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Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   The phone of the father, who was getting the paddy harvested in the field, rang; his daughter said, "Papa, I have won gold."

Jind News: खेत में धान कटवा रहे पिता के फोन की बजी घंटी, बेटी बोली-पापा, मैंने सोना जीत लिया

Sat, 03 Oct 2026 02:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2026 02:42 AM IST
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The phone of the father, who was getting the paddy harvested in the field, rang; his daughter said, "Papa, I have won gold."
02जेएनडी04: कीर्ति शर्मा के पिता विजय, दादा रामजुआरी व दादी को मिठाई ​खिलाकर खुशी मनाते ग्रामीण
जींद। खेत में धान की फसल की कटाई करा रहे पिता विजय शर्मा के फोन की घंटी बजी। फोन रिसीव करते ही बेटी कीर्ति शर्मा ने कहा, पापा, मैंने सोना जीत लिया। इतना सुनते ही विजय की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
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जिस बेटी के लिए कुछ साल पहले पिता ने आढ़ती से से 60 हजार रुपये का कर्ज लेकर धनुष खरीदा था, उसी ने एशियन गेम्स में भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिला दिया। जापान में देश के लिए धनुष-बाण चलाती बेटी और गांव में खेत में मेहनत करते पिता के बीच यह फोन कॉल वर्षों के संघर्ष और सपने के पूरा होने का भावुक पल बन गया।
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शुक्रवार को अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम अनिल मोहोड़ की भारतीय तिकड़ी ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भारत को पहली बार स्वर्ण पदक दिलाया। दक्षिण कोरिया इस स्पर्धा में 1998 से लगातार सात बार एशियन गेम्स चैंपियन रहा था। ऐसे में भारतीय टीम की इस जीत के साथ रिटौली गांव की कीर्ति का नाम भी एशियाई खेलों के इतिहास में दर्ज हो गया। कीर्ति का अगला बड़ा लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।
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बेटी के लिए 60 हजार का कर्ज लेकर खरीदा था धनुष
कीर्ति के पिता विजय शर्मा किसान हैं जबकि मां गुड्डी देवी गृहिणी हैं। छोटा भाई गौरव शर्मा बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। उनके पास करीब तीन एकड़ जमीन है। परिवार की आमदनी सीमित है लेकिन बेटी के खेल के सपने में उन्होंने कभी कमी नहीं आने दी। शुरुआत में पिल्लूखेड़ा स्कूल में अभ्यास के लिए पांच हजार रुपये का धनुष दिलाया। बाद में जब रिकर्व धनुष की जरूरत पड़ी तो उन्होंने आढ़ती से दो रुपये सैकड़ा ब्याज पर 60 हजार रुपये उधार लेकर धनुष खरीदा। विजय ने बताया कि यह कर्ज बेटी पर बोझ नहीं बल्कि उसके भविष्य के लिए किया गया इंतजाम था। उन्हें भरोसा था कि बेटी मेहनत करेगी और एक दिन अपना मुकाम हासिल करेगी। वही धनुष आगे चलकर कीर्ति के अभ्यास का साथी बना और अब उसी से निकले तीरों ने देश को एशियन गेम्स का स्वर्ण दिलाया।
खेत में पिता करवा रहे थे धान की कटाई, जापान में बेटी जीत रही थी एशियन गेम्स का गोल्ड
विजय शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को जब जापान में एशियन गेम्स का फाइनल चल रहा था, उस समय वह गांव में अपने खेत में धान की कटाई करवा रहे थे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि जिस बेटी के लिए उन्होंने कुछ साल पहले कर्ज लेकर धनुष खरीदा था, वह उससे ही देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने जा रही है। मुकाबला खत्म होने के बाद कीर्ति ने उन्हें वॉट्सऐप कॉल किया और अपनी जीत की जानकारी दी। बेटी की आवाज सुनते ही वर्षों की मेहनत जैसे एक पल में सार्थक हो गई। बेटी से स्वर्ण जीतने की खबर सुनते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। महिलाओं ने गीत गाए और नृत्य किया। ग्रामीणों ने भी परिवार को बधाई दी। विजय शर्मा ने कहा कि बेटी ने जो कहा था, आज उसे सच साबित कर दिखाया। उन्हें बेटी पर गर्व है।

