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Jind News: 800 साल पहले बसा था करसोला गांव, संजोए है इतिहास
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26जेएनडी 01: बाबा सेवागिरी महाराज मंदिर का फोटो। संवाद
जुलाना। जिला मुख्यालय से 24 किलोमीटर और जुलाना उपमंडल से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव करसोला आज भी अपनी 800 वर्ष पुरानी विरासत को संजोए हुए है। गांव का इतिहास बेहद समृद्ध और प्राचीन रहा है। लगभग 800 साल पहले इस गांव को लाठर ग्रोत्र के क्रसल और बरसल दो भाइयों ने बसाया था। पहले यहां रांगना जाति के लोग रहते थे।
गांव में लगभग 5000 मतदाता अपने मत का प्रयोग कर गांव की सरकार चुनते हैं। इस गांव की आबादी लगभग साढ़े सात हजार से अधिक है। गांव में सभी जातियों के लोगों के बीच भाईचारा इतना मजबूत है कि विवाद होने पर पुलिस थाने जाने के बजाय गांव में ही आपसी समझौते से मामला सुलझा लेते हैं।
दादा खेड़ा और बाबा सेवागिरी मंदिर गांव की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। करसोला, राजगढ़ और मांडो गांव के ग्रामीणों की इस मंदिर के प्रति गहरी श्रद्धा जुड़ी हुई है। ग्रामीण प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की नवमी के दिन मंदिर में पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन करते हैं। हर वर्ष चैत्र मास की नवमी को यहां भव्य मेला लगता है। इसमें दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
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हड़प्पा सभ्यता के साथ जुड़ा है करसोला का इतिहास
वर्ष 2010 में महाराष्ट्र राज्य पुरातत्व विभाग को करसोला गांव में बाबा माडूनाथ डेरे की जानकारी मिली। 2011 में विभागीय टीम ने यहां लगभग छह माह तक खुदाई की। पुरातत्व विभाग की टीम को यहां हड़प्पा सभ्यता के अवशेष मिले। यह गांव हड़प्पा सभ्यता के अंत से जुड़ा हुआ है। यहां उनको चार तरह की शैली के बर्तन मिले जिनमें सबसे ज्यादा चित्रित धुरसर पात्र के मिले जिसकी शुरुआत हड़प्पा सभ्यता के अंत में हुई थी। जब यह रिसर्च का काम चल रहा था तो उसी समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बड़ी बेटी प्रोफेसर उपेन्द्र सिंह 13 मार्च 2011 में स्थल का दौरा किया। उपेन्द्र सिंह दिल्ली के पुरातत्व विद्यालय में पढ़ाती थीं। रिसर्च पूरी करने के बाद खुदाई वाली जगह को पॉलीथिन से ढककर और ऊपर मिट्टी डालकर वे टीम इस डेरे की जगह को अपने अधीन लिखवाकर ले गईं लेकिन ग्रामीणों को अब संरक्षण का इंतजार है।
गांव एक नजर में ...
5000 मतदाता
7500 आबादी
एक निजी स्कूल, दो सरकारी स्कूल
गांव में तीन तालाब
गांव में चार मंदिर
क्या बोले लोग
पुरातत्व विभाग को बाबा माडूनाथ डेरे की जमीन को संरक्षण में लेकर जांच करनी चाहिए ताकि इसे पयर्टन स्थल बनाया जा सके। इससे गांव की आमदनी भी बढ़ेगी और ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। डेरे के चारों और चाहरदीवारी करवाई जाए ताकि पर्यावरण संरक्षण भी हो सके। - मोनू लाठर ग्रामीण।
जुलाना क्षेत्र के किलाजफरगढ़ गांव के किले की तर्ज पर पुरातत्व विभाग को गांव की जांच करनी चाहिए। राखी गढ़ी गांव में मिलने वाले अवशेष गांव में भी मिल सकते हैं तो जमीन की खुदाई करवाई जाए। अगर गांव में मिले अवशेषों के लिए म्यूजियम में रखा जाएगा तो दूर दूर से लोग देखने आएंगे जिससे गांव की आमदनी भी बढ़ेगी और नाम भी रोशन होगा। - पवन लाठर, पार्षद प्रतिनिधि करसोला।
डेरे के प्रति पूरे गांव ही नहीं बल्कि आस पास के कई गांवों के ग्रामीणों की आस्था है। पुरातत्व विभाग को डेरे की जमीन को गांव को सौंपे ताकि डेरे का सुंदरीकरण किया जा सके। - बंसीगिरी, महंत डेरा माडूनाथ।
पुरातत्व विभाग बाबा माडूनाथ डेरे की जमीन पर बिजली और पानी का प्रबंध करवाए। बाबा माडूनाथ डेरे के प्रति लोगों की काफी आस्था है। पुरातत्व विभाग को डेरे के सुंदरीकरण के लिए आगे आना चाहिए। ग्राम पंचायत डेरे की जमीन पर कोई भी विकास कार्य नही करवा पा रही है। अगर डेरे की जमीन पर म्यूजियम बनाया जाए। इससे ग्रामीणों को काफी फायदा होगा - महेंद्र सरपंच करसोला।
फोटो केप्शन:
26जेएनडी 01: बाबा सेवागिरी महाराज मंदिर का फोटो। संवाद
26जेएनडी 02: बाबा माडूनाथ मंदिर का फोटो। संवाद
26जेएनडी03: मोनू लाठर ।
