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Jind News: गांवों में जलघरों की क्षमता कम होने व अनियमित तरीके से पानी चलाने से सूखे टैंक
Sun, 09 Mar 2025 12:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 09 Mar 2025 12:11 AM IST
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08जेएनडी25-बधाना गांव स्थित जलघर में पीने के पानी से भरे दिखाई देते टैंक। संवाद।
जींद। गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांवों में पेयजल किल्लत शुरू होने लगी है। जलघर के टैंकों की क्षमता कम होने या फिर अनियमित तरीके से पानी छोड़ने के कारण समय से पहले जलघर के टैंकों से पानी खत्म हो रहा है। इसके कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जलघर में पानी नहीं होने और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण आलन जोगी खेड़ा गांव में पिछले 10 दिन से ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल रहा। यहां पर जो ट्यूबवेल लगा है। उसका पानी पीने योग्य नहीं है। कड़वा पानी होने के कारण ग्रामीणों को पिछले दस दिन से पेयजल का इंतजार बना है, लेकिन नहर में पानी नहीं आने के कारण यह इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। लगभग डेढ़ महीने में नहरी पानी की सप्लाई जलघर में होती है। एक बार जलघर का स्टोरेज टैंक भरने पर अगले समय तक नहर आने से पहले ही पानी खत्म हो रहा है। हालांकि गांव में लंबे अर्से के बाद जलघर से बेहतर पेयजल उपलब्ध होना शुरू हुआ था। कुछ दिन अच्छा पानी मिलने के बाद अब ग्रामीणों के कंठ सूख रहे हैं। इसके अलावा तेली खेड़ा व खरकगादियां गांव में भी पानी की कोई व्यवस्था फिलहाल नहीं है। यही हाल उचाना व नरवाना क्षेत्र के बड़े गांवों का बना हुआ है। जहां पर जलघरों में पेयजल की किल्लत बनी है।
टैंकों की क्षमता बढ़ाने का प्रपोजल हो रहा तैयार
जलघरों में पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार टैंकों की क्षमता बढ़ाने का प्रपोजल तैयार कर रही है, ताकि गर्मी के मौसम में पेयजल के लिए कहीं भी किल्लत का सामना न करे। इसके अतिरिक्त सफीदों व जुलाना खंड के लगभग 30 गांवों में अतिरिक्त टैंक बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा जिन गांवों में पेयजल की किल्लत होने की उम्मीद है या फिर किल्लत चल रही है। उन गांवों में जमीन मिलने पर अतिरिक्त टैंक बनाए जाएंगे।
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गर्मी के मौसम में पानी की खप्त भी ज्यादा होती है। अगर पानी को बहने से रोका जाए तो गांवों में जो पानी के टैंक बनाए गए हैं। वह जरूरत के अनुसार काफी हैं। प्रत्येक ग्रामीण को पानी की कीमत को समझकर व्यर्थ बहने वाले पानी को रोकना चाहिए। टोंटी को खुला न छोड़े, लीकेज को बंद करवाएं। ग्राम कमेटी की जिम्मेदारी है कि व्यर्थ पानी बहने से रोकने के लिए जुर्माने लगाया जाए। पानी की किल्लत न हो इसके लिए रोस्टर बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई परेशानी न रहे।
-- संजीव कुमार एक्सईन जनस्वास्थ्य विभाग जींद।
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जलघर में पानी नहीं होने और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण आलन जोगी खेड़ा गांव में पिछले 10 दिन से ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल रहा। यहां पर जो ट्यूबवेल लगा है। उसका पानी पीने योग्य नहीं है। कड़वा पानी होने के कारण ग्रामीणों को पिछले दस दिन से पेयजल का इंतजार बना है, लेकिन नहर में पानी नहीं आने के कारण यह इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। लगभग डेढ़ महीने में नहरी पानी की सप्लाई जलघर में होती है। एक बार जलघर का स्टोरेज टैंक भरने पर अगले समय तक नहर आने से पहले ही पानी खत्म हो रहा है। हालांकि गांव में लंबे अर्से के बाद जलघर से बेहतर पेयजल उपलब्ध होना शुरू हुआ था। कुछ दिन अच्छा पानी मिलने के बाद अब ग्रामीणों के कंठ सूख रहे हैं। इसके अलावा तेली खेड़ा व खरकगादियां गांव में भी पानी की कोई व्यवस्था फिलहाल नहीं है। यही हाल उचाना व नरवाना क्षेत्र के बड़े गांवों का बना हुआ है। जहां पर जलघरों में पेयजल की किल्लत बनी है।
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टैंकों की क्षमता बढ़ाने का प्रपोजल हो रहा तैयार
जलघरों में पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार टैंकों की क्षमता बढ़ाने का प्रपोजल तैयार कर रही है, ताकि गर्मी के मौसम में पेयजल के लिए कहीं भी किल्लत का सामना न करे। इसके अतिरिक्त सफीदों व जुलाना खंड के लगभग 30 गांवों में अतिरिक्त टैंक बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा जिन गांवों में पेयजल की किल्लत होने की उम्मीद है या फिर किल्लत चल रही है। उन गांवों में जमीन मिलने पर अतिरिक्त टैंक बनाए जाएंगे।
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गर्मी के मौसम में पानी की खप्त भी ज्यादा होती है। अगर पानी को बहने से रोका जाए तो गांवों में जो पानी के टैंक बनाए गए हैं। वह जरूरत के अनुसार काफी हैं। प्रत्येक ग्रामीण को पानी की कीमत को समझकर व्यर्थ बहने वाले पानी को रोकना चाहिए। टोंटी को खुला न छोड़े, लीकेज को बंद करवाएं। ग्राम कमेटी की जिम्मेदारी है कि व्यर्थ पानी बहने से रोकने के लिए जुर्माने लगाया जाए। पानी की किल्लत न हो इसके लिए रोस्टर बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई परेशानी न रहे।

08जेएनडी25-बधाना गांव स्थित जलघर में पीने के पानी से भरे दिखाई देते टैंक। संवाद।