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लाडो पंचायत का बड़ा फैसला : गाली-गलौज और बेटियों पर टिप्पणी करने वालों पर लगेगा जुर्माना
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14जेएनडी03- संसद लाडो पंचायत में खुशी को पगड़ी बांधते हुए सुनील जागलान व सरपंच। स्रोत: ग्रामीण
जींद। कालवन गांव में आयोजित देश की पहली बालिका संसद ‘लाडो पंचायत’ में किशोरियों ने बेटियों के सम्मान और अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला लिया। पंचायत में गाली-गलौज और बेटियों के बारे में अनर्गल टिप्पणी करने वालों पर सामाजिक सजा के साथ जुर्माना लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
पंचायत बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता व बीबीपुर के पूर्व सरपंच सुनील जागलान की पहल पर आयोजित की गई। सुनील जागलान ने प्रधान पद के लिए पर्ची से चुनाव करवाया। इसमें खुशी को प्रधान चुना गया।
गांव के बुजुर्गों और सरपंच कविता ने खुशी को पगड़ी पहनाकर पंचायत की शुरुआत कराई। जागलान ने सचिव की भूमिका निभाई। प्रधान बनते ही खुशी ने गांव में गाली-गलौज खत्म करने और लड़कियों पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव रखा।
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किशोरियों ने कहा कि लड़कियों की गैर मौजूदगी में उनके पहनावे, पढ़ाई, मोबाइल और शादी जैसे मुद्दों पर फैसले लेने की परंपरा खत्म होनी चाहिए। जैस्मिन ने कहा कि लड़कियों की इज्जत बहस का विषय नहीं है। मुस्कान ने कहा कि गाली सिर्फ शब्द नहीं बल्कि हिंसा की शुरुआत है। खुशबू ने कहा कि अब लड़कियां चुप रहने वाली नहीं हैं और अपने फैसले खुद लेंगी।
गांव में लागू होगा गाली बंद घर अभियान
गांव की सरपंच कविता ने कहा कि गाली बंद करने के लिए बीबीपुर मॉडल और गाली बंद घर अभियान को गांव में लागू किया जाएगा। लाडो पंचायत का उद्देश्य लड़कियों को अपने अधिकारों और जीवन से जुड़े फैसलों पर खुलकर बात करने का मंच देना है। 2012 में बीबीपुर से शुरू हुई यह पहल कई राज्यों में बेटियों के लिए आजादी का स्पेस बन चुकी है। पंचायत को बाल विवाह और लड़कियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी आवाज उठाने के लिए जाना जाता है।
सिरसा में होगी अगली लाडो पंचायत
अगली लाडो पंचायत सिरसा में आयोजित की जाएगी। इसके माध्यम से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को गति देने और बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
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पंचायत बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता व बीबीपुर के पूर्व सरपंच सुनील जागलान की पहल पर आयोजित की गई। सुनील जागलान ने प्रधान पद के लिए पर्ची से चुनाव करवाया। इसमें खुशी को प्रधान चुना गया।
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गांव के बुजुर्गों और सरपंच कविता ने खुशी को पगड़ी पहनाकर पंचायत की शुरुआत कराई। जागलान ने सचिव की भूमिका निभाई। प्रधान बनते ही खुशी ने गांव में गाली-गलौज खत्म करने और लड़कियों पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव रखा।
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किशोरियों ने कहा कि लड़कियों की गैर मौजूदगी में उनके पहनावे, पढ़ाई, मोबाइल और शादी जैसे मुद्दों पर फैसले लेने की परंपरा खत्म होनी चाहिए। जैस्मिन ने कहा कि लड़कियों की इज्जत बहस का विषय नहीं है। मुस्कान ने कहा कि गाली सिर्फ शब्द नहीं बल्कि हिंसा की शुरुआत है। खुशबू ने कहा कि अब लड़कियां चुप रहने वाली नहीं हैं और अपने फैसले खुद लेंगी।
गांव में लागू होगा गाली बंद घर अभियान
गांव की सरपंच कविता ने कहा कि गाली बंद करने के लिए बीबीपुर मॉडल और गाली बंद घर अभियान को गांव में लागू किया जाएगा। लाडो पंचायत का उद्देश्य लड़कियों को अपने अधिकारों और जीवन से जुड़े फैसलों पर खुलकर बात करने का मंच देना है। 2012 में बीबीपुर से शुरू हुई यह पहल कई राज्यों में बेटियों के लिए आजादी का स्पेस बन चुकी है। पंचायत को बाल विवाह और लड़कियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी आवाज उठाने के लिए जाना जाता है।
सिरसा में होगी अगली लाडो पंचायत
अगली लाडो पंचायत सिरसा में आयोजित की जाएगी। इसके माध्यम से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को गति देने और बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।