कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर खटकड़ टोल प्लाजा पर चल रहे किसानों, मजदूरों के धरने की रविवार की अध्यक्षता महेंद्र सिंह ने की। सांकेतिक हड़ताल पर रतन, वेदू, विजय, राममेहर, कुलबीर दरियाला रहे। दिल्ली सीमा पर धरनों पर जाने और वहां से आने वाली महिलाओं ने रक्षाबंधन के पर्व पर खटकड़ टोल पर रुकीं। यहां पर उन्होंने किसानों को राखी बांधकर आंदोलन में जीत की कामना की।
सतबीर पहलवान ने कहा कि 5 सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में होने वाली किसान महापंचायत में बांगर के एरिया से किसान पहुंचेंगे। दिल्ली बॉर्डर के धरनों की बात हो या प्रदेश में टोल के पास चल रहे धरने हों हर जगह किसानों की भीड़ बढ़ रही है। आंदोलन को तोड़ने के लिए जात-पात के नाम पर बांटने की जो कोशिश हो रही है वह पूरी तरह से पहले भी फेल रही है और आगे भी फेल रहेगी। किसान, मजदूर की कोई जाति नहीं होती है। हर बिरादरी के लोग खेती से जुड़े हैं। अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मजदूरी करते हैं। इस अवसर पर बलबीर बद्दोवाला, कल्याणी देवी प्रचारक आर्य समाज, सुनील, हरिकेश, कैप्टन रणधीर सिंह मौजूद रहे।