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Jind News: दिल्ली ब्लास्ट के बाद जागी थी पुलिस, अब फिर नींद में...जांच बंद

Thu, 27 Nov 2025 11:55 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 27 Nov 2025 11:55 PM IST
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Police woke up after Delhi blast, now back in slumber...investigation stopped
27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद
जींद। दिल्ली में हाल ही में हुए बम धमाके के बाद जिले की पुलिस कुछ दिनों तक पूरी तरह से सतर्क रही। बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, प्रमुख बाजार, चौक-चौराहे और सार्वजनिक जगहों पर जांच की जा रही थी लेकिन अब आने-जाने वालों को टोका तक नहीं जा रहा। सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस प्रशासन की शुरूआती चौकसी औपचारिकता बनकर रह गई है।
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दिल्ली ब्लास्ट के बाद पुलिस ने पहले तीन दिन तक शहर में बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया। चप्पे-चप्पे पर तलाशी, संदिग्ध लोगों से पूछताछ, वाहनों की जांच और सामान की जांच की गई। अब बस अड्डा, रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था नदारद है।
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यहां नियुक्त पुलिसकर्मी रहते तो हैं लेकिन जांच के नाम पर औपचारिकता पूरी हो रही है। शहर में बस अड्डा-रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन सैंकड़ों यात्री दूसरे जिलों और राज्यों में सफर करते हैं।
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पुलिस की मुस्तैदी गायब, सिस्टम पर सवाल
पुलिस के इस शुरुआती सक्रिय रवैये से आम नागरिकों में सुरक्षा को लेकर भरोसा भी जगा था कि जिला पुलिस किसी भी अनहोनी को टालने के लिए सतर्क है लेकिन यह भरोसा ज्यादा दिन टिक नहीं सका। घटना के तीन दिन बीतते ही पुलिस की यह मुस्तैदी अचानक गायब हो गई। हालात यह हैं कि शहर में जहां पहले पुलिस की गाड़ियां लगातार गश्त करती थीं। अब वहां पुलिस की मौजूदगी दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही। शहर के प्रमुख चौक, रानी तालाब, गोहाना रोड, पटियाला चौक और पुरानी सब्जी मंडी इलाके में लोग अब यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या पुलिस का अलर्ट सिस्टम केवल दिखावे तक सीमित था।
वर्जन
बाजारों में रोजाना हजारों लोग खरीदारी के लिए आते हैं। बस अड्डा से प्रतिदिन सैंकड़ों यात्री दूसरे जिलों और राज्यों में सफर करते हैं लेकिन न तो वहां पुलिस का कोई चेक-प्वाइंट है और न ही सुरक्षा जांच की कोई व्यवस्था। -सुनील वशिष्ट, समाजसेवी व व्यापारी
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दिल्ली ब्लास्ट के बाद पुलिस दुकान, थैले, बैग की जांच कर रही थी। उस समय लगा कि पुलिस अब आम नागरिक की सुरक्षा को लेकर तक सतर्क रहेगी। अब जांच तो दूर पुलिस औपचारिकता भी पूरी नहीं कर रही।
-मनीष गर्ग, प्रधान करियाणा एसोसिएशन जींद।
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आतंक या विस्फोटक गतिविधियों के खतरे के बाद अलर्ट को धीरे-धीरे सामान्य करना समझ आता है, लेकिन उसे पूरी तरह समाप्त कर देना उचित नहीं है। सुरक्षा अभियान का तीन से चार दिन बाद शून्य हो जाना यह दर्शाता है कि पुलिस ने पूरी प्रक्रिया को सिर्फ शुरुआती दबाव में निभाया। वास्तविक सतर्कता और निरंतर चौकसी का यहां कोई सिस्टम नहीं स्थापित किया गया।
-वीरेंद्र जांगड़ा, अधिवक्ता
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सबसे बड़ा सवाल पुलिस की प्राथमिकता और जवाबदेही पर खड़ा होता है। अगर राष्ट्रीय राजधानी में हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा गश्त केवल 72 घंटों तक सीमित हो जाती है तो यह जिला प्रशासन की सुरक्षा रणनीति पर एक गहरी खामी को उजागर करता है। -राजकुमार गोयल, प्रधान अखिल भारतीय अग्रवाल समाज
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अलर्ट के बाद सुरक्षा व्यवस्था को इवेंट बेस्ड नहीं बल्कि सिस्टम बेस्ड बनाया जाए तभी किसी अनहोनी से बचा जा सकता है। अब देखना होगा कि जनता के सवालों के बाद क्या पुलिस प्रशासन अपनी नींद से जागेगा या सुरक्षा फिर से केवल अगली घटना का इंतजार करेगी। -पवन बंसल, प्रवक्ता मेन बाजार
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पुलिस की गश्त अब कम हो गई है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का काम पुलिस का ही है। गतिविधियां सामान्य होने के बाद पुलिस भी सामान्य हो जाती है। पुलिस प्रशासन को जब गलत होने का अंदेशा होता है तो उस समय अलर्ट रहत है। -नरेंद्र नाडा, प्रधान सेव संस्था

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

27जेएनडी10: शहर के रेलवे जंक्शन से नदारद पुलिस कर्मी। संवाद

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