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Jind News: सफीदों के भाजपाइयों को सता रहा बाहरी प्रत्याशी का डर

Sun, 01 Sep 2024 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Sun, 01 Sep 2024 12:20 AM IST
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Safidon's BJP members are afraid of outsider candidates
सफीदों। हरियाणा विधानसभा चुनाव की घोषणा किए जाने के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं में टिकटों की मारामारी चल रही है। अगर सफीदों की बात की जाए तो विधानसभा से करीब एक दर्जन नेता भाजपा के टिकट की मांग कर रहे हैं। टिकट मांगने वाले नेताओं की लंबी फेहरिस्त एक अनार सौ बीमार वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। इसी बीच कई दिनों से सफीदों विधानसभा सीट पर भाजपा की ओर से किसी बाहरी नेता को उतारने की चर्चा चल रही है।
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इस चर्चा ने स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं के दिल की धड़कन को बढ़ा दिया है। कहीं ये चर्चा यथार्थ में न तबदील हो जाएं इसको लेकर भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं। पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पार्टी आलाकमान को पत्र लिखकर कोई बाहरी उम्मीदवार न उतारने की अपील की है। कार्यकर्ताओं ने अपील के साथ संगठन को कुछ तर्क भी पेश किए हैं।
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सफीदों मंडल अध्यक्ष हरीश शर्मा, मुआना मंडल अध्यक्ष कृष्ण, पिल्लूखेड़ा मंडल अध्यक्ष रामफल मोरखी, रणबीर बिटानी, पूर्व मंडल अध्यक्ष गुरप्रीत व सुंदर ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतप्रकाश नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष, केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल, केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान, हरियाणा प्रभारी सतीश पूनिया, प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बडौली, सीएम नायब सैनी व राज्य महासचिव फणींद्रनाथ शर्मा को लिखे पत्र में कहा है कि किसी भी रूप में सफीदों विधानसभा में किसी भी बाहरी उम्मीदवार को प्रत्याशी न बनाया जाए।
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कार्यकर्ताओं ने इसके पीछे तर्क देते हुए कहा कि 1987 में चौधरी देवीलाल की आंधी होते हुए यहां से बाहरी उम्मीदवार रामचंद्र जांगड़ा चुनाव हार गए और निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 1991 में रामकुमार गौतम ने यहां से चुनाव लड़ा, लेकिन बाहरी प्रत्याशी होने के कारण उन्हें मात्र 1500 वोट मिले थे। वर्ष 2005 में कांग्रेस की आंधी होते हुए भी बाहरी प्रत्याशी होने के कारण कर्मबीर सैनी को हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2014 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्व. सुषमा स्वराज की बहन डाॅ. वंदना शर्मा को पार्टी ने यहां से उतारा था, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था। 2019 में पार्टी ने कांग्रेस पार्टी से आए एक उम्मीदवार को यहां से लड़ाया, इसके कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने पार्टी आलाकमान से आग्रह किया कि सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पार्टी के जिताऊ कार्यकर्ता को उम्मीदवार घोषित करें।
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