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संवेदनशीलता व मानवता का स्थान नहीं ले सकती तकनीक : कुलपति
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- कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह बोले- 2047 का विकसित भारत युवाओं की मेहनत से बनेगा
माई सिटी रिपोर्टर
सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में विद्यार्थियों को करियर, कौशल, तकनीक और राष्ट्र निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि आने वाला समय तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। तकनीक चाहे कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, वह इंसान की संवेदनशीलता और मानवता का स्थान नहीं ले सकती। भारत को केवल अच्छे प्रोफेशनल्स की नहीं, बल्कि अच्छे इंसानों की भी जरूरत है।
‘टेक्नोलॉजी के साथ इंसानियत को भी जिंदा रखें विद्यार्थी’
नवागंतुक विद्यार्थियों से कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने कॅरिअर व भविष्य को लेकर बड़े सपने देखने चाहिए। कुछ विद्यार्थियों को शायद यह पता हो कि वह अगले 10-15 वर्षों में खुद को कहां देखना चाहते हैं। कुछ अभी अपने कॅरिअर को लेकर असमंजस में होंगे। दोनों ही परिस्थितियों में जरूरी है कि विद्यार्थी अपने सपनों को पहचानें। उन्हें हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरी नई तकनीकें जीवन और काम करने के तरीके को बदल रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को खुद को लगातार अपडेट रखना होगा। लेकिन ज्ञान और तकनीक की यात्रा के साथ मानवता की यात्रा भी जारी रहनी चाहिए।
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उद्यमोदय फाउंडेशन के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद विद्यार्थियों को स्कूल की तुलना में काफी आजादी मिलती है। इसलिए इस आजादी को सही दिशा देना विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है।
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माई सिटी रिपोर्टर
सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में विद्यार्थियों को करियर, कौशल, तकनीक और राष्ट्र निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि आने वाला समय तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। तकनीक चाहे कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, वह इंसान की संवेदनशीलता और मानवता का स्थान नहीं ले सकती। भारत को केवल अच्छे प्रोफेशनल्स की नहीं, बल्कि अच्छे इंसानों की भी जरूरत है।
‘टेक्नोलॉजी के साथ इंसानियत को भी जिंदा रखें विद्यार्थी’
नवागंतुक विद्यार्थियों से कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने कॅरिअर व भविष्य को लेकर बड़े सपने देखने चाहिए। कुछ विद्यार्थियों को शायद यह पता हो कि वह अगले 10-15 वर्षों में खुद को कहां देखना चाहते हैं। कुछ अभी अपने कॅरिअर को लेकर असमंजस में होंगे। दोनों ही परिस्थितियों में जरूरी है कि विद्यार्थी अपने सपनों को पहचानें। उन्हें हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करें।
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उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरी नई तकनीकें जीवन और काम करने के तरीके को बदल रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को खुद को लगातार अपडेट रखना होगा। लेकिन ज्ञान और तकनीक की यात्रा के साथ मानवता की यात्रा भी जारी रहनी चाहिए।
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उद्यमोदय फाउंडेशन के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद विद्यार्थियों को स्कूल की तुलना में काफी आजादी मिलती है। इसलिए इस आजादी को सही दिशा देना विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है।