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Jind News: नागरिक अस्पताल में हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए विशेष ओपीडी शुरू
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04जेएनडी34: हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए लगाई गई कुर्सियां। संवाद
जींद। नागरिक अस्पताल के गायनी वार्ड में हाई रिस्क गर्भवतियों को बेहतर और त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विशेष हाई रिस्क ओपीडी की शुरुआत की गई है। नई व्यवस्था के तहत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को सामान्य मरीजों की लंबी कतार में इंतजार नहीं करना पड़ेगा बल्कि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तुरंत इलाज और परामर्श दिया जाएगा।
अस्पताल के गायनी वार्ड में प्रतिदिन 200 से 300 महिलाओं की ओपीडी होती है। इनमें करीब 30 से 35 महिलाएं ऐसी होती हैं जिनकी गर्भावस्था को हाई रिस्क श्रेणी में रखा जाता है। पहले इन महिलाओं को भी सामान्य मरीजों की तरह लाइन में लगना पड़ता था जिससे कई बार उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब अस्पताल प्रशासन ने इनके लिए अलग व्यवस्था लागू कर दी है।
गायनी वार्ड के बाहर लगाई गई विशेष कुर्सी
हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान और सुविधा के लिए गायनी वार्ड के बाहर अलग से कुर्सी की व्यवस्था की गई है। जैसे ही ऐसी महिला मरीज अस्पताल पहुंचती है उसे सीधे विशेष ओपीडी में भेजा जाता है। डॉक्टरों और स्टाफ को भी निर्देश दिए गए हैं कि हाई रिस्क मरीजों की जांच और उपचार को प्राथमिकता दी जाए।
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गुलाबी रंग की पर्ची से होगी पहचान
अस्पताल प्रशासन ने हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए अलग रंग की पर्ची जारी करनी शुरू कर दी है। इन मरीजों को गुलाबी रंग की पर्ची दी जा रही है, जिस पर स्पष्ट रूप से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी अंकित किया जाता है। इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को मरीज की स्थिति का तुरंत पता चल जाता है और आवश्यक उपचार में देरी नहीं होती।
बाक्स
हाई रिस्क गर्भावस्था के मामलों में समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी होता है। नई व्यवस्था से न केवल मरीजों को सुविधा मिलेगी बल्कि गर्भवतियों और उनके शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। -डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद
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अस्पताल के गायनी वार्ड में प्रतिदिन 200 से 300 महिलाओं की ओपीडी होती है। इनमें करीब 30 से 35 महिलाएं ऐसी होती हैं जिनकी गर्भावस्था को हाई रिस्क श्रेणी में रखा जाता है। पहले इन महिलाओं को भी सामान्य मरीजों की तरह लाइन में लगना पड़ता था जिससे कई बार उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब अस्पताल प्रशासन ने इनके लिए अलग व्यवस्था लागू कर दी है।
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गायनी वार्ड के बाहर लगाई गई विशेष कुर्सी
हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान और सुविधा के लिए गायनी वार्ड के बाहर अलग से कुर्सी की व्यवस्था की गई है। जैसे ही ऐसी महिला मरीज अस्पताल पहुंचती है उसे सीधे विशेष ओपीडी में भेजा जाता है। डॉक्टरों और स्टाफ को भी निर्देश दिए गए हैं कि हाई रिस्क मरीजों की जांच और उपचार को प्राथमिकता दी जाए।
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गुलाबी रंग की पर्ची से होगी पहचान
अस्पताल प्रशासन ने हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए अलग रंग की पर्ची जारी करनी शुरू कर दी है। इन मरीजों को गुलाबी रंग की पर्ची दी जा रही है, जिस पर स्पष्ट रूप से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी अंकित किया जाता है। इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को मरीज की स्थिति का तुरंत पता चल जाता है और आवश्यक उपचार में देरी नहीं होती।
बाक्स
हाई रिस्क गर्भावस्था के मामलों में समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी होता है। नई व्यवस्था से न केवल मरीजों को सुविधा मिलेगी बल्कि गर्भवतियों और उनके शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। -डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद

04जेएनडी34: हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए लगाई गई कुर्सियां। संवाद