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Jind News: साढ़े सात लाख रुपये हो चुके हैं खर्च, फिर भी सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशु
Wed, 01 Feb 2023 08:11 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 01 Feb 2023 08:11 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के मद में नगर परिषद साढ़े सात लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर चुकी है। बेसहारा पशु पकड़े भी गए लेकिन अब भी शहर की सड़कों, गली व चौक और चौराहे पर बेसहारा पशु घूमते नजर आ रहे हैं। इन पशुओं के चलते हादसे की आशंका बनी रहती है। माजरा खाप ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द बेसहारा पशुओं को नहीं पकड़ा गया तो वे अधिकारियों के आवास पर बेसहारा पशुओं को बांधने पर मजबूर होंगे।
नगर परिषद ने अक्तूबर-नवंबर में शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर लगाए थे। इसमें ठेकेदार को प्रति पशु 480 रुपये दिए गए। ठेकेदार ने 1600 बेसहारा पशुओं को पकड़कर नंदीशाला व गोशाला में छोड़ा। नंदीशाला में 1100 पशुओं और गोशाला में 500 पशुओं को छोड़ा गया। इसके बाद गोशाला और नंदीशाला ने और पशुओं को रखने से इंकार कर दिया तो नगर परिषद ने अपना अभियान रोक दिया।
नंदीशाला व गोशाला की तरफ से पशुओं की क्षमता पूरी होने की बात कही गई। अभियान रोकने से सभी पशु नंदीशाला व गोशालाओं में नहीं पहुंच सके। इस कारण अब भी शहर की सड़कों पर करीब तीन हजार पशु घूम रहे हैं। इनकी वजर से हादसे होते रहते हैं। रात के समय कोहरा होने पर सड़क पर यह पशु दिखाई नहीं देते, जिससे हादसे हो जाते हैं। लोगों ने इन पशुओं को पकड़कर गोशाला या नंदीशाला में छोडने की मांग की है ताकि उनको राहत मिल सके।
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प्रशासन से पशुओं को पकड़ने की मांग
माजरा खाप ने जिला प्रशासन से गांवों से भी बेसहारा पशुओं को पकड़कर नंदीशाला या गोशालाओं में छोड़ने की मांग की है। खाप के प्रधान गुरविंदर सिंह संधू, महासचिव महेंद्र सिंह धोनी, प्रवक्ता समुंदर सिंह फोर ने बुधवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि बेसहारा पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में किसानों को रखवाली करने के लिए सर्दी की रात खेतों में बितानी पड़ रही है। चार साल पहले माजरा खाप ने अभियान चलाकर प्रशासन को चेताया था, उस समय कुछ पशुओं को प्रशासन ने पकड़कर केवल खानापूर्ति की थी। सरकार गोशालाओं को प्रति पशु प्रतिदिन एक रुपया 60 पैसे ग्रांट देती है जो काफी कम है। चारा 13 से 15 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। ऐसे में सरकार को प्रतिदिन 50 रुपये प्रति पशु की दर से बजट देनी चाहिए। इससे गोशालाओं को राहत मिलेगी और किसानों को खेतों में रात नहीं बितानी पड़ेगी। माजरा खाप ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द बेसहारा पशुओं को नहीं पकड़ा तो फिर खाप पशुओं को पकड़कर अधिकारियों के निवास पर बांधने को मजबूर होगी।
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अभियान चलाकर 1600 बेसहारा पशुओं को पकड़कर नंदीशाला व गोशाला में छोड़ा गया है। गोशाला व नंदीशाला संचालकों ने और पशु लेेने से मना कर दिया, इसलिए अभियान को रोकना पड़ा। भिवानी रोड पर एक अन्य गोशाला से बातचीत हुई है, यहां पर 500 पशुओं को पकड़कर छोड़ा जाएगा। शहर से सभी बेसहारा पशु पकड़कर गोशालाओं में छोड़ दिए थे। अब आसपास के गांवों के लोग बेसहारा पशुओं को शहर में छोड़ रहे हैं, जिससे फिर इनकी संख्या बढ़ गई है।-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद।