26जेएनडी 04: पवन लाठर ।
26जेएनडी 05: बाबा बंसीगिरी ।
26जेएनडी06: सरपंच महेंद्र लाठर ।
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गांव में लगभग 5000 मतदाता अपने मत का प्रयोग कर गांव की सरकार चुनते हैं। इस गांव की आबादी लगभग साढ़े सात हजार से अधिक है। गांव में सभी जातियों के लोगों के बीच भाईचारा इतना मजबूत है कि विवाद होने पर पुलिस थाने जाने के बजाय गांव में ही आपसी समझौते से मामला सुलझा लेते हैं।
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दादा खेड़ा और बाबा सेवागिरी मंदिर गांव की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। करसोला, राजगढ़ और मांडो गांव के ग्रामीणों की इस मंदिर के प्रति गहरी श्रद्धा जुड़ी हुई है। ग्रामीण प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की नवमी के दिन मंदिर में पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन करते हैं। हर वर्ष चैत्र मास की नवमी को यहां भव्य मेला लगता है। इसमें दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
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हड़प्पा सभ्यता के साथ जुड़ा है करसोला का इतिहास
वर्ष 2010 में महाराष्ट्र राज्य पुरातत्व विभाग को करसोला गांव में बाबा माडूनाथ डेरे की जानकारी मिली। 2011 में विभागीय टीम ने यहां लगभग छह माह तक खुदाई की। पुरातत्व विभाग की टीम को यहां हड़प्पा सभ्यता के अवशेष मिले। यह गांव हड़प्पा सभ्यता के अंत से जुड़ा हुआ है। यहां उनको चार तरह की शैली के बर्तन मिले जिनमें सबसे ज्यादा चित्रित धुरसर पात्र के मिले जिसकी शुरुआत हड़प्पा सभ्यता के अंत में हुई थी। जब यह रिसर्च का काम चल रहा था तो उसी समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बड़ी बेटी प्रोफेसर उपेन्द्र सिंह 13 मार्च 2011 में स्थल का दौरा किया। उपेन्द्र सिंह दिल्ली के पुरातत्व विद्यालय में पढ़ाती थीं। रिसर्च पूरी करने के बाद खुदाई वाली जगह को पॉलीथिन से ढककर और ऊपर मिट्टी डालकर वे टीम इस डेरे की जगह को अपने अधीन लिखवाकर ले गईं लेकिन ग्रामीणों को अब संरक्षण का इंतजार है।
गांव एक नजर में ...
5000 मतदाता
7500 आबादी
एक निजी स्कूल, दो सरकारी स्कूल
गांव में तीन तालाब
गांव में चार मंदिर
क्या बोले लोग
पुरातत्व विभाग को बाबा माडूनाथ डेरे की जमीन को संरक्षण में लेकर जांच करनी चाहिए ताकि इसे पयर्टन स्थल बनाया जा सके। इससे गांव की आमदनी भी बढ़ेगी और ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। डेरे के चारों और चाहरदीवारी करवाई जाए ताकि पर्यावरण संरक्षण भी हो सके। - मोनू लाठर ग्रामीण।
जुलाना क्षेत्र के किलाजफरगढ़ गांव के किले की तर्ज पर पुरातत्व विभाग को गांव की जांच करनी चाहिए। राखी गढ़ी गांव में मिलने वाले अवशेष गांव में भी मिल सकते हैं तो जमीन की खुदाई करवाई जाए। अगर गांव में मिले अवशेषों के लिए म्यूजियम में रखा जाएगा तो दूर दूर से लोग देखने आएंगे जिससे गांव की आमदनी भी बढ़ेगी और नाम भी रोशन होगा। - पवन लाठर, पार्षद प्रतिनिधि करसोला।
डेरे के प्रति पूरे गांव ही नहीं बल्कि आस पास के कई गांवों के ग्रामीणों की आस्था है। पुरातत्व विभाग को डेरे की जमीन को गांव को सौंपे ताकि डेरे का सुंदरीकरण किया जा सके। - बंसीगिरी, महंत डेरा माडूनाथ।
पुरातत्व विभाग बाबा माडूनाथ डेरे की जमीन पर बिजली और पानी का प्रबंध करवाए। बाबा माडूनाथ डेरे के प्रति लोगों की काफी आस्था है। पुरातत्व विभाग को डेरे के सुंदरीकरण के लिए आगे आना चाहिए। ग्राम पंचायत डेरे की जमीन पर कोई भी विकास कार्य नही करवा पा रही है। अगर डेरे की जमीन पर म्यूजियम बनाया जाए। इससे ग्रामीणों को काफी फायदा होगा - महेंद्र सरपंच करसोला।
फोटो केप्शन:
26जेएनडी 01: बाबा सेवागिरी महाराज मंदिर का फोटो। संवाद
26जेएनडी 02: बाबा माडूनाथ मंदिर का फोटो। संवाद
26जेएनडी03: मोनू लाठर ।
26जेएनडी 04: पवन लाठर ।
26जेएनडी 05: बाबा बंसीगिरी ।
26जेएनडी06: सरपंच महेंद्र लाठर ।

26जेएनडी 01: बाबा सेवागिरी महाराज मंदिर का फोटो। संवाद

26जेएनडी 01: बाबा सेवागिरी महाराज मंदिर का फोटो। संवाद

26जेएनडी 01: बाबा सेवागिरी महाराज मंदिर का फोटो। संवाद

26जेएनडी 01: बाबा सेवागिरी महाराज मंदिर का फोटो। संवाद

26जेएनडी 01: बाबा सेवागिरी महाराज मंदिर का फोटो। संवाद