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जींद में मेरी आवाज सुनो रैली: बीरेंद्र सिंह ने दी भाजपा को चेतावनी, जजपा के साथ गठबंधन रहा तो वह नहीं रहेंगे

Mon, 02 Oct 2023 04:04 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Mon, 02 Oct 2023 04:04 PM IST
सार

हरियाणा में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक गलियारों में माहौल गरमाने लगा है। दिग्गज नेताओं में समर्थकों और कार्यकर्ताओं को लुभाने के लिए रैली करने की होड़ लगी है। इस कड़ी में  जींद में आज पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह की रैली हुई।

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Meri Awaaz Suno rally in Jind: Will decide political career of Bangar leader and former minister Birendra Sing
जींद की रैली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा-जजपा गठबंधन होने के कारण बीरेंद्र सिंह के सारे राजनीतिक समीकरण बिगड़ गए हैं। अब समर्थकों का उन पर भाजपा को छोड़ने का दबाव बढ़ गया है। इसलिए आज जींद के एकलव्य स्टेडियम में हो रही उनकी रैली तय करेगी कि बीरेंद्र सिंह किस तरफ मुड़ेंगे। वहीं उनके समर्थकों ने तो फैसला कर लिया, अब फैसला बीरेंद्र सिंह को करना है। इसके साथ ही रैली में हिसार से भाजपा के सांसद बृजेंद्र सिंह भी पहुंचे हैं।

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प्रधानमंत्री सम्मान निधि पर सवाल उठाया
मेरी आवाज सुना रैली के जरिये यहां एकलव्य स्टेडियम में पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनका जजपा के साथ गठबंधन रहा तो फिर वह भाजपा में नहीं रहेंगे। प्रधानमंत्री सम्मान निधि पर सवाल उठाते हुए बीरेंद्र सिंह ने कहा कि जो छह हजार रुपये की खैरात किसानों को दी जा रही है, वह नहीं चाहिए बल्कि एमएसपी गारंटी कानून चाहिए। 
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बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने हमेशा किसान व कमरेा वर्ग की आवाज उठाई है, चाहे वह किसी भी पार्टी में रहे हों। उन्होंने सबसे पहले दिल्ली किसान आंदोलन में किसानों का समर्थन किया था। वहीं जब बेटियों के साथ अन्याय हुआ और वह दिल्ली में धरने पर बैठी तो भी उन्होंने बेटियों का साथ दिया था। वह कभी लोगों की आवाज नहीं दबाते। वह हमेशा चाहे अपनी ही पार्टी के खिलाफ उठानी पड़े, निडर होकर उठाते हैं। सांसद बृजेंद्र सिंह ने अपने पिता से पहले बोलते हुए कहा कि आप चाहे कुछ भी हो, अपने मन की बात लोगों के सामने रखें। इसमें लोगों की भलाई होनी, राजनीतिक नफा-नुकसान की कोई परवाह नहीं करें।
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बीरेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर
बीरेंद्र सिंह ने 1977 में कांग्रेस के टिकट पर उचाना कलां से चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से जीत हासिल की। इसके बाद वह 1982 में फिर विधायक बने और प्रदेश में सहकारिता और डेयरी विकास मंत्री बने। 1984 में उन्होंने हिसार लोकसभा सीट से ओमप्रकाश चौटाला को हराया। 1991 में वह फिर से विधायक बने और राजस्व तथा योजना मंत्री बने। अपने पांचवें कार्यकाल में वह 2005 में विधायक बने। उन्होंने वित्त, श्रम एवं रेजगार मंत्रालय संभाला।

2010 में उनको राज्यसभा सदस्य चुना गया। 2013 में बीरेंद्र सिंह केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री बने। 28 अगस्त 2014 को उन्हाेंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह 29 अगस्त 2014 में भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने भी 2016 में उनको राज्यसभा सदस्य बना दिया। इस दौरान वह केंद्रीय इस्पात मंत्री बने। 2019 में उनके बेटे बृजेंद्र सिंह हिसार लोकसभा के चुने गए। इसके बाद बीरेंद्र सिंह ने राज्यसभा से भी इस्तीफा दे दिया।


कांग्रेस ने उनको ज्यादा तवज्जो नहीं मिली
बीरेंद्र सिंह 42 साल कांग्रेस में रहे। 29 अगस्त 2014 को वह भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले भी कांग्रेस ने उनको ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी। इसी कारण उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहा था।

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