{"_id":"6aaed74d1c9188edde0cd844","slug":"radha-rani-is-a-symbol-of-love-sacrifice-and-dedication-ashok-sharma-jind-news-c-199-1-sroh1006-160592-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"राधा रानी प्रेम, त्याग और समर्पण की प्रतीक : अशोक शर्मा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राधा रानी प्रेम, त्याग और समर्पण की प्रतीक : अशोक शर्मा
विज्ञापन
फोटो 19जेएनडी20-राधा अष्टमी पर भजन-कीर्तन में पहुंचे श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धालु
उचाना। पुरानी अनाज मंडी स्थित महाराजा अग्रसेन मंदिर धर्मशाला में राधा अष्टमी पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर राधा रानी का गुणगान किया।
पुजारी अशोक शर्मा और पिंकी शर्मा ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे और पूरा वातावरण राधा-कृष्ण के जयकारों से भक्तिमय हो गया।
उन्होंने कहा कि राधा अष्टमी राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। राधा रानी को प्रेम, त्याग, समर्पण और निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक माना जाता है। राधा रानी का जीवन हमें सच्चे प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। श्रीकृष्ण की भक्ति राधा रानी के प्रेम और समर्पण के बिना अधूरी मानी जाती है।
विज्ञापन
राधा रानी का स्मरण करने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं तथा व्यक्ति के भीतर प्रेम, करुणा और सेवा भाव की भावना विकसित होती है। राधा अष्टमी का पर्व हमें अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष को त्यागकर प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि धार्मिक पर्वों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखते हुए इनके आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में अपनाएं। जरूरतमंदों की सहायता करना, दूसरों के प्रति प्रेम एवं सम्मान रखना और समाज में सद्भाव बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने राधा रानी के चरणों में सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। अंत में आरती की गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
विज्ञापन
पुजारी अशोक शर्मा और पिंकी शर्मा ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे और पूरा वातावरण राधा-कृष्ण के जयकारों से भक्तिमय हो गया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि राधा अष्टमी राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। राधा रानी को प्रेम, त्याग, समर्पण और निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक माना जाता है। राधा रानी का जीवन हमें सच्चे प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। श्रीकृष्ण की भक्ति राधा रानी के प्रेम और समर्पण के बिना अधूरी मानी जाती है।
विज्ञापन
राधा रानी का स्मरण करने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं तथा व्यक्ति के भीतर प्रेम, करुणा और सेवा भाव की भावना विकसित होती है। राधा अष्टमी का पर्व हमें अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष को त्यागकर प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि धार्मिक पर्वों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखते हुए इनके आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में अपनाएं। जरूरतमंदों की सहायता करना, दूसरों के प्रति प्रेम एवं सम्मान रखना और समाज में सद्भाव बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने राधा रानी के चरणों में सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। अंत में आरती की गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।