पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह का राज्यसभा से इस्तीफा मंजूर, बोले-पहली बार गड़बड़ाया खुद का हिसाब-किताब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सदस्य बीरेंद्र सिंह ने रविवार को राज्यसभा सदस्य के पद से इस्तीफा उपसभापति वेंकैया नायडू को सौंप दिया। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान अपने बेटे बृजेंद्र को लोकसभा प्रत्याशी बनाने के बाद इस्तीफा दिया था, लेकिन उस समय वह मंजूर नहीं हुआ। अब उन्होंने दोबारा इस्तीफा दिया तो वह मंजूर हो गया।
बीरेंद्र सिंह ने यह बात रविवार देर शाम राजीव गांधी महाविद्यालय उचाना में अपने कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए कही। कार्यकर्ताओं को संबोधित करने आई पूर्व विधायक प्रेमलता इस कदर भावुक हुई कि वह कुछ भी नहीं बोल पाईं और वापस अपनी सीट पर जाकर बैठ गईं।
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि वह हर चुनाव में हिसाब-किताब लगा लेते थे लेकिन पहली बार ऐसा हुआ, जब खुद का हिसाब-किताब गड़बड़ाया है। वह छह चुनाव जीते भी हैं तो तीन हारे भी हैं। प्रदेश में हमारी सरकार है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को मायूस होने की जरूरत नहीं है। भाजपा से उम्मीदवार रही प्रेमलता पहले की तरह आप लोगों बीच रहकर जो विकास कार्य हो रहे हैं, उनमें तेजी लाएंगी। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि आप लोग मेरे कार्यकर्ता नहीं साथी हैं।
नहीं बोल पाईं प्रेमलता, हुईं भावुक
पूर्व विधायक प्रेमलता मंच पर बोलने आईं तो कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मंच पर आने के बाद जब प्रेमलता बोलने लगी तो उनसे बोला नहीं गया। प्रेमलता भावुक हो गईं और अपनी सीट पर आकर बैठ गईं।
हार के कई कारण बताए
विधानसभा चुनाव के बाद पहली बैठक में उचाना से प्रेमलता की हार के कार्यकर्ताओं ने कई कारण बताए। कुछ ने सीएम द्वारा जन आशीर्वाद यात्रा में गर्दन काट दूंगा बयान, जन आशीर्वाद यात्रा से हुई गुटबाजी, मेरिट पर नौकरी लगने समेत कई कारण बताए। इस पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उनका मकसद केवल उचाना का विकास करवाना है। वह विकास कार्यों के लिए सीएम से लगातार संपर्क में रहेंगे और उचाना ने अब तक जो विकास कार्य किए हैं, उनको और आगे बढ़ाएंगे।