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जींद। शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के मद में नगर परिषद साढ़े सात लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर चुकी है। बेसहारा पशु पकड़े भी गए लेकिन अब भी शहर की सड़कों, गली व चौक और चौराहे पर बेसहारा पशु घूमते नजर आ रहे हैं। इन पशुओं के चलते हादसे की आशंका बनी रहती है। माजरा खाप ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द बेसहारा पशुओं को नहीं पकड़ा गया तो वे अधिकारियों के आवास पर बेसहारा पशुओं को बांधने पर मजबूर होंगे।
नगर परिषद ने अक्तूबर-नवंबर में शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर लगाए थे। इसमें ठेकेदार को प्रति पशु 480 रुपये दिए गए। ठेकेदार ने 1600 बेसहारा पशुओं को पकड़कर नंदीशाला व गोशाला में छोड़ा। नंदीशाला में 1100 पशुओं और गोशाला में 500 पशुओं को छोड़ा गया। इसके बाद गोशाला और नंदीशाला ने और पशुओं को रखने से इंकार कर दिया तो नगर परिषद ने अपना अभियान रोक दिया।
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नंदीशाला व गोशाला की तरफ से पशुओं की क्षमता पूरी होने की बात कही गई। अभियान रोकने से सभी पशु नंदीशाला व गोशालाओं में नहीं पहुंच सके। इस कारण अब भी शहर की सड़कों पर करीब तीन हजार पशु घूम रहे हैं। इनकी वजर से हादसे होते रहते हैं। रात के समय कोहरा होने पर सड़क पर यह पशु दिखाई नहीं देते, जिससे हादसे हो जाते हैं। लोगों ने इन पशुओं को पकड़कर गोशाला या नंदीशाला में छोडने की मांग की है ताकि उनको राहत मिल सके।
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प्रशासन से पशुओं को पकड़ने की मांग
माजरा खाप ने जिला प्रशासन से गांवों से भी बेसहारा पशुओं को पकड़कर नंदीशाला या गोशालाओं में छोड़ने की मांग की है। खाप के प्रधान गुरविंदर सिंह संधू, महासचिव महेंद्र सिंह धोनी, प्रवक्ता समुंदर सिंह फोर ने बुधवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि बेसहारा पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में किसानों को रखवाली करने के लिए सर्दी की रात खेतों में बितानी पड़ रही है। चार साल पहले माजरा खाप ने अभियान चलाकर प्रशासन को चेताया था, उस समय कुछ पशुओं को प्रशासन ने पकड़कर केवल खानापूर्ति की थी। सरकार गोशालाओं को प्रति पशु प्रतिदिन एक रुपया 60 पैसे ग्रांट देती है जो काफी कम है। चारा 13 से 15 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। ऐसे में सरकार को प्रतिदिन 50 रुपये प्रति पशु की दर से बजट देनी चाहिए। इससे गोशालाओं को राहत मिलेगी और किसानों को खेतों में रात नहीं बितानी पड़ेगी। माजरा खाप ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द बेसहारा पशुओं को नहीं पकड़ा तो फिर खाप पशुओं को पकड़कर अधिकारियों के निवास पर बांधने को मजबूर होगी।
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अभियान चलाकर 1600 बेसहारा पशुओं को पकड़कर नंदीशाला व गोशाला में छोड़ा गया है। गोशाला व नंदीशाला संचालकों ने और पशु लेेने से मना कर दिया, इसलिए अभियान को रोकना पड़ा। भिवानी रोड पर एक अन्य गोशाला से बातचीत हुई है, यहां पर 500 पशुओं को पकड़कर छोड़ा जाएगा। शहर से सभी बेसहारा पशु पकड़कर गोशालाओं में छोड़ दिए थे। अब आसपास के गांवों के लोग बेसहारा पशुओं को शहर में छोड़ रहे हैं, जिससे फिर इनकी संख्या बढ़ गई है।-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद।