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Jind News: जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को जबरन हटाने पर भड़के छात्र संगठन, कहा-लोकतंत्र पर हमला
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19जेएनडी01: रानी तालाब पर सोनम वांगचुक के समर्थ में भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए समर्थक। स
जींद। भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से जबरन हटाने के विरोध में शनिवार को शहर के आंबेडकर चौक पर छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों ने सभा कर विरोध प्रदर्शन किया। इसकी अध्यक्षता जन संघर्ष मंच हरियाणा के राज्य कमेटी सदस्य सुधीर शास्त्री ने की।
वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पेपर लीक और विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ी के विरोध में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक व अन्य को बलपूर्वक हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
आईवाईएफ के राज्य प्रधान अक्षय और भारत की जनवादी नौजवान सभा के जसपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के लागू होने के बाद शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है और छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
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सामाजिक सद्भावना मंच के रामफल दहिया ने कहा कि यदि सरकार युवाओं की चिंता करती है तो उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। वहीं सेवानिवृत्त प्राचार्य सुरेंद्र बैनीवाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों पर कार्रवाई उचित नहीं है।
छात्र-छात्राओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित रूप से जिम्मेदार संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई, शांतिपूर्ण आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई रोकने तथा आंदोलनकारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
इस अवसर पर नेहा, ज्योति, विशाल, राहुल, समीर, रविंद्र रानोलिया, पूजन आर्य, तिलक राज मिगलानी, पवन कुमार, असीम, मनीष, सुनील, संगीता आषरी, मीना जावलिया सहित विभिन्न छात्र एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पेपर लीक और विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ी के विरोध में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक व अन्य को बलपूर्वक हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
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आईवाईएफ के राज्य प्रधान अक्षय और भारत की जनवादी नौजवान सभा के जसपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के लागू होने के बाद शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है और छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
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सामाजिक सद्भावना मंच के रामफल दहिया ने कहा कि यदि सरकार युवाओं की चिंता करती है तो उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। वहीं सेवानिवृत्त प्राचार्य सुरेंद्र बैनीवाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों पर कार्रवाई उचित नहीं है।
छात्र-छात्राओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित रूप से जिम्मेदार संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई, शांतिपूर्ण आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई रोकने तथा आंदोलनकारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
इस अवसर पर नेहा, ज्योति, विशाल, राहुल, समीर, रविंद्र रानोलिया, पूजन आर्य, तिलक राज मिगलानी, पवन कुमार, असीम, मनीष, सुनील, संगीता आषरी, मीना जावलिया सहित विभिन्न छात्र एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।