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Jind News: निजामपुर पुल पर भरे गड्ढे चालकों ने राहत की सांस ली
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फोटो 14 सड़क पर बने गड्ढों को भरने के बाद का दृश्य।संवाद
निजामपुर। निजामपुर पुल पर बने गड्ढों को भरने का कार्य शुरू कर दिया है। इसको लेकर अमर उजाला ने 13 अप्रैल को पुल पर खतरे की आहट, ओवरलोड वाहनों से कांप रहा ढांचा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था जिसके बाद विभाग ने संज्ञान लेते हुए कार्य शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढों के कारण पुल पर कंपन और अधिक महसूस हो रहा था जिससे हादसे की आंशका बनी हुई थी। हालांकि ग्रामीण ओवरलोड वाहनों के आवागमन पर भी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के डिप्टी मैनेजर प्रदीप कुमार ने बताया कि पुल में अत्यधिक कंपन के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुल की सड़क पर बने गड्ढे हैमर की तरह कार्य कर रहे थे इसलिए गड्ढों को भरने का कार्य पूरा कर लिया गया है।
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पुल में कुछ मात्रा में कंपन होना आवश्यक होता है क्योंकि संरचना में इलास्टिसिटी (लोच) होती है। यदि पुल में कंपन बिल्कुल न हो तो वह अत्यधिक कठोर हो जाता है और अचानक टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पुलों को एक निश्चित सीमा तक कंपन सहने योग्य बनाया जाता है जिसकी मात्रा का निर्धारण डिजाइन के अनुसार किया जाता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढों के कारण पुल पर कंपन और अधिक महसूस हो रहा था जिससे हादसे की आंशका बनी हुई थी। हालांकि ग्रामीण ओवरलोड वाहनों के आवागमन पर भी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
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वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के डिप्टी मैनेजर प्रदीप कुमार ने बताया कि पुल में अत्यधिक कंपन के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुल की सड़क पर बने गड्ढे हैमर की तरह कार्य कर रहे थे इसलिए गड्ढों को भरने का कार्य पूरा कर लिया गया है।
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पुल में कुछ मात्रा में कंपन होना आवश्यक होता है क्योंकि संरचना में इलास्टिसिटी (लोच) होती है। यदि पुल में कंपन बिल्कुल न हो तो वह अत्यधिक कठोर हो जाता है और अचानक टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पुलों को एक निश्चित सीमा तक कंपन सहने योग्य बनाया जाता है जिसकी मात्रा का निर्धारण डिजाइन के अनुसार किया जाता है।