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पंजीकृत श्रमिकों को वर्ष भर नियमित रूप से मिलना चाहिए काम : सुरेश
Tue, 23 Sep 2025 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 23 Sep 2025 11:44 PM IST
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23जेएनडी06-करसोला गांव में मांगों को लेकर सभा करते हुए मनरेगा मजदूर। स्रोत यूनियन
जुलाना। करसोला गांव में मनरेगा श्रमिकों ने मांगों को लेकर सभा का आयोजन किया। मनरेगा मेट और मजदूर यूनियन हरियाणा के राज्य उपाध्यक्ष सुरेश करसोला ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पंजीकृत श्रमिकों को वर्ष भर नियमित रूप से काम मिले ताकि वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकें।
इसके अतिरिक्त श्रमिकों ने कार्यस्थलों पर बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसमें स्वच्छ पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा किट, विश्राम के लिए उचित स्थान जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। श्रमिकों ने कहा कि सरकार की ओर से निर्धारित 400 रुपये की दैनिक मजदूरी के बावजूद उन्हें मात्र 140 से 250 रुपये का भुगतान किया जा रहा है जो उनके श्रम का उचित प्रतिफल नहीं है।
यह स्थिति श्रमिकों के साथ घोर अन्याय है क्योंकि उन्हें उनकी मेहनत का पूरा दाम नहीं मिल रहा है। यह कम मजदूरी उनके परिवारों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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मजदूरी के भुगतान में देरी के कारण उन्हें अक्सर कर्ज लेना पड़ता है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ जाती है। उन्होंने मांग की कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें निर्धारित मजदूरी का पूरा भुगतान समय पर मिले, ताकि वह सम्मानजनक जीवन जी सकें। संवाद
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इसके अतिरिक्त श्रमिकों ने कार्यस्थलों पर बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसमें स्वच्छ पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा किट, विश्राम के लिए उचित स्थान जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। श्रमिकों ने कहा कि सरकार की ओर से निर्धारित 400 रुपये की दैनिक मजदूरी के बावजूद उन्हें मात्र 140 से 250 रुपये का भुगतान किया जा रहा है जो उनके श्रम का उचित प्रतिफल नहीं है।
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यह स्थिति श्रमिकों के साथ घोर अन्याय है क्योंकि उन्हें उनकी मेहनत का पूरा दाम नहीं मिल रहा है। यह कम मजदूरी उनके परिवारों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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मजदूरी के भुगतान में देरी के कारण उन्हें अक्सर कर्ज लेना पड़ता है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ जाती है। उन्होंने मांग की कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें निर्धारित मजदूरी का पूरा भुगतान समय पर मिले, ताकि वह सम्मानजनक जीवन जी सकें। संवाद