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किसानों के तेवर देख सहमे अधिकारी
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लघु सचिवालय पहुंचकर डीसी को ज्ञापन सौंपते किसान।
- फोटो : Jind
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करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को किसानों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों के आक्रामक तेवर देखते हुए प्रशासन बैकफुट पर आ गया। किसानों के तेवर से सहमे उपायुक्त नरेश कुमार लघु सचिवालय में ज्ञापन लेने किसानों से पहले पहुंच गए। जैसे ही किसान यहां पहुंचे, उपायुक्त ने ज्ञापन ले लिया। प्रदर्शन के दौरान रानी तालाब से लघु सचिवालय तक करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा। इस दौरान गोहाना रोड से पुलिस ने वाहनों का रूट डायवर्ट भी किया, लेकिन इसके बावजूद गोहाना रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
मंगलवार की सुबह संख्या में किसान टोल प्लाजा से रानी तालाब पहुंचे और यहां से रोष मार्च निकालना शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी किसान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए करनाल के एसडीएम को बर्खास्त करवाने तथा उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज करवाने की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि अब तक किसान आंदोलन में शामिल हुए 43,723 लोगों पर सरकार ने मुकदमे दर्ज किए हैं। इन सभी मुकदमों को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस विरोध में भी सरकार ने किसानों पर रास्ते रोकने के आरोप लगाकर एक दिन में ही 3217 किसानों पर मुकदमे दर्ज कर दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आए दिन किसानों के आंदोलन को तोडने के लिए अलग-अलग तरह से प्रताड़ित कर रही है, लेकिन किसान सरकार की साजिश को किसी भी स्तर पर कामयाब नहीं होने देंगे। जब तक केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं करेगी। किसानों के आंदोलन लगातार जारी रहेंगे।
एसडीएम के खिलाफ हो केस दर्ज
किसान नेता कैप्टन भूपेंद्र सिंह, सतबीर पहलवान व बिजेंद्र सिंधु ने कहा कि एसडीएम के आदेश पर किसानों पर जानलेवा हमला हुआ। इसमें एक किसान की जान भी गई है। ऐसे में एसडीएम के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए।
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करनाल की घटना के बाद किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से चौकन्ना रहा। पुलिस ने गोहाना रोड पर लगते सभी रास्तों पर अवरोधक लगाकर पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगाई थी, किसानों का काफिला आसानी से लघु सचिवालय तक पहुंच सकें।
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मंगलवार की सुबह संख्या में किसान टोल प्लाजा से रानी तालाब पहुंचे और यहां से रोष मार्च निकालना शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी किसान सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए करनाल के एसडीएम को बर्खास्त करवाने तथा उस पर हत्या का मुकदमा दर्ज करवाने की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि अब तक किसान आंदोलन में शामिल हुए 43,723 लोगों पर सरकार ने मुकदमे दर्ज किए हैं। इन सभी मुकदमों को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस विरोध में भी सरकार ने किसानों पर रास्ते रोकने के आरोप लगाकर एक दिन में ही 3217 किसानों पर मुकदमे दर्ज कर दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आए दिन किसानों के आंदोलन को तोडने के लिए अलग-अलग तरह से प्रताड़ित कर रही है, लेकिन किसान सरकार की साजिश को किसी भी स्तर पर कामयाब नहीं होने देंगे। जब तक केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं करेगी। किसानों के आंदोलन लगातार जारी रहेंगे।
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एसडीएम के खिलाफ हो केस दर्ज
किसान नेता कैप्टन भूपेंद्र सिंह, सतबीर पहलवान व बिजेंद्र सिंधु ने कहा कि एसडीएम के आदेश पर किसानों पर जानलेवा हमला हुआ। इसमें एक किसान की जान भी गई है। ऐसे में एसडीएम के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए।
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करनाल की घटना के बाद किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से चौकन्ना रहा। पुलिस ने गोहाना रोड पर लगते सभी रास्तों पर अवरोधक लगाकर पुलिस के जवानों की ड्यूटी लगाई थी, किसानों का काफिला आसानी से लघु सचिवालय तक पहुंच सकें।

गोहाना रोड पर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते किसान।- फोटो : Jind