ने इंदिरा आवास योजना और 20 सूत्री कार्यक्रम के तहत भूमिहीन ग्रामीण कामगारों को रिहायशी प्लॉट आवंटित किए थे। इसके बाद दो अगस्त 1984 को पंचायत ने इन प्लॉटों के संबंध में प्रस्ताव पारित कर आगामी कार्रवाई के लिए पंचायत विभाग को भेजा था।
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ग्रामीणों के अनुसार, वे पिछले चार दशकों से इन प्लॉटों पर मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें मालिकाना हक से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला है। इस मामले को लेकर वर्ष 2007 में भी डीसी कार्यालय में मांग रखी गई थी। उस समय जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को पत्र जारी कर ग्राम पंचायत से प्रस्ताव मांगा था, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद 21 अगस्त 2025 को समाधान शिविर में भी मामला उठाया गया।
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विभागीय निर्देशों पर पंचायत सचिव के कहने पर उन्होंने प्लॉटों की निशानदेही करवाई और जरूरी दस्तावेज भी जमा करवा दिए, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। ग्रामीणों ने कहा कि वे अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग से संबंध रखते हैं तथा दिहाड़ी-मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने खर्च पर रजिस्ट्री नहीं करवा सकते।
चार दशक से अधिक समय से मकान बनाकर रहने के बावजूद मालिकाना हक का दस्तावेज नहीं होने से उन्हें असुरक्षा बनी रहती है। उन्होंने डीसी से मांग की कि संबंधित विभागों को निर्देश देकर पात्र परिवारों के प्लॉटों की निशुल्क रजिस्ट्री और इंतकाल करवाया जाए, ताकि उन्हें कानूनी मालिकाना हक मिल सके। इस अवसर पर मुख्तयार, राधाकिशन, सुरेंद्र, सुखबीर, अजीत और अंकित मौजूद रहे।