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Jind News: मिट्टी जांच आधारित खेती से बढ़ेगा उत्पादन
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25जेएनडी16-तारखा गांव में किसानों को संबोधित करते डॉ. धीरज पंघाल। स्रोत कर्मचारी
जींद। कृषि विज्ञान केंद्र पांडू पिंडारा की ओर से सोमवार को गांव तारखा में संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन विषय पर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसलों की बेहतर पैदावार के लिए संतुलित उर्वरक प्रयोग के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. धीरज पंघाल ने किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि असंतुलित रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग भूमि की उत्पादकता को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक प्रयोग से न केवल उत्पादन लागत कम होती है बल्कि फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन में भी वृद्धि होती है। बिना मिट्टी जांच के उर्वरकों का प्रयोग करने से भूमि में पोषक तत्वों का असंतुलन उत्पन्न हो जाता है, जिससे दीर्घकाल में मिट्टी की उत्पादकता कम हो सकती है।
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उन्होंने गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कंपोस्ट और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को अपनाने की सलाह दी। डॉ. पंघाल ने कहा कि जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के समन्वित उपयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलती है।
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जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. धीरज पंघाल ने किसानों को मिट्टी परीक्षण आधारित खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि असंतुलित रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग भूमि की उत्पादकता को प्रभावित कर रहा है।
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उन्होंने किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक प्रयोग से न केवल उत्पादन लागत कम होती है बल्कि फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन में भी वृद्धि होती है। बिना मिट्टी जांच के उर्वरकों का प्रयोग करने से भूमि में पोषक तत्वों का असंतुलन उत्पन्न हो जाता है, जिससे दीर्घकाल में मिट्टी की उत्पादकता कम हो सकती है।
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उन्होंने गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कंपोस्ट और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को अपनाने की सलाह दी। डॉ. पंघाल ने कहा कि जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के समन्वित उपयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलती है।