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अहंकारी व्यक्ति का चित्त रहता है अशांत : पवन शर्मा
Tue, 30 Sep 2025 01:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 30 Sep 2025 01:41 AM IST
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29जेएनडी03-माता वैष्णवी धाम में नवरात्रों पर माता की पूजा करते हुए श्रद्धालु। स्रोत पुजारी
जींद। मां के दरबार में महत्व इस बात का नहीं कि व्यक्ति कितना ज्ञानवान, धनवान है क्योंकि पवित्र अंतःकरण ही वह दर्पण है जिसमें मां का प्रतिबिम्ब झलकता है। यह प्रवचन पवन शर्मा ने माता वैष्णवी धाम में आयोजित नवार्ण महायज्ञ के अवसर पर दी। उन्होंने कहा कि मां को यदि पाना है तो अंतर्मन को निर्मल करें।
उन्होंने ने कहा कि अहंकारी व्यक्ति सदैव अपने को ही सर्वश्रेष्ठ मानता है दूसरे लोग चाहे कितने ही बड़े क्यों न हो, उनको वह छोटे ही प्रतीत होते हैं। उसका चित्त सदैव अशांत बना रहता है क्योंकि शांति तो उसको ही मिलती है जिसने मैं और मेरेपन के भाव से मुक्ति प्राप्त कर ली है।
इस मौके पर आईईएस मन्नू गर्ग, साहिल गोयल, सौरभ गोयल, अंकित जैन, सुशील सिंगला, जतिन गर्ग, सोनू गर्ग, तिलक जुनेजा, जयकुमार, हरिकिशन आहुजा, रमेश खरबंदा, गोपाल कृष्ण माटा और प्रवीन परूथी मौजूद रहे।
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उन्होंने ने कहा कि अहंकारी व्यक्ति सदैव अपने को ही सर्वश्रेष्ठ मानता है दूसरे लोग चाहे कितने ही बड़े क्यों न हो, उनको वह छोटे ही प्रतीत होते हैं। उसका चित्त सदैव अशांत बना रहता है क्योंकि शांति तो उसको ही मिलती है जिसने मैं और मेरेपन के भाव से मुक्ति प्राप्त कर ली है।
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इस मौके पर आईईएस मन्नू गर्ग, साहिल गोयल, सौरभ गोयल, अंकित जैन, सुशील सिंगला, जतिन गर्ग, सोनू गर्ग, तिलक जुनेजा, जयकुमार, हरिकिशन आहुजा, रमेश खरबंदा, गोपाल कृष्ण माटा और प्रवीन परूथी मौजूद रहे।
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