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Jind News: नई शिक्षा नीति के केंद्र में होगी पंचकोश प्रणाली
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17जेएनडी17: कार्यक्रम में मौजूद स्वामी रामदेव और अन्य। स्रोत स्वयं
जींद। हरिद्वार में योगऋषि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के सान्निध्य में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन में देश की शिक्षा प्रणाली पर गहन मंथन हुआ।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से आयोजित कार्यशाला में देशभर के कुलपतियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पंचकोशीय शिक्षा प्रणाली को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया गया।
कार्यशाला में विचार उभरा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल रोजगार नहीं बल्कि विद्यार्थी का समग्र विकास होना चाहिए। हरियाणा की ओर से शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की प्रतिनिधि अर्चना शर्मा ने चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर प्रभावशाली प्रेजेंटेशन दिया, जिसे काफी सराहा गया।
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उन्होंने बताया कि पंचकोशीय सिद्धांतों को शिक्षक-प्रशिक्षण और पाठ्यपुस्तकों का अनिवार्य हिस्सा बनाया जा रहा है। कार्यशाला में हरियाणा का प्रतिनिधित्व प्रो. हितेंद्र त्यागी और मनोज शर्मा ने भी किया।
इस दौरान मूल्यांकन प्रणाली को केवल अंकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के आचरण, व्यवहार और सेवा भावना के आधार पर तय करने का निर्णय लिया गया। स्वामी रामदेव ने कहा कि पंचकोशीय प्रणाली भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन से व्यक्ति को पूर्ण बनाती है।
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शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से आयोजित कार्यशाला में देशभर के कुलपतियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पंचकोशीय शिक्षा प्रणाली को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया गया।
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कार्यशाला में विचार उभरा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल रोजगार नहीं बल्कि विद्यार्थी का समग्र विकास होना चाहिए। हरियाणा की ओर से शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की प्रतिनिधि अर्चना शर्मा ने चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर प्रभावशाली प्रेजेंटेशन दिया, जिसे काफी सराहा गया।
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उन्होंने बताया कि पंचकोशीय सिद्धांतों को शिक्षक-प्रशिक्षण और पाठ्यपुस्तकों का अनिवार्य हिस्सा बनाया जा रहा है। कार्यशाला में हरियाणा का प्रतिनिधित्व प्रो. हितेंद्र त्यागी और मनोज शर्मा ने भी किया।
इस दौरान मूल्यांकन प्रणाली को केवल अंकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के आचरण, व्यवहार और सेवा भावना के आधार पर तय करने का निर्णय लिया गया। स्वामी रामदेव ने कहा कि पंचकोशीय प्रणाली भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन से व्यक्ति को पूर्ण बनाती है।