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Jind News: फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किया जागरूक
Fri, 25 Oct 2024 01:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 25 Oct 2024 01:07 AM IST
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24जेएनडी14-फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाली कस्टम हायरिंग केंद्र का निरीक्षण करते कृषि अध
सफीदों। कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. जितेंद्र सरोहा, कुमारी नितम मलिक व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वैज्ञानिक निकिता ग्रोवर ने गांव हाट, निम्नाबाद, मलिकपुर, साहनपुर पहुंचकर फसल अवशेष प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाले कस्टम हायरिंग केंद्र का निरीक्षण किया।
उन्होंने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के साथ पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में अगत करवाया। डॉ. जितेंद्र सरोहा ने बताया कि धान के अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता शक्ति कम होती है। क्योंकि आग लगाने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध जीवाश्म, नाइट्रोजन, फास्फोरस व अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। किसानों के सहायक मित्र कीट भी जलकर नष्ट हो जाते हैं। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। इससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बुजुर्गों, बच्चों व सांस के रोगियों को परेशानी होती है।
डॉ. नितिन मलिक ने किसानों को कस्टम हायरिंग केंद्र का ज्यादा लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया। किसानों को पराली न जलाकर आधुनिक कृषि यंत्र जैसे एसएमएस, सुपर सीडर, स्ट्रा बेलर, रीवर्सिबल एमबी प्लाऊ, डिस्क प्लाऊ, सब सोयलर व अन्य यंत्रों के उपयोग के बारे में बताया। इन यंत्रों का प्रयोग करके पराली को मिट्टी में मिलाकर खाद के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। खेतों में पराली न जलाने पर किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रावधान है। इस दौरान करनैल सिंह, सविता, सुपरवाइजर भगवान, भगवान, जसबीर सिंह, राजबीर, जगबीर, महेंद्र, जय मौजूद रहे।
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उन्होंने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के साथ पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में अगत करवाया। डॉ. जितेंद्र सरोहा ने बताया कि धान के अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता शक्ति कम होती है। क्योंकि आग लगाने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध जीवाश्म, नाइट्रोजन, फास्फोरस व अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। किसानों के सहायक मित्र कीट भी जलकर नष्ट हो जाते हैं। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। इससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बुजुर्गों, बच्चों व सांस के रोगियों को परेशानी होती है।
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डॉ. नितिन मलिक ने किसानों को कस्टम हायरिंग केंद्र का ज्यादा लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया। किसानों को पराली न जलाकर आधुनिक कृषि यंत्र जैसे एसएमएस, सुपर सीडर, स्ट्रा बेलर, रीवर्सिबल एमबी प्लाऊ, डिस्क प्लाऊ, सब सोयलर व अन्य यंत्रों के उपयोग के बारे में बताया। इन यंत्रों का प्रयोग करके पराली को मिट्टी में मिलाकर खाद के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। खेतों में पराली न जलाने पर किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रावधान है। इस दौरान करनैल सिंह, सविता, सुपरवाइजर भगवान, भगवान, जसबीर सिंह, राजबीर, जगबीर, महेंद्र, जय मौजूद रहे।

24जेएनडी14-फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाली कस्टम हायरिंग केंद्र का निरीक्षण करते कृषि अध
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