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Jind News: ड्राइवर छोरी मुस्कान ने मेहनत और हौसले से लिखी सफलता की कहानी

Wed, 22 Apr 2026 12:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 12:00 AM IST
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Muskan, the Driver's Daughter, Writes a Success Story Through Hard Work and Determination.
21जेएनडी01: कंबाइन से गेहूं की कटाई करती हुए मुस्कान। संवाद।
नरवाना। गांव डूमरखा कला की रहने वाली मुस्कान आज ग्रामीण क्षेत्र में प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी है। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली मुस्कान ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और हौसले के दम पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। मुस्कान की कहानी न केवल गांव की बेटियों को प्रेरित कर रही है बल्कि समाज में सोच बदलने का संदेश भी दे रही है।
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मुस्कान स्कूल से लौटते ही सीधे खेतों में पहुंच जाती है और अपने पिता प्रवीण के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती है। ट्रैक्टर चलाना, खेतों की जुताई-बुवाई करना, रीपर से तूड़ी बनाना या खेतों को समतल करना हर काम में मुस्कान पूरी दक्षता के साथ जुटी रहती हैं।
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चार बहनों में सबसे बड़ी मुस्कान ने अपने पिता को कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। शुरुआत में गांव के लोग ट्रैक्टर चलाने पर तंज कसते थे लेकिन उसने किसी की बातों की परवाह किए बिना अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखा।
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आज वही लोग उसकी मेहनत और आत्मविश्वास की सराहना करते नहीं थकते। मुस्कान को ट्रैक्टर के अलावा गाड़ी, बाइक और स्कूटी चलाना भी आता है। उसकी इसी खासियत के चलते गांव में लोग उसे प्यार से ड्राइवर छोरी कहकर बुलाते हैं। पिता ने भी उसकी लगन को देखते हुए उसे खुद का ट्रैक्टर दिलाया है जिससे उसका उत्साह और बढ़ गया।

मुस्कान का नजरिया भी उसे खास बनाता है। मेकअप को लेकर सवाल किया तो मुस्कान ने कहा, मेकअप तो बाद में भी हो जाएगा लेकिन मेहनत सबसे जरूरी है।



बेटी पर गर्व है : प्रवीण

मुस्कान के पिता प्रवीण का कहना है कि बेटियां भी हर जिम्मेदारी निभा सकती हैं, बस उन्हें मौका और विश्वास मिलना चाहिए। जब मुस्कान ने खेती में रुचि दिखाई तो उन्होंने उसे रोका नहीं बल्कि हर कदम पर साथ दिया। उसकी मेहनत और लगन को देखकर उन्होंने उसे खुद का ट्रैक्टर दिलाया जिससे उसका आत्मविश्वास और बढ़ा गया। उन्हें बेटी मुस्कान पर गर्व है। प्रवीण बताते हैं कि शुरुआत में लोगों की बातें सुननी पड़ीं लेकिन आज वही लोग बेटी की मिसाल देते हैं। मुस्कान न सिर्फ परिवार का सहारा बनी है बल्कि समाज में बेटियों को लेकर सोच बदलने का काम भी किया है।

21जेएनडी01: कंबाइन से गेहूं की कटाई करती हुए मुस्कान। संवाद।

21जेएनडी01: कंबाइन से गेहूं की कटाई करती हुए मुस्कान। संवाद।

21जेएनडी01: कंबाइन से गेहूं की कटाई करती हुए मुस्कान। संवाद।

21जेएनडी01: कंबाइन से गेहूं की कटाई करती हुए मुस्कान। संवाद।

21जेएनडी01: कंबाइन से गेहूं की कटाई करती हुए मुस्कान। संवाद।

21जेएनडी01: कंबाइन से गेहूं की कटाई करती हुए मुस्कान। संवाद।

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