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बणदेवी को फंसाने के लिए राजकुमारी रुकमण चलती है कई चाल
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सांग का मंचन करते कलाकार। संवाद।
- फोटो : Jind
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जींद। संस्कृति मंत्रालय के सौजन्य से रविवार को गांव ढिगाना के शिव मंदिर में अखिल भारती पूजनीय सुमित्रा माता ग्रामीण विकास संस्था द्वारा हरियाणवी सांग बणदेवी का मंचन किया गया। इसका मंचन धर्मेंद्र सांगी व उनकी टीम ने किया। जिला परिषद कार्यालय अधीक्षक महावीर शर्मा ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की जबकि जिला रेडक्रॉस सोसायटी सचिव राजपकूर सूरा, मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी राकेश भारद्वाज, अजय सिंगरोहा व राष्ट्रीय युवा अवार्डी सुभाष ढिगाना विशेष रूप से मौजूद रहे। संस्था सचिव विजय कुमार ने कहा कि विलुप्त होती हरियाणवी संस्कृति को बचाने के लिए यह मुहिम चलाई जा रही है।
काबेरी शहर के राजा सूरत सिंह की बेटी रुकमण ने अपनी शादी के लिए कहा कि जिस भी राजकुमार को मेरी फोटो पसंद आएगी, मैं उसी से शादी करुंगी। इससे पहले हरिसैन महाराज अपनी राजधानी छोड़कर जंगल में रहने लगे थे। उनकी रानी गर्भवती थी। रानी को एक लड़की पैदा हुई, जिसका नाम बणदेवी रखा गया। वह बहुत सुंदर तथा होशियार थी। उधर अर्थ मर्दन के राजा हेम अर्थ हैं। उनके लड़के का नाम कनक अर्थ था। कनक अर्थ को रुकमण का फोटो पसंद आता है। वह रुकमण से शादी करने के लिए चल देता है। रास्ते में जंगल में बारात आराम करती है। यहां पर राजकुमार कनक अर्थ को बणदेवी मिलती है। राजकुमार कनक अर्थ रुकमण की बजाय बणदेवी के साथ शादी करके अपने घर आ जाता है। जब रुकमण को पता चलता है तो वह बहुत गुस्सा होती है तथा बणदेवी कोजमारने के लिए अपनी सबसे चालबाज दासी को भेजती है लेकिन वह दासी सफल नहीं हो पाती और रुकमण हार मान लेती है।
इस मौके पर पूर्व सरपंच फकीर चंद, रामनिवास शर्मा, संदीप सिंगरोहा, सतबीर भारद्वाज, सुनील वशिष्ठ, लक्ष्य शर्मा, ग्राम सचिव देवेंद्र के अलावा काफी संख्या में ग्रामीणों ने सांग का
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काबेरी शहर के राजा सूरत सिंह की बेटी रुकमण ने अपनी शादी के लिए कहा कि जिस भी राजकुमार को मेरी फोटो पसंद आएगी, मैं उसी से शादी करुंगी। इससे पहले हरिसैन महाराज अपनी राजधानी छोड़कर जंगल में रहने लगे थे। उनकी रानी गर्भवती थी। रानी को एक लड़की पैदा हुई, जिसका नाम बणदेवी रखा गया। वह बहुत सुंदर तथा होशियार थी। उधर अर्थ मर्दन के राजा हेम अर्थ हैं। उनके लड़के का नाम कनक अर्थ था। कनक अर्थ को रुकमण का फोटो पसंद आता है। वह रुकमण से शादी करने के लिए चल देता है। रास्ते में जंगल में बारात आराम करती है। यहां पर राजकुमार कनक अर्थ को बणदेवी मिलती है। राजकुमार कनक अर्थ रुकमण की बजाय बणदेवी के साथ शादी करके अपने घर आ जाता है। जब रुकमण को पता चलता है तो वह बहुत गुस्सा होती है तथा बणदेवी कोजमारने के लिए अपनी सबसे चालबाज दासी को भेजती है लेकिन वह दासी सफल नहीं हो पाती और रुकमण हार मान लेती है।
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इस मौके पर पूर्व सरपंच फकीर चंद, रामनिवास शर्मा, संदीप सिंगरोहा, सतबीर भारद्वाज, सुनील वशिष्ठ, लक्ष्य शर्मा, ग्राम सचिव देवेंद्र के अलावा काफी संख्या में ग्रामीणों ने सांग का
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