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Jind News: दशहरा पर्व पर चार पीढ़ियों से पुतला बना रहा कलंदरी परिवार

Sun, 21 Sep 2025 12:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 12:00 AM IST
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The Kalandari family has been making effigies for four generations on Dussehra.
12 बाबरा मोहल्ला में रावण व अन्य पुतले बनाने का काम करते राजकुमार कलंदरी व परिवार के सदस्य। संव - फोटो : संवाद
रोहित राठौर
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रोहतक। दशहरे पर्व को लेकर तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही हैं। रामलीलाएं सोमवार से शुरू होंगी। दशहरे पर रावण पुतला दहन के लिए भी कारीगर पुतले बनाने में जुटे हुए हैं।
शहर में कलंदरी परिवार चार पीढ़ियों से दशहरा पर्व पर रावण व अन्य पुतले बनाने का काम कर रहा है। कलंदरी परिवार के बनाए गए पुतले न केवल शहर में दहन किए जाते हैं बल्कि दूसरे जिलों में भी पुतलों का दहन होता है।
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बाबरा मोहल्ला निवासी 69 वर्षीय राजकुमार कलंदरी 40 साल से पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ राजकुमार पुतले बनाने की परंपरा अपने बेटों को भी सौंप रहे हैं। अब बेटे किशन कांत और संजय कुमार सहित परिवार के 20 सदस्य काम संभाल रहे हैं।
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राजकुमार ने बताया कि पहले हमारे दादा शीशाराम, बाद में पिता रामप्रसाद दशहरा पर्व पर पुतले बनाने का काम करते थे। अब हम उनकी परंपरा को निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार रावण, कुंभकरण व मेघनाथ पुतलों की करीब 30 बुकिंग परिवार को मिली है।
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5 से 80 फीट तक बनाते हैं पुतले

राजकुमार कलंदरी ने बताया कि 5 से 80 फीट तक पुतले बनाए जाते हैं। पुतले बनाने का कार्य तीन माह पहले किया जाता है। पूर्वजों ने लकड़ी से पुतले बनाने शुरू किए थे। प्रचलन के साथ-साथ अब बांस से पुतले बनाए जाने लगे हैं। उन्होंने बताया कि बड़े पुतलों को पूरी सामग्री सहित 1000 रुपये फीट के हिसाब से बेचा जाता है जबकि छोटे पुतलों को 300 रुपये फीट के हिसाब से बेच रहे हैं।

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सोनीपत, झज्जर व गोहाना से मिली बुकिंग
कारीगर राजकुमार ने बताया कि शहर के छह बड़े स्थानों पर पुतला दहन किया जाना है। वहीं हमें गोकर्ण डेरे स्थित सनातन धर्म रामलीला, कुकारी वाला रामलीला पटेल नगर, सेक्टर-1, ओमेक्स सिटी, माॅडल टाउन डबल पार्क व सूर्य नगर सहित अनेक स्थानों से बुकिंग मिली है। उन्होंने बताया कि शहर के अलावा झज्जर, सोनीपत, गोहाना, बेरी, चांदी व जींद आदि से भी पुतले बनाने का काम मिला है।
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