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छल-कपट से कमजोर होता है मनुष्य का तपोबल : पंडित
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जींद। असमर्थ महिला कल्याण ट्रस्ट के संस्थापक पंडित राम निवास अहिरका ने दादा खेड़ा में पूजा-अर्चना के उपरांत कहा कि छल, कपट और असत्य का सहारा लेने से मनुष्य का तपोबल और नैतिक शक्ति कमजोर हो जाती है। उन्होंने कहा कि सत्य, धर्म और सदाचार ही जीवन को ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।
प्रवचन में उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य अपने दिव्यास्त्रों से पांडव सेना का भारी संहार कर रहे थे। उन्हें रोक पाना बड़े-बड़े महारथियों के लिए भी अत्यंत कठिन हो गया था।
द्रोणाचार्य की एक कमजोरी थी कि वे कोई अप्रिय समाचार सुनते ही ध्यानस्थ हो जाते थे। इसी का लाभ उठाते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने भीमसेन को अश्वत्थामा नामक हाथी का वध करने की योजना बताई। हाथी के मारे जाने के बाद भीम ने द्रोणाचार्य के पास जाकर कहा, अश्वत्थामा मारा गया।
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अहिरका ने आगे बताया कि सत्य की पुष्टि के लिए द्रोणाचार्य धर्मराज युधिष्ठिर के पास पहुंचे। तब युधिष्ठिर ने कहा, अश्वत्थामा मारा गया... नर या कुंजर। इसी बीच भगवान श्रीकृष्ण ने शंखनाद कर दिया, जिससे द्रोणाचार्य आगे के शब्द नहीं सुन सके और उन्होंने अपने पुत्र अश्वत्थामा के मारे जाने का विश्वास कर लिया।
पंडित राम निवास अहिरका ने कहा कि इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि छलपूर्ण आचरण का प्रभाव व्यक्ति के तप, तेज और नैतिक बल पर अवश्य पड़ता है।
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प्रवचन में उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य अपने दिव्यास्त्रों से पांडव सेना का भारी संहार कर रहे थे। उन्हें रोक पाना बड़े-बड़े महारथियों के लिए भी अत्यंत कठिन हो गया था।
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द्रोणाचार्य की एक कमजोरी थी कि वे कोई अप्रिय समाचार सुनते ही ध्यानस्थ हो जाते थे। इसी का लाभ उठाते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने भीमसेन को अश्वत्थामा नामक हाथी का वध करने की योजना बताई। हाथी के मारे जाने के बाद भीम ने द्रोणाचार्य के पास जाकर कहा, अश्वत्थामा मारा गया।
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अहिरका ने आगे बताया कि सत्य की पुष्टि के लिए द्रोणाचार्य धर्मराज युधिष्ठिर के पास पहुंचे। तब युधिष्ठिर ने कहा, अश्वत्थामा मारा गया... नर या कुंजर। इसी बीच भगवान श्रीकृष्ण ने शंखनाद कर दिया, जिससे द्रोणाचार्य आगे के शब्द नहीं सुन सके और उन्होंने अपने पुत्र अश्वत्थामा के मारे जाने का विश्वास कर लिया।
पंडित राम निवास अहिरका ने कहा कि इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि छलपूर्ण आचरण का प्रभाव व्यक्ति के तप, तेज और नैतिक बल पर अवश्य पड़ता है।