साधारण घर की दीवारों पर सजे हैं कीर्ति के पदक
कीर्ति का परिवार आज भी साधारण ग्रामीण जीवन जी रहा है। घर में एक एलईडी है लेकिन वह खराब पड़ी है और केबल का कनेक्शन भी नहीं है। जिस कमरे में कीर्ति के पदक रखे गए हैं, उसकी दीवारों का रंग कई जगह से उतर चुका है। इन्हीं दीवारों पर सजे पदक परिवार को कीर्ति की मेहनत और उसके सफर की याद दिलाते हैं। अब इन पदकों के बीच एशियन गेम्स का स्वर्ण सबसे बड़ी उपलब्धि बनकर जुड़ गया है।
गांव से सात किलोमीटर दूर था कीर्ति का स्कूल
कीर्ति की मां गुड्डी ने बताया कि बेटी निजी स्कूल पिलुखेड़ा में पढ़ाई के साथ-साथ अभ्यास करती थी। अभ्यास के लिए उसे सुबह जल्दी घर से निकलना पड़ता था। स्कूल गांव से सात किलोमीटर दूर था। इसलिए वह रात में दो बजे उठकर घर का खाना बनाने, पशुओं के लिए चारा डालने और दूध निकालने सहित अन्य काम करती थीं। इसके बाद बेटी को तैयार करती थीं।

एथलीट से तीरंदाज बनने का सफर
कीर्ति के पिता विजय शर्मा ने बताया कि बेटी ने शुरुआत में एथलीट के रूप में अभ्यास किया था। बाद में कोच ने उसे तीरंदाजी में जाने के लिए प्रेरित किया। स्कूल में सीनियर विद्यार्थियों को तीरंदाजी का अभ्यास करते देखकर कीर्ति भी इस खेल की ओर आकर्षित हुई। कोच ने उसे तीरंदाजी में आगे बढ़ने का मौका दिया तो कीर्ति ने इसे अपना लिया। वर्ष 2019-20 के आसपास शुरू हुआ यह सफर कुछ ही वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच गया।
2022 में साई सेंटर से जुड़ीं, बनाई पहचान...एक माह पहले मिली थी बीएसएफ में नौकरी
स्कूल में शुरुआती प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2022 में कीर्ति भारतीय खेल प्राधिकरण से जुड़ीं। वर्तमान में वह झारखंड के हजारीबाग स्थित साई सेंटर में कोच उद्यम सिंह की देखरेख में अभ्यास करती हैं। राष्ट्रीय रैंकिंग प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन के बाद कीर्ति ने भारतीय रिकर्व टीम में जगह बनाई। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव बढ़ने के साथ उनका प्रदर्शन भी निखरता गया। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें एशियन गेम्स की भारतीय टीम में स्थान मिला। कीर्ति को करीब एक माह पहले बीएसएफ में सिपाही की नौकरी के लिए जॉइनिंग लेटर भी मिला था। नौकरी जॉइन तो की लेकिन ड्यूटी जॉइन नहीं की। उसका पूरा ध्यान फिलहाल तीरंदाजी और देश के लिए बड़े मंच पर पदक जीतने पर था।


दादा से किया था वादा, परिवार का नाम रोशन करूंगी
कीर्ति के दादा रामजुआरी बताते हैं कि वह बचपन से ही बड़े सपने देखती थी। वह अक्सर कहती थी कि एक दिन परिवार का नाम रोशन करूंगी और बड़ी अफसर बनूंगी। परिवार ने उसके इस विश्वास को हमेशा प्रोत्साहित किया। पोती ने अब वादा करके दिखाया है। कीर्ति के परदादा कलीराम वर्ष 1984 तक लगातार 11 साल रिटौली गांव के सरपंच रहे। अब उसी परिवार की बेटी ने खेल के मैदान में गांव और परिवार का नाम देश-दुनिया तक पहुंचाया है।

02जेएनडी04: कीर्ति शर्मा के पिता विजय, दादा रामजुआरी व दादी को मिठाई खिलाकर खुशी मनाते ग्रामीण

02जेएनडी04: कीर्ति शर्मा के पिता विजय, दादा रामजुआरी व दादी को मिठाई खिलाकर खुशी मनाते ग्रामीण

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