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एकमुश्त निपटान योजना से पुराने कर बकाया मामलों के निपटान पर मिलेगी छूट : डीसी
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07जेएनडी16-डीसी डॉ. वैशाली शर्मा।
- फोटो : 1
जींद। हरियाणा सरकार ने एकमुश्त निपटान योजना-2026 लागू की गई है। यह योजना 28 सितंबर तक प्रभावी रहेगी जिसके माध्यम से विभिन्न कर अधिनियमों के अंतर्गत लंबित कर बकाया मामलों का सरल एवं सुविधाजनक तरीके से निपटान किया जा सकेगा।
डीसी डॉ.वैशाली शर्मा ने बताया कि वर्ष 2025 में लागू की गई एकमुश्त निपटान योजना को व्यापारियों का व्यापक समर्थन मिला था और हजारों व्यापारियों ने इसका लाभ उठाते हुए अपने पुराने कर विवादों का समाधान कराया था। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बार फिर व्यापारियों के हित में यह योजना लागू करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि यह योजना सात कराधान अधिनियमों के अंतर्गत लंबित कर बकाया मामलों पर लागू होगी। योजना का मुख्य उद्देश्य पुराने कर विवादों का निपटान कर व्यापारियों को राहत प्रदान करना तथा विभाग एवं व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि यदि किसी करदाता पर किसी संबंधित अधिनियम के अंतर्गत किसी वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे योजना में आवेदन करने की आवश्यकता भी नहीं होगी। ऐसे मामलों में उस वर्ष के लिए कर, ब्याज एवं जुर्माना राशि पूर्ण रूप से माफ कर दी जाएगी। यह प्रावधान विशेष रूप से छोटे व्यापारियों एवं लघु उद्यमियों को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
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अलग-अलग राशि पर मिलेगी छूट
एक लाख रुपये से अधिक के बकाया मामलों में भी विभिन्न श्रेणियों के अनुसार कर राशि में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाएगी, जबकि ब्याज एवं जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिलेगा। एक से दस लाख रुपये तक 60 प्रतिशत, दस से एक करोड़ रुपये तक 50 प्रतिशत, एक से दस करोड़ रुपये तक 40 प्रतिशत, दस से 30 करोड़ रुपये तक 35 प्रतिशत, 30 से 60 करोड़ रुपये तक कर में 30 प्रतिशत की छूट दी गई है।
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डीसी डॉ.वैशाली शर्मा ने बताया कि वर्ष 2025 में लागू की गई एकमुश्त निपटान योजना को व्यापारियों का व्यापक समर्थन मिला था और हजारों व्यापारियों ने इसका लाभ उठाते हुए अपने पुराने कर विवादों का समाधान कराया था। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बार फिर व्यापारियों के हित में यह योजना लागू करने का निर्णय लिया है।
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उन्होंने बताया कि यह योजना सात कराधान अधिनियमों के अंतर्गत लंबित कर बकाया मामलों पर लागू होगी। योजना का मुख्य उद्देश्य पुराने कर विवादों का निपटान कर व्यापारियों को राहत प्रदान करना तथा विभाग एवं व्यापारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि यदि किसी करदाता पर किसी संबंधित अधिनियम के अंतर्गत किसी वर्ष में एक लाख रुपये तक का कर बकाया है तो उसे योजना में आवेदन करने की आवश्यकता भी नहीं होगी। ऐसे मामलों में उस वर्ष के लिए कर, ब्याज एवं जुर्माना राशि पूर्ण रूप से माफ कर दी जाएगी। यह प्रावधान विशेष रूप से छोटे व्यापारियों एवं लघु उद्यमियों को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
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अलग-अलग राशि पर मिलेगी छूट
एक लाख रुपये से अधिक के बकाया मामलों में भी विभिन्न श्रेणियों के अनुसार कर राशि में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाएगी, जबकि ब्याज एवं जुर्माना राशि पर 100 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिलेगा। एक से दस लाख रुपये तक 60 प्रतिशत, दस से एक करोड़ रुपये तक 50 प्रतिशत, एक से दस करोड़ रुपये तक 40 प्रतिशत, दस से 30 करोड़ रुपये तक 35 प्रतिशत, 30 से 60 करोड़ रुपये तक कर में 30 प्रतिशत की छूट दी गई है।