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ठेकेदार के खाते में जीएसटी नहीं जमा करने के मामले में नगर परिषद से मांगा रिकॉर्ड
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जींद नगर परिषद कार्यालय।
- फोटो : Jind
ठेकेदार के खाते से जीएसटी काटकर सरकार के पास नहीं जमा करवाने की शिकायत पर अब कराधान विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इसके तहत कराधान विभाग ने जींद नगर परिषद से 2017 तक का रिकॉर्ड मांगा है। इसमें बताना होगा कि कितने लोगों का जीएसटी काटा गया और कितनों का जमा करवाया गया। यह रिकॉर्ड दस दिन में कराधान विभाग के अधिकारियों के समक्ष पहुंचाना होगा। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई होगी।
गौरतलब है कि एक महीना पहले नगर परिषद के ठेकेदार लाजपत राय ने कराधान विभाग, डीसी, डीएमसी व अन्य अधिकारियों को शिकायत भेजी थी कि उसके भुगतान से 103619 रुपये जीएसटी के नाम पर नगर परिषद द्वारा काट लिया गया है और यह राशि सरकार को जमा नहीं करवाई गई। इससे उसे नुकसान हुआ है। इसकी जांच अब कराधान विभाग ने शुरू कर दी है। इसके तहत कराधान विभाग ने जींद नगर परिषद से कैश बुक मांगी है। इससे किए गए भुगतान व जीएसटी का मिलान किया जाएगा।
ये होती है व्यवस्था
जीएसटी में व्यवस्था होती है कि एक फर्म का जीएसटी कट कर सरकार को जाता है। इसके बाद यही कर वापस फर्म के खाते में भेज दिया जाता है। इससे जीएसटी का कटा हुआ पैसा वापस फर्म को मिल जाता है। ऐसे में ठेकेदार लाजपत के खाते से कटा हुआ पैसा न तो सरकार के रिकॉर्ड में गया और न ही ठेकेदार को वापस मिला।
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मांगा गया है रिकॉर्ड
इस मामले की शिकायत मिलने पर जांच शुरू की गई है। नगर परिषद को पत्र भेज कर रिकॉर्ड मुहैया करवाने के लिए कहा गया है। रिकॉर्ड की जांच होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जीएसटी नहीं जमा करवाया गया है तो इसकी रिकवरी ब्याज सहित की जाएगी।
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गौरतलब है कि एक महीना पहले नगर परिषद के ठेकेदार लाजपत राय ने कराधान विभाग, डीसी, डीएमसी व अन्य अधिकारियों को शिकायत भेजी थी कि उसके भुगतान से 103619 रुपये जीएसटी के नाम पर नगर परिषद द्वारा काट लिया गया है और यह राशि सरकार को जमा नहीं करवाई गई। इससे उसे नुकसान हुआ है। इसकी जांच अब कराधान विभाग ने शुरू कर दी है। इसके तहत कराधान विभाग ने जींद नगर परिषद से कैश बुक मांगी है। इससे किए गए भुगतान व जीएसटी का मिलान किया जाएगा।
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ये होती है व्यवस्था
जीएसटी में व्यवस्था होती है कि एक फर्म का जीएसटी कट कर सरकार को जाता है। इसके बाद यही कर वापस फर्म के खाते में भेज दिया जाता है। इससे जीएसटी का कटा हुआ पैसा वापस फर्म को मिल जाता है। ऐसे में ठेकेदार लाजपत के खाते से कटा हुआ पैसा न तो सरकार के रिकॉर्ड में गया और न ही ठेकेदार को वापस मिला।
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मांगा गया है रिकॉर्ड
इस मामले की शिकायत मिलने पर जांच शुरू की गई है। नगर परिषद को पत्र भेज कर रिकॉर्ड मुहैया करवाने के लिए कहा गया है। रिकॉर्ड की जांच होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जीएसटी नहीं जमा करवाया गया है तो इसकी रिकवरी ब्याज सहित की जाएगी।