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Jind News: जरूरतमंद छात्राओं की उम्मीद बन सामने आईं रविंद्र व सीमा
Mon, 23 Mar 2026 03:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 23 Mar 2026 03:07 AM IST
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22जेएनडी17: डॉ. रविंद्र।
जींद। जिले में शिक्षा के क्षेत्र में दो महिला अध्यापिकाएं जरूरतमंद छात्राओं के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई हैं। शिव चौक निवासी एवं पिल्लूखेड़ा कॉलेज की सहायक प्रोफेसर रविंद्र और बड़ौदा स्कूल की प्राध्यापिका डॉ. सीमा मलिक वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं की मदद कर उन्हें शिक्षा के रास्ते पर आगे बढ़ाने का सराहनीय कार्य कर रही हैं।
सहायक प्रोफेसर रविंद्र वर्ष 2012 से लगातार जरूरतमंद छात्राओं की सहायता कर रही हैं। वे स्कूल से लेकर कॉलेज स्तर तक छात्राओं की फीस, किताबें और वर्दी का खर्च उठाकर उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी छात्रा की शिक्षा नहीं रुकनी चाहिए। यही सोच उन्हें हर साल नई छात्राओं तक पहुंचने और उनकी मदद करने के लिए प्रेरित करती है।
रविंद्र न केवल आर्थिक सहयोग करती हैं बल्कि छात्राओं को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाती हैं। वे उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि कई छात्राएं आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।
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वहीं, बड़ौदा स्कूल की प्राध्यापिका डॉ. सीमा मलिक भी पिछले 14 वर्षों से इसी दिशा में कार्य कर रही हैं। उन्होंने अब तक 100 से अधिक जरूरतमंद छात्राओं की फीस भरने के साथ-साथ उन्हें लाइब्रेरी के लिए किताबें और स्कूल वर्दी उपलब्ध करवाई है। डॉ. मलिक का कहना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो समाज में बदलाव ला सकता है और बेटियों को सशक्त बना सकता है।
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सहायक प्रोफेसर रविंद्र वर्ष 2012 से लगातार जरूरतमंद छात्राओं की सहायता कर रही हैं। वे स्कूल से लेकर कॉलेज स्तर तक छात्राओं की फीस, किताबें और वर्दी का खर्च उठाकर उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी छात्रा की शिक्षा नहीं रुकनी चाहिए। यही सोच उन्हें हर साल नई छात्राओं तक पहुंचने और उनकी मदद करने के लिए प्रेरित करती है।
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रविंद्र न केवल आर्थिक सहयोग करती हैं बल्कि छात्राओं को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाती हैं। वे उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि कई छात्राएं आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।
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वहीं, बड़ौदा स्कूल की प्राध्यापिका डॉ. सीमा मलिक भी पिछले 14 वर्षों से इसी दिशा में कार्य कर रही हैं। उन्होंने अब तक 100 से अधिक जरूरतमंद छात्राओं की फीस भरने के साथ-साथ उन्हें लाइब्रेरी के लिए किताबें और स्कूल वर्दी उपलब्ध करवाई है। डॉ. मलिक का कहना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो समाज में बदलाव ला सकता है और बेटियों को सशक्त बना सकता है।

22जेएनडी17: डॉ. रविंद्र।