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किरदार ऐसा हो कि पर्दा गिरने के बाद भी बजती रहे ताली : अंजू सिहाग

Fri, 29 Mar 2024 01:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Fri, 29 Mar 2024 01:52 AM IST
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The character should be such that clapping continues even after the curtain falls: Anju Sihag
जींद। एक्टिव थियेटर एंड वेलफेयर सोसाइटी और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की तरफ से राजकीय पीजी महाविद्यालय में वीरवार को रंगमंच का उद्भव एवं विकास विषय पर सेमिनार का आयोजन करवाया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में मंगतराम शास्त्री ने हिस्सा लिया।
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शुभारंभ मुख्यातिथि आधारशिला स्कूल की प्राचार्य अंजू सिहाग, राजकीय पीजी महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सत्यवान मलिक, दिशा मिशन अस्पताल के एमडी डॉ. सुरेश जैन, डॉ. शमशेर, डॉ. दलजीत बिसला, डॉ. पुष्पा ढांडा, मंजू मानव, सोहनदास, प्रवीण दुग्गल ने किया। मंच संचालन रंगकर्मी रमेश भनवाला ने किया।
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इस दौरान मुख्यातिथि अंजू सिहाग ने कहा कि यह संस्था रंगमंच व संगीत के क्षेत्र में बड़ा काम कर रही है। आपके किरदार में ऐसी जान होनी चाहिए कि पर्दा गिरने के बाद भी तालियों की गडगड़ाहट सुनाई देती रहे। रंगमंच इंसान को संवेदनशील बनाता है व नई दिशा देने का काम करता है। अपने जीवन में रंगमंच को हमें जरूर अपनाना चाहिए। जो बच्चे लगातार मोबाइल फोन पर लगे रहते हैं, उन बच्चों का रंगमंच से परिचय कराना चाहिए। मुख्य वक्ता मंगतराम शास्त्री ने कहा कि मानव समाज में संवाद सबसे आनंददायी प्रक्रिया है, जो मनुष्य की सामाजिकता और विकास का आधार होती है।
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मनुष्य ने अपने अनुभवों और विचारों को संजोकर अगली पीढि़यों तक पहुंचाने के लिए जिन विद्याओं का सहारा लिया है, उनमें रंगमंच सबसे सशक्त माध्यम रहा है। रंगमंच हमेशा प्रतिरोध की आवाज बुलंद करता रहा है और दर्शक को सोचने पर मजबूर करता है। इस अवसर पर शर्मिला, भूपेंद्र, देव सुमन, प्रदीप, आशुतोष, ज्योति ढालवाल, डॉ. नीरू, डॉ. सुमन, डॉ. नरेंद्र मौजूद रहे।


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अनुशासन का पाठ पढ़ाता है रंगमंच

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. सत्यवान मलिक ने कहा कि रंगमंच का विकास पुरातन समय से होता आ रहा है। आगे इसका और विकास होगा। बच्चों ने रंगमंच जैसी विद्याओं को अपने जीवन में ढालना चाहिए। रंगमंच इंसान को आत्मविश्वास देता है और अनुशासन का पाठ पढ़ाता है। संस्था के संरक्षक डॉ. सुरेश जैन ने कहा कि भविष्य में शहर के अंदर थियेटर फेस्टिवल संगीत संध्या व कवि सम्मेलन करेंगे ताकि लोगों में कलाओं के माध्यम से आपसी भाईचारा बढ़े।